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आंध्र प्रदेश में ऊर्जा संकट से उभरने के लिए मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से दखल देने की मांग की

मुख्यमंत्री रेड्डी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखा पत्र

By इंडिया वॉइस 
Updated Date

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने ऊर्जा संकट के चलते राज्य में भयावह स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

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मंगलवार को जानकारी मिली है कि मुख्यमंत्री रेड्डी ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर कोयले की कमी और बिजली वितरण कंपनियों की कमजाेर वित्तीय स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री से समस्या के हल के लिए कदम उठाने और दैनिक आधार पर बिजली उत्पादन परिदृश्य की निगरानी करने का आग्रह किया। मोदी को लिखे पत्र में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के लिए ऊर्जा की मांग को पूरा करना लगातार कठिन होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य की अनिश्चित वित्तीय स्थिति को देखते हुए वह खुले बाजार से आवश्यक बिजली की खरीद करने में सक्षम नहीं है। क्योंकि बढ़ती मांग के साथ खरीद मूल्य भी बढ़ गया है।

मुख्यमंत्री रेड्डी ने मोदी से कोयला मंत्रालय और रेलवे को आंध प्रदेश में थर्मल पावर स्टेशनों को 20 कोयला रेक आवंटित करने का आग्रह किया। उन्होंने राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण के समक्ष चल रही कार्यवाही की परवाह किए बिना आपातकालीन आधार पर फंसे और बंद पड़े कोयला संयंत्रों के पुनरुद्धार की भी मांग की। इससे गैर-पिटहेड कोयला संयंत्रों तक कोयला परिवहन में लगने वाले समय की बचत होगी और पर्याप्त मात्रा में कोयले का परिवहन भी संभव होगा। मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा कि संयंत्रों के रखरखाव के कारण केंद्रीय उत्पादन स्टेशनों से लगभग 500 मेगावाट की कमी को जल्द से जल्द संयंत्रों को पुनर्जीवित करके या रखरखाव स्थगित कर दिया जा सकता है। उन्होंने पीएम मोदी से बैंकों व ऋण देने वाले संस्थानों को कोयला भुगतान करने और बाजार में खरीदारी करने के लिए संकट दूर होने तक वितरण कंपनियों को उदारतापूर्वक कार्यशील पूंजी ऋण प्रदान करने का निर्देश देने का भी आग्रह किया।

आंध्र प्रदेश में वर्तमान में प्रति दिन लगभग185-190 मिलियन यूनिट बिजली की मांग को पूरा कर रहा है। एपीजेनको के थर्मल पावर स्टेशन, जो राज्य की 45 प्रतिशत ऊर्जा जरूरतों को पूरा करते हैं, के पास मुश्किल से एक या दो दिन के लिए कोयले का स्टॉक है। एपीजेनको के थर्मल पावर स्टेशन अपनी 90 मिलियन यूनिट प्रतिदिन की क्षमता के 50 प्रतिशत से भी कम उत्पादन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय उत्पादन स्टेशन भी अपनी 40 एमयू प्रति दिन क्षमता के 75 प्रतिशत से अधिक की आपूर्ति करने में सक्षम नहीं हैं। 8,000 मेगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता से ऊर्जा को प्राप्त करने के लिए आंध्र प्रदेश राज्य कोयला आधारित संयंत्रों के साथ अनुबंध निष्पादित नहीं कर रहा है और इसके परिणामस्वरूप वह अपनी कमी ऊर्जा पूरा करने के लिए बाजार से खरीद पर बहुत अधिक निर्भर है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि खुले बाजार में बिजली का दैनिक औसत बाजार मूल्य 15 सितंबर को 4.6 रुपये प्रति किलोवाट प्रति घंटा से बढ़कर 8 अक्टूबर को 15 रुपये प्रति किलोवाट घंटा हो गया। उन्होंने कहा कि बाजार में बिजली दरें दिन-ब-दिन बढ़ रही हैं और वे 20 रुपये प्रति यूनिट तक पहुंच गई हैं। उन्होंने कहा, यह काफी खतरनाक स्थिति है और अगर स्थिति बनी रहती है, तो बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति और खराब हो जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में फसल कटाई के अंतिम चरण में अधिक पानी की आवश्यकता है और अगर बिजली का संकट नहीं ठली या बिजली की आपूरथी बंद कर दी गयी तो फसल सुख ने खतरा हो सकती।

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