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हल्के में न ले बच्चों का बुखार व खांसी, वायरल से जा सकती है जान : डॉ. यशवंत

हैलट के बाल रोग में भर्ती बच्चे की जान देर से अस्पताल लाने के चलते हुई थी।

By इंडिया वॉइस 
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कानपुर, 19 अगस्त। हैलट अस्पताल के बालरोग विभागाध्यक्ष डॉ. यशवंत राव ने बताया कि जब मौसम बदलता है तो उस मौसम के हिसाब से वायरस भी पनपते हैं। उसका इंफेक्शन अटैक एकदम से बच्चों पर पड़ जाता है। हर साल की तरह इस साल भी जब हमारी बरसात शुरू हुई है अब जाड़े की शुरुआत भी धीरे-धीरे शुरू हुई है। यह दूसरे किस्म के वायरस एक्टिवेट हो रहे हैं और बच्चों में इंफेक्शन कर रहे हैं।

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बालरोग विभागाध्यक्ष डॉ. यशवंत ने बताया कि वायरस एक ऐसी चीज है जब हमारे ब्लड में आता है तो हमारे शरीर के किसी भी अंग को डैमेज कर सकता है। यह गले में जाता है तो खराश पैदा करता है। नाक में जाता है तो जुकाम होता है। पेट में जाता है तो रीकमेंट वोमिटिंग होती है। फेफड़े में जाता है तो निमोनिया करता है। दिमाग में जाता है मेनिनजाइटिस करता है।

बताया कि लोग थोड़ा बहुत कोरोना से डरे हुए हैं हमारे पास जो बच्चे आ रहे हैं थोड़ा सिक (बीमार) कंडीशन में आ रहे हैं। मीडिया के माध्यम से हम यह मैसेज देना चाहते हैं कि बच्चों में आ रहे बुखार को परिजन हल्के में ना लें। ऐसा होने पर तुरंत सम्बंधित चिकित्सक को तुरंत दिखाएं। उन्होंने बताया कि हैलट अस्पताल में इमरजेंसी चलती है आप कभी भी यहां पर बच्चों को दिखाने आ सकते हैं। इस समय इमरजेंसी में डायरिया, निमोनिया के केस बच्चों में बहुत आ रहे हैं।

समय से बच्चे अस्पताल लाया जाता तो बचाई जा सकती थी जान

उन्होंने बताया कि एक बच्चा थोड़े दिन पहले आया था जिसे लूज मोशन आ रहे थे। परिजनों द्वारा उसे इधर-उधर दिखाकर काफी देर में अस्पताल लाया गया था। उसकी देखभाल पूरी तरह से की गई, लेकिन फिर भी उसकी जान बचाने के अथक प्रयास किए गए। बच्चा डायरिया से ग्रसित था। अगर उसे समय से लाया जाता तो शायद उसकी जान बचाई जा सकती थी।

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बालरोग विभागाध्यक्ष ने बताया कि हमारे यहां 120 बेड हैं और वह वर्तमान में सारे के सारे फुल हैं, लेकिन फिर भी बीमार बच्चों को मना नहीं किया जा रहा है और हमारी मंशा है किसी का इलाज मना ना किया जाए। यहां पर प्रतिदिन 15 से 20 बच्चे आ रहे हैं। जिनका उपचार किया जा रहा है।

हिन्दुस्थान समाचार

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