2026 की शुरुआत वैश्विक राजनीति के लिए असाधारण घटनाक्रम लेकर आई। अमेरिका द्वारा वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लेने की खबर ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर तीखी बहस छेड़ दी है। किसी संप्रभु देश के मौजूदा राष्ट्रपति की गिरफ्तारी, वह भी दूसरे देश की कार्रवाई में, आधुनिक इतिहास में बेहद दुर्लभ और विवादास्पद कदम माना जा रहा है।
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अमेरिका का दावा है कि मादुरो पर अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी और संगठित अपराध से जुड़े गंभीर आरोप हैं, जिनकी जांच वर्षों से चल रही थी। वॉशिंगटन का कहना है कि यह कार्रवाई कानून के दायरे में की गई और इसका उद्देश्य वैश्विक सुरक्षा को मजबूत करना है। लेकिन इस दलील ने दुनिया को पूरी तरह आश्वस्त नहीं किया।
वेनेज़ुएला ने इसे खुला हस्तक्षेप और संप्रभुता पर हमला बताया है। रूस, चीन और कुछ लैटिन अमेरिकी देशों ने भी अमेरिका की आलोचना करते हुए चेतावनी दी है कि इस तरह की कार्रवाइयाँ अंतरराष्ट्रीय कानून की मूल भावना को कमजोर करती हैं। संयुक्त राष्ट्र में भी यह सवाल उठ रहा है कि क्या किसी देश को दूसरे देश के शासन प्रमुख को जबरन हिरासत में लेने का अधिकार है।
इस घटना ने वैश्विक व्यवस्था के दोहरे मानदंडों को फिर से सामने ला दिया है, जहाँ मानवाधिकार और कानून की बात तो होती है, लेकिन ताक़तवर देश अपने फैसले खुद तय करते दिखते हैं। 2026 का यह घटनाक्रम आने वाले वर्षों में कूटनीति, संप्रभुता और शक्ति संतुलन पर गहरे असर छोड़ सकता है।