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रंग पंचमी शुद्धि का आनंद व्यक्त करने का उत्सव, सात्विक पूजा आराधना का दिन

रंगों के त्योहार होली के बाद देश भर में रंग पंचमी का उत्सव मनाया जाता है। इस दिन लोग एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर रंग पंचमी की बधाई देते हैं। जैसा कि हम सब जानते ही हैं कि हमारे देश में त्योहारों को मनाने के पीछे गहरे संदेश होते है। भाईचारे और सद्भाव की मिसाल कायम करने वाले भारतीय त्योहारों की पृष्ठभूमि में छिपे आध्यात्मिक संदेश त्योहारों की इस परंपरा को सदियों से नूतन बनाए हुए है।

By इंडिया वॉइस 
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नई दिल्ली। रंगों के त्योहार होली के बाद देश भर में रंग पंचमी का उत्सव मनाया जाता है। इस दिन लोग एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर रंग पंचमी की बधाई देते हैं। जैसा कि हम सब जानते ही हैं कि हमारे देश में त्योहारों को मनाने के पीछे गहरे संदेश होते है। भाईचारे और सद्भाव की मिसाल कायम करने वाले भारतीय त्योहारों की पृष्ठभूमि में छिपे आध्यात्मिक संदेश त्योहारों की इस परंपरा को सदियों से नूतन बनाए हुए है।

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देश के अलग अलग हिस्सों में रंग पंचमी मनाने की अलग अलग परंपरा है। कहीं कहीं पर इस दिन राधा-कृष्ण को भी अबीर-गुलाल अर्पित किया जाता है। कुछ स्थानों पर रंग पंचमी के दिन शोभायात्रा निकाली जाती है। रंग पंचमी का हिंदुओं के लिए अत्यधिक धार्मिक महत्व है और इसे एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान माना जाता है। फाल्गुन माह की पूर्णिमा तीथि (पूर्णिमा) की रात को होलिका दहन की रस्में निभाई जाती हैं और इसके पांच दिन बाद रंग पंचमी मनाई जाती है।

रंग पंचमी शुद्धि का आनंद व्यक्त करने के लिए एक उत्सव है। इस प्रकार, रंग पंचमी राजस और तमस पर विजय का प्रतीक है और ‘पंच तत्त्व’ का सम्मान करती है, जो ब्रह्मांड (पृथ्वी, प्रकाश, जल, आकाश और वायु) का निर्माण करता है। यह माना जाता है कि मानव शरीर भी पांच तत्वों से बना है। रंग पंचमी का त्योहार इन पांच मूल तत्वों को आमंत्रित करता है जो जीवन में संतुलन बनाने में मदद करते हैं।

रंग पंचमी आंतरिक रूप से राज-तम पर विजय का संकेत है और यह दिव्यताओं को निमंत्रण है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन श्री कृष्ण ने राधा पर रंग डाला था। उन्हीं की याद में रंग पंचमी मनाई जाती है। इस दिन अलग अलग राज्यों में अलग अलग पकवान बनाए जाते हैं। महाराष्ट्र में पूरणपोली बनाई जाती है। मालवा प्रदेश में होली और रंग पंचमी पर जुलूस निकालने की परंपरा है, जिसे गेर कहते हैं। जलूस में बैंड-बाजे-नाच-गाने सब शामिल होते हैं।

बरसाने में इस दिन राधारानी के मंदिर में विशेष पूजा होती हैं। आदिवासी क्षेत्र में विशेष नृत्य, गान और उत्सव मनाया जाता है।यह त्योहार देवताओं को समर्पित है। यह सात्विक पूजा आराधना का दिन होता है। मान्यता है कि कुंडली के बड़े से बड़े दोष को इस दिन पूजा आराधना से ठीक हो जाते हैं।

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