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भारत के स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाने वाली इस विदेशी लेखिका ने महज 44 साल में ली थी अंतिम सांसे

स्वामी विवेकानंद से प्रभावित होकर ये अंग्रेजी आइरिश समाजिक कार्यकर्ता व लेखिका भारत आईं थी। इसके बाद इन्होंने स्वतंत्रता संग्राम व महिला शिक्षा में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी।

By इंडिया वॉइस 
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वह विदेशी महिला जिसने भारत को जीवन अर्पित कर दियाः एक अंग्रेजी-आइरिश सामाजिक कार्यकर्ता और लेखिका मार्गरेट एलिजाबेथ नोबेल (भगिनी निवेदिता), जिन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय देशभक्तों की न केवल खुले तौर पर मदद की बल्कि, भारत में महिला शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। 13 अक्टूबर 1911 को महज 44 साल की उम्र में दार्जिलिंग में उन्होंने आखिरी सांसें लीं। उन्होंने कभी लिखा था- ‘मेरा जीवन भारत को अर्पित है। मैं यहीं रहूंगी और मर जाऊंगी।’

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10 साल की उम्र में पिता को खोने के बाद मार्गरेट एलिजाबेथ का जीवन बहुत गरीबी में बीता। उनकी शिक्षा इंग्लैंड के एक चैरिटेबल बोर्डिंग स्कूल में हुई। अपनी पढ़ाई 17 साल की उम्र में पूरी कर उन्होंने शिक्षक का काम शुरू किया। वर्ष 1895 में ऐसी घटना हुई, जिसने उनके जीवन को बदलकर रख दिया। उन्हें एक निजी संगठन द्वारा एक हिंदू योगी का भाषण सुनने का न्योता मिला। स्वामी विवेकानंद यह युवा योगी थे। मार्गरेट उनके विचारों से इतनी प्रभावित हुईं कि उन्होंने भारत आने का फैसला किया।

स्वामी विवेकानंद के व्यक्तित्व और विचारों से प्रभावित होकर मार्गरेट ने उन्हें अपना आध्यात्मिक गुरु बना लिया और भारत को अपनी कर्मभूमि बनाकर जीवनपर्यंत यहीं रहीं। स्वामी विवेकानंद ने ही उन्हें मार्गरेट एलिजाबेथ नोबल से निवेदिता का नाम दिया था। 25 मार्च 1898 को स्वामी विवेकानंद ने उन्हें दीक्षा दी और करुणा एवं गरीब, जरूरतमंदों के लिए काम करने के लिए प्रेरित किया। वे कोलकाता के बाग बाजार में बस गयीं। यहीं उन्होंने बच्चियों के लिए स्कूल खोला। इस स्कूल का उद्घाटन स्वामी रामकृष्ण परमहंस की धर्मपत्नी मां शारदा ने किया था।

1905 में उन्होंने पहली बार भारत के लिए ध्वज की कल्पना की और उसके रूप-रंग की योजना बनायी। 1906 में यही ध्वज कांग्रेस द्वारा आयोजित प्रदर्शनी में दिखाया गया। ब्रिटिश सरकार ने जब ‘वंदे मातरम’ पर प्रतिबंध लगाया तो उन्होंने अपने स्कूल में इसका गायन जारी रखा। उन्होंने स्वदेशी अभियान का समर्थन किया और इसके लिए लोगों को जागरूक करने की भी मुहिम शुरू की। उन्होंने भारतीय कला-संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए बंगाल स्कूल ऑफ आर्ट की स्थापना की।

भारतीय स्वतंत्रता सेनानी गोपाल कृष्ण गोखले ने उनसे अपनी मुलाकात को कुछ इस तरह याद किया- ‘प्रकृति की कुछ महान शक्ति के संपर्क में आने जैसा था।’ जबकि महान तमिल राष्ट्रवादी कवि सुब्रह्मण्यम भारती ने उन्हें गुरु के रूप में स्वीकार करते हुए कहा कि ‘उन्होंने मुझे भारत माता की पूर्णता को दिखाया और मुझे अपने देश से प्यार करना सिखाया।’

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अन्य अहम घटनाएंः

1542ः सिंध के अमरकोट में जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर का जन्म।

1792ः व्हाइट हाउस की नींव रखी गयी। वर्ष 1800 से यह अमेरिकी राष्ट्रपति का सरकारी आवास है।

1895ः भारतीय क्रिकेट टीम के पहले टेस्ट कप्तान सीके नायडू का जन्म।

1911ः भारतीय फिल्म अभिनेता अशोक कुमार का जन्म।

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1948ः प्रसिद्ध गायक नुसरत फतेह अली का जन्म।

1987ः मशहूर गायक किशोर कुमार का निधन।

1999ः अटल बिहारी वाजपेयी तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री बने।

2004ः हिंदी फिल्म अभिनेत्री निरुपा राय का निधन।

हिन्दुस्थान समाचार

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