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रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए बच्चों को जरूर पिलाएं विटामिन ए की खुराक : डॉ आनंद

विटामिन