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बायो-बिटुमेन: भारत का सड़क निर्माण में हरित क्रांति का कदम

By HO BUREAU 

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बायो-बिटुमेन

भारत ने सड़क निर्माण के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए विश्व में पहली बार व्यावसायिक स्तर पर बायो-बिटुमेन का उत्पादन शुरू कर दिया है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने नई दिल्ली में आयोजित सीएसआईआर प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समारोह में इस महत्वपूर्ण घोषणा की। यह पहल टिकाऊ बुनियादी ढांचे के विकास की दिशा में भारत के दृढ़ संकल्प को दर्शाती है।

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बायो-बिटुमेन क्या है और इसका महत्व

पारंपरिक बिटुमेन कच्चे तेल से प्राप्त एक काला, चिपचिपा हाइड्रोकार्बन मिश्रण है जो सड़क निर्माण में बाध्यकारी सामग्री के रूप में उपयोग होता है। इसके विपरीत, बायो-बिटुमेन जैव सामग्री और कृषि अपशिष्ट से निर्मित एक पर्यावरण अनुकूल विकल्प है। यह नवाचार न केवल जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करेगा, बल्कि फसल अवशेष जलाने की समस्या का भी समाधान प्रस्तुत करता है, जो भारत के कई हिस्सों में वायु प्रदूषण का प्रमुख कारण है।

वैज्ञानिक अनुसंधान से व्यावहारिक उपयोग तक

वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की भूमिका इस उपलब्धि में अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। मंत्री गडकरी ने सीएसआईआर को इस ऐतिहासिक मील के पत्थर के लिए बधाई देते हुए कहा कि बायो-बिटुमेन का व्यावसायिक उत्पादन प्रयोगशाला अनुसंधान को वास्तविक दुनिया के अनुप्रयोग में सफलतापूर्वक परिवर्तित करने का उदाहरण है। यह भारत की स्वदेशी वैज्ञानिक नवाचार और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में बढ़ती ताकत को प्रदर्शित करता है।

राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों से जुड़ाव

गडकरी ने बायो-बिटुमेन को विकसित भारत 2047 की दृष्टि की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम बताया। कृषि अपशिष्ट को मूल्यवान निर्माण सामग्री में बदलकर, यह पहल स्वच्छ राजमार्गों का समर्थन करती है और चक्रीय अर्थव्यवस्था प्रथाओं को बढ़ावा देती है। यह पारंपरिक सड़क निर्माण सामग्री से होने वाले उत्सर्जन को कम करने के प्रयासों के साथ भी संरेखित है।

आत्मनिर्भर भारत और अपशिष्ट से धन

केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने कार्यक्रम में कहा कि यह उपलब्धि भारत में स्वच्छ और हरित राजमार्गों के नए युग की शुरुआत को चिह्नित करती है। उन्होंने आगे कहा कि यह पहल अपशिष्ट से धन मिशन को मजबूत करेगी और टिकाऊ, घरेलू विकसित प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देकर आत्मनिर्भर भारत की दृष्टि को आगे बढ़ाएगी।

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पर्यावरणीय और आर्थिक लाभ

बायो-बिटुमेन का उपयोग कई स्तरों पर लाभदायक है। पहला, यह कृषि अपशिष्ट के उपयोग के माध्यम से किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत प्रदान करता है। दूसरा, यह फसल अवशेष जलाने की प्रथा को कम करके वायु गुणवत्ता में सुधार करता है। तीसरा, यह आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता घटाकर विदेशी मुद्रा की बचत करता है। चौथा, यह कार्बन उत्सर्जन को कम करके जलवायु परिवर्तन से निपटने में योगदान देता है।

भविष्य की संभावनाएं

बायो-बिटुमेन का व्यावसायिक उत्पादन भारत के सड़क निर्माण उद्योग में एक नए अध्याय की शुरुआत है। यह तकनीक न केवल भारत में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी टिकाऊ बुनियादी ढांचे के विकास के लिए एक मॉडल बन सकती है। सरकार की यह पहल दर्शाती है कि कैसे वैज्ञानिक नवाचार, पर्यावरणीय जिम्मेदारी और आर्थिक विकास को एक साथ जोड़ा जा सकता है। यह उपलब्धि भारत को हरित प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

सपन दास 

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