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सेना को मिलेगा ‘हंटर किलर’ अर्जुन मार्क-1ए टैंक, केंद्र सरकार ने दिया ऑर्डर

गुरुवार को रक्षा मंत्रालय ने 'मेक इन इंडिया' पहल को बढ़ावा देते हुए भारतीय सेना के लिए स्वदेशी 118 मुख्य युद्धक टैंक अर्जुन MK-1A टैंकों की आपूर्ति के लिए ऑर्डर दिया है। 7,523 करोड़ रुपये का ये आदेश ऑर्डिनेंस फैक्टरी बोर्ड (OFB) की हैवी व्हीकल फैक्ट्री, अवाडी (तमिलनाडु) को दिया गया है।

By इंडिया वॉइस 
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नई दिल्ली, 23 सितंबर। आखिरकार लंबे इंतजार के बाद गुरुवार को रक्षा मंत्रालय ने ‘मेक इन इंडिया’ पहल को बढ़ावा देते हुए भारतीय सेना के लिए स्वदेशी 118 मुख्य युद्धक टैंक अर्जुन MK-1A टैंकों की आपूर्ति के लिए ऑर्डर दिया है। 7,523 करोड़ रुपये का ये आदेश ऑर्डिनेंस फैक्टरी बोर्ड (OFB) की हैवी व्हीकल फैक्ट्री, अवाडी (तमिलनाडु) को दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी साल की शुरुआत में 14 फरवरी को चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे को पहला टैंक सौंपा था।

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करीब 8,000 लोगों को मिलेगा रोजगार

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने 23 फरवरी को 14 हजार करोड़ रुपये से अधिक के खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी थी, जिसमें 118 स्वदेशी अर्जुन मार्क-1ए टैंक शामिल हैं। टैंकों का उत्पादन आदेश जारी होने से मध्यम और लघु उद्योग में करीब 8,000 लोगों को रोजगार के मौके मिलेंगे। ये अत्याधुनिक रक्षा प्रौद्योगिकियों में स्वदेशी क्षमता का प्रदर्शन करने वाली एक प्रमुख परियोजना होगी। एमबीटी अर्जुन एमके-1ए को दो साल (2010-12) के भीतर DRDO की कई प्रयोगशालाओं के साथ कॉम्बैट व्हीकल रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टाब्लिशमेंट (सीवीआरडीई) ने डिजाइन और विकसित किया है। जून, 2010 से विकास गतिविधियां शुरू हुईं और जून 2012 में टैंक को उपयोगकर्ता परीक्षणों के लिए मैदान में उतारा गया।

सेना के सुझाव पर 72 तरह के सुधार

पूरी तरह से स्वदेशी इस टैंक को पहली बार 2004 में भारतीय सेना में शामिल किया गया था। मौजूदा समय में सेना के पास अर्जुन टैंक की 2 रेजिमेंट हैं, जिन्हें जैसलमेर में भारत-पाकिस्तान की सीमा पर तैनात किया गया है। अर्जुन टैंक का इस्तेमाल करने के दौरान सेना को कई तरह के अनुभव हासिल हुए। इनके आधार पर सेना ने इसके उन्नत वर्जन के लिए कुल 72 तरह के सुधारों की मांग की। DRDO ने सेना के सुझावों को शामिल करते हुए हंटर किलर टैंक तैयार किया है। इसके बाद भी सेना ने इस टैंक में कुछ और सुधार की मांग की थी। इसके बाद DRDO ने करीब 14 नए फीचर्स को टैंक में शामिल करके 4 टैंक तैयार किए।

