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भारत में 90 करोड़ हिन्दू समान नागरिक अधिकारों की कर रहे हैं मांग – पुष्पेन्द्र कुलष्श्रेष्ठ

जब तक संस्कृति है तब तक यह देश और राष्ट्र है। देश को अखंड रखना है तो राष्ट्र को जागृत करना होगा उसके बगैर यह संभव नहीं है।

By इंडिया वॉइस 
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नई दिल्ली, 21 दिसंबर। भारत की बहुसंख्यक 90 करोड़ की जनता समान नागरिक अधिकारों की भीख मांग रही है और कुछ उन्मादी लोग अपने विशेष नागरिक अधिकारों का आनंद ले रहे हैं, जबकि लोकतंत्र संख्या बल का खेल होता है।

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आज के समय में लगता है जैसे सबसे अधिक हिन्दू बिकाऊ है, दो रुपये किलो चावल और एक रुपये किलो गेहूं, सस्ती बिजली में दिल्ली की सरकार चुन ली जाती है।

सरकारों को चुनते वक्त हमारे मन में क्या रहता है ? इतने सस्ते में हम सत्ता ऐसे लोगों को सौंप देते हैं, जिनके अपने निजी एजेण्डे हैं, उन्हें राष्ट्र और राज्य दोनों से कोई मतलब नहीं। याद रखो, सरकारें बदलने से राष्ट्र नहीं बदलते।

आपके वर्तमान को देखकर दुनिया भविष्य में आपको याद रखेगी, यह आप पर निर्भर है कि किस प्रकार का आप इतिहास बना रहे हैं। उक्त विचार वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने सोमवार रात राजधानी भोपाल में आयोजित विचार संगोष्ठी ”विश्व पटल पर सनातन संस्कृति की शाश्वतता” पर व्यक्त किए।

 

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संस्कृति से ही देश और राष्ट्र है

उन्होंने कहा कि पिछले सत्तर सालों से हमें पढ़ाया जा रहा है कि बाबर, औरंगजेब ने क्या किया, क्या इससे पहले भारत नहीं था ? दुनिया भर में सरकारें राष्ट्र नहीं चलातीं, वह देश चलाती हैं। हम किसी सरकार का समर्थन या विरोध नहीं करते हैं, हम तो बस इतना जानते हैं कि जब तक संस्कृति है तब तक यह देश और राष्ट्र है। देश को अखंड रखना है तो राष्ट्र को जागृत करना होगा उसके बगैर यह संभव नहीं है।

सरकार के साथ ही यह हम सबकी भी जिम्मेदारी है कि आनेवाले वक्त की आहट को पहचानें। उन्होंने ‘वक्फ प्रॉपर्टी एक्ट 2013’, ‘सच्चर कमेटी’, अल्पसंख्यक आयोग समेत तमाम मुददों पर विस्तार से बोला और कहा कि स्थितियां अराजकता की तरफ बढ़ रही हैं। 90 करोड़ हिन्दुओं को पता ही नहीं चल रहा है कि उनके साथ कौन सा खेल खेला जा रहा है? बहुसंख्यक होने के बाद भी हिन्दू को पता ही नहीं कि सरकारें किस तरह से उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहीं हैं।

 

वक्फ प्रॉपर्टी एक्ट 2013 का आर्टिकल 40 बेहद खतरनाक

आंध्रप्रदेश के एक जज के हवाले से उन्होंने कहा कि देश में सबसे ज्यादा जमीन रेलवे के पास है। उसके बाद डिफेंस और फिर वक्फ बोर्ड के पास है। आपके इतने मठ, मंदिर हैं, बहुसंख्यक आप हो, लेकिन आपके पास इतनी जमीन नहीं। संकट तो यह है कि यह वक्फ प्रॉपर्टी एक्ट 2013 इसका एक प्रावधान आर्टिकल 40 बेहद खतरनाक है। यह आर्टिकल बोर्ड को यह अधिकार देता है कि वक्फ बोर्ड के दो सदस्यों को देश में अगर कहीं भी यह लगे कि कोई संपत्ति पहले वक्फ की थी तो वह उसे अपने कब्जे में ले सकता है।

