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झारखंड के देवरी गांव के किसान एलोवेरा की खेती कर बन रहे हैं आत्मनिर्भर, प्रदेश का पहला एलोवेरा विलेज के रूप में स्थापित

- मन की बात कार्यक्रम में पीएम मोदी ने गांव की चर्चा की, गांव के लोगों में खुशी

By इंडिया वॉइस 
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रांची- झारखंड के किसान खेतों मैं पसीना बहा कर जमीन से सोना उगा रहे हैं। जी हां, यह सोना कुछ और नहीं बल्कि हर्बल पौधा एलोवेरा है। कोरोना की घड़ी में किसान बेरोजगारी झेल रहे रहे थे। जिसके बाद लोगों ने एलोवेरा की खेती करने का निर्णय लिया और सफल हुए।

2018 में ग्रामीणों को मिला था खेती करने का प्रशिक्षण

नगड़ी का देवरी गांव इन दिनों सुर्खियों में है। वजह कि यहां के किसानों ने एलोवेरा का रिकॉर्ड उत्पादन कर पीएम मोदी को भी प्रभावित किया है। तभी तो पीएम मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में इस गांव का नाम एलोवेरा गांव के रूप में रखा। गांव की मुखिया मंजू कच्छप कहती है कि 2018 में ही ग्रामीणों ने प्रशिक्षण पाकर एलोवेरा की खेती शुरू कर दी थी लेकिन इस साल हर्बल बाजार में एलोवेरा की मांग बढ़ जाने से किसानों में उत्साह है।

गांव के 40 परिवार ने एलोवेरा की खेती को व्यवसाय के रूप में अपनाया

नगरी गांव के 40 परिवारों ने एलोवेरा की खेती को व्यवसाय के रूप में अपनाया है। खेती करने वाले बताते हैं कि एलोवेरा के एक पौधे से कई बार पत्तियां निकाली जा सकती है। इसकी अच्छी खासी कीमत मिल जाती है और बाजार भी अच्छा है। यही कारण है कि दूसरे किसान भी एलोवेरा की खेती की ओर रुख कर आत्मनिर्भर बन रहे हैं।

कोरोना काल में अच्छी खेती हुई

मुखिया मंजू कच्छप कहती हैं कि लॉकडाउन के समय बड़े पैमाने पर एलोवेरा की खेती किसानों ने की थी। इससे बड़ी कंपनियों ने सैनिटाइजर और कॉस्मेटिक आइटम बनाने के लिए हम लोगों से संपर्क किया और खरीदा। इससे अच्छा मुनाफा प्राप्त हुआ।

औषधीय पौधों की खेती कर रहे हैं ग्रामीण

वह गांव के किसान अब एलोवेरा के अलावा तुलसी, गिलोय और चिरैता जैसे अन्य औषधीय पौधों की खेती भी शुरू कर चुके हैं।

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