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रांची : कांटाटोली ओवरब्रिज का निर्माण बना लूट का अड्डा, नहीं मिली जाम से मुक्ति

शहर का सबसे व्यवस्तम चौराहा है कांटाटोली चौक।

By इंडिया वॉइस 

Updated Date

रांची 10,अक्टूबर – जनता की गाढ़ी कमाई को सरकार के द्वारा किस तरह से बर्बाद किया जाता है इसका सबसे बड़ा उदारहण है कांटाटोली का ओवरब्रिज। सरकार पहले गढ्ढे खुदवाती है फिर उसे भरवाती है और फिर गढ्ढे खुदवायेगी और इसी में हो गए करोड़ो का खर्च।

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शहर का सबसे व्यवस्तम चौराहा है कांटाटोली चौक। जाम से काफी लंबी कतार वाहनों की लग जाती है। घंटो लग जाते हैं एक बार इस चौराहे को क्रॉस करने में। हेमन्त सरकार इस ओवरब्रिज को नए सिरे से बनाने की तैयारी में जुट गई है, लेकिन स्थानीय लोगों की माने तो उन्हें अभी भी भरोसा नही है कि यहां ओवरब्रिज बन पाएगा।

लोगों ने कहा लूट का अड्डा बन गया है ओवरब्रिज का निर्माण

सरकार भले ही बदल गयी है लेकिन लोगों का मानना है कि सिर्फ लूट का अड्डा बन कर रह गया है ये ओवरब्रिज। थोड़े से काम कर बंद कर दिया जाता है।
दूसरे राज्यों से आने वाले लोग भी शहर में इस चौराहे से इंटर करते हैं। साथ ही शहर के विभिन्न इलाके के लिए सड़क जाती है।

अब तक तीन बार तैयार किया गया है डीपीआर

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2012 : ‘अर्जुन मुंडा सरकार के कार्यकाल में पहली डीपीआर बनी’।
2015 : ‘रघुवर दास सरकार के कार्यकाल में दूसरी बार बनाई गई’।
2021 : ‘अब हेमंत सोरेन सरकार के कार्यकाल में तीसरी बार बनेगी’।

40 करोड़ से बढ़कर डीपीआर हुआ 224 करोड़

दरअसल 2017 की शुरुआत में ही कांटाटोली फ्लाईओवर बनाने का काम नगर विकास विभाग के तहत जुडको ने शुरू किया था। शुरुआत में जमीन अधिग्रहण सबसे बड़ी समस्या बनी, लेकिन इसे सुलझा लिया गया। इसके बावजूद डीपीआर में ही गलती सामने आ गई, जिसके बाद मुख्य डीपीआर की राशि 40 करोड़ से बढ़कर 84 करोड़ हो गई। फिर कई तकनीकी कमियों को देख निर्माण का काम रुक गया। 84 करोड़ के इस प्रोजेक्ट में लगभग 20 करोड़ रुपये अब तक खर्च होने का अनुमान है। लेकिन निर्माण के नाम पर आज तक एक पीलर भी सही तरीके से खड़ा नहीं हो सका है। ऐसे में फिर से नए सिरे से निर्माण कार्य शुरू होने पर लागत राशि में करोड़ों रुपए का इजाफा हो गया है। अब इसकी लंबाई भी बढ़ाई गई है और लागत 224 करोड़ तक पहुँच गयी है।

दो वर्ष के अंदर कांटाटोली ओवरब्रिज बनाने का रखा गया है लक्ष्य

पहले कांटा टोली फलाईओवर खादगढ़ा बस स्टैंड के सामने से कोकर और शांति नगर तक बनना था, लेकिन यातायात की समस्या से निजात दिलाने के लिए अब योगदा सत्संग मठ से गुजरते हुए कोकर तक फ्लाइओवर का निर्माण कराने का फैसला लिया गया है। अब देखना होगा कि सरकार के द्वारा इस ओवरब्रिज को बनाने का लक्ष्य दो वर्ष का रखा गया है, क्या इस बार भी इस समय सीमा में तैयार हो पाता है या आगे भी लोगों को परेशानियों का सामना करना ही पड़ता है।

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