बीते 10 सालों में इस कानून के चलते देश में सरकारी जमीनों को कब्जाने का अभियान चल रहा है। इसके लिए उन्हें कोई साक्ष्य देने की जरूरत नहीं है। दोनों सदस्य जिला मजिस्ट्रेट या किसी भी जिम्मेदार अधिकारी को 24 से 72 घंटे में उसे खाली करने का आदेश दे सकते हैं। ऐसी सूरत में पूरी मशीनरी को उस आदेश पर अमल कराना होता है। हाई कोर्ट में ऐसे मामलों की सुनवाई नहीं हो सकती।

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उन्होंने इलाहाबाद में चंद्रशेखर आजाद अल्फ्रेड पार्क का हवाला देते हुए कहा कि कोरोनाकाल में पार्क में मस्जिद, मजार और दूसरे कई निर्माण हो गए। मामला जानकारी में आया तो हमारी टीम के एक सदस्य विष्णु शंकर जैन ने हाई कोर्ट में पिटीशन डाली। तब हाई कोर्ट ने यूपी सरकार से जवाब मांगा, लताड़ लगाई गई। तब कहीं जाकर वहां से वे मजारें हटाई गईं।

फिर भी वहां एक मजार बनी रह गई थी, जब उसे हटाने के लिए कोर्ट ने तारीख दी तो कम्प्यूटर में उस दिन को ही नहीं चढ़ाया गया, वह तो विष्णु शंकर जैन हैं जो न्यायाधीश के समक्ष पहुंच गए और बोले कि आज आपने सुनवाई के लिए हमारा भी दिन तय किया है। तब कहीं जाकर पता चला कि खेल किस तरह से खेला जा रहा है और एक हम बहुसंख्यक हिन्दू हैं, समूह में यह समझ ही नहीं पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस एक्ट के बाद से सरकारी जमीन घेरने का सिलसिला देशभर में चल रहा है।

 

सच्चर कमेटी को बताया असंवैधानिक 

वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र ने 2005 में बनी ‘सच्चर कमेटी’ के अस्तित्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह कमेटी संवैधानिक नहीं है। वास्तविकता यही है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री ने अपनी मर्जी से मुस्लिम समुदाय की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक स्थिति का परीक्षण करने के लिए समिति नियुक्त करने का निर्देश जारी किया जबकि अनुच्छेद 14 और 15 के आधार पर किसी भी धार्मिक समुदाय के साथ अलग व्यवहार नहीं किया जा सकता।

सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों की स्थिति की जाँच के लिए एक आयोग नियुक्त करने की शक्ति भारत के संविधान के अनुच्छेद-340 के तहत भारत के राष्ट्रपति के पास निहित है, लेकिन इस पर राष्ट्रपति ने हस्ताक्षर ही नहीं किए हैं। समिति का गठन भारतीय संविधान के अनुच्छेद-77 के उल्लंघन है और 2006 से इसके बहाने हजारों करोड़ रुपये मुसलमानों के अपलिफ्टमेंट के नाम पर खर्च हो रहे हैं।

 

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अल्पसंख्यक होने के क्राइटेरिया को लेकर सरकार के पास नहीं है कोई नीति 

अल्पसंख्यक होने के क्राइटेरिया को लेकर सरकार के पास कोई नीति नहीं है। फिर भी इस कमेटी की सिफारिश पर देश में 5000 करोड़ का सालाना बजट हर साल मुसलमानों को दिया जाता है। इस तरह से यह भारतीय संविधान के समानता के अधिकार का उल्लंघन है।

जो लोग टैक्स देते हैं उन्हें सरकार से यह पूछना चाहिए कि आखिर हमारे लिए और हमारे बच्चों के लिए कहां क्या सुविधाएं दे रहे हैं। उन्होंने अल्पसंख्यक आयोग पर भी तार्किक रूप से सवाल उठाए तथा उसके दुरुपयोग की बात कही। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के साथ ही राज्यों में भी अल्पसंख्यक आयोग बने हैं। अल्पसंख्यकों को दोनों आयोगों से आर्थिक सहायता दी जा रही है।

 

हिन्दुस्थान समाचार

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