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पीएम मोदी कर चुके हैं अर्जुन टैंक की सवारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नवंबर, 2019 में सैनिकों के साथ दिवाली मनाने जैसलमेर (राजस्थान) के लोंगेवाला सीमा पर गए थे, तो उन्होंने जिस अर्जुन टैंक की सवारी की थी, उसी का ये उन्नत संस्करण एमके-1ए है। उन्नत संस्करण अर्जुन मार्क-1ए ने 2020 में सभी परीक्षण पूरे कर लिए थे, लेकिन सरकार से मंजूरी मिलने का इंतजार था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब 14 फरवरी को चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे को डीआरडीओ अध्यक्ष डॉ. जी सतीश रेड्डी की मौजूदगी में पहला अर्जुन मार्क-1ए मुख्य युद्धक टैंक (एमबीटी) सौंपा, तभी उत्पादन के लिए औपचारिक आदेश देने का रास्ता साफ हो गया था।

सेना को मिलेगा 5 MBT का पहला बैच

टैंक का निर्माण अवाडी (तमिलनाडु) स्थित ऑर्डिनेंस फैक्टरी बोर्ड (OFB) के हैवी व्हीकल फैक्ट्री में किया जाएगा। सरकार से अनुबंध पर हस्ताक्षर होने के 30 महीनों के भीतर 5 एमबीटी का पहला बैच सेना को सौंप दिया जाएगा। DRDO के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि अब कुल 118 नए टैंक बनाए जाएंगे। भारतीय सेना अब इस टैंक की दो और रेजीमेंट बनाने वाली है, जो अगले 6 महीनों में सेना में शामिल कर ली जाएंगी। हर एक रेजीमेंट में 59 अर्जुन टैंक होंगे। 17 साल पहले सेना में शामिल किए गए 124 ‘अर्जुनों’ की तुलना में मार्क-1ए टैंक में बेहतर मारक क्षमता, गतिशीलता और सुरक्षा है।

अर्जुन मार्क-1A टैंक की खासियत

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नए उन्नत वर्जन में इसकी फायर पावर क्षमता को काफी बढ़ाया गया है। साथ ही इसमें एकदम नई तकनीक का ट्रांसमिशन सिस्टम लगाया गया है। ये टैंक अपने लक्ष्य को खुद तलाश करने में सक्षम है। ये खुद तेजी से आगे बढ़ते हुए दुश्मन के लगातार हिलने वाले लक्ष्यों पर भी सटीक प्रहार कर सकता है। टैंक में कमांडर, गनर, लोडर और चालक का क्रू होगा। इन चारों को ये टैंक युद्ध के दौरान भी पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करेगा। टैंक की सबसे बड़ी खासियत ये है कि रणक्षेत्र में बिछाई गई माइंस को साफ करते हुए आसानी से आगे बढ़ सकता है। कंधे से छोड़ी जाने वाले एंटी टैंक ग्रेनेड और मिसाइल का इस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। ये टैंक विशेष रूप से भारतीय परिस्थितियों के लिए कॉन्फ़िगर और डिज़ाइन किया गया है, इसलिए ये प्रभावी तरीके से सीमाओं की रक्षा के लिए तैनाती के लिए उपयुक्त है।

दिन-रात कर सकता है दुश्मन से मुकाबला

इसके अलावा केमिकल अटैक से बचाने के लिए इसमें विशेष तरह के सेंसर लगे हैं। केमिकल या परमाणु बम के विस्फोट की स्थिति में इसमें लगा अलार्म बज उठेगा। साथ ही टैंक के अंदर हवा का दबाव बढ़ जाएगा, ताकि बाहर की हवा अंदर ना जा सके। क्रू मेंबर के लिए ऑक्सीजन के लिए बेहतरीन फिल्टर लगाए गए हैं। ये दिन और रात की परिस्थितियों में और स्थिर और गतिशील दोनों मोड में दुश्मन से मुकाबला कर सकता है। इसके अलावा इसमें कई नए फीचर्स शामिल किए गए हैं, जो इस टैंक को ना केवल बेहद मजबूत बनाते हैं, बल्कि सटीक प्रहार करने में इसका कोई मुकाबला नहीं है।

हिन्दुस्थान समाचार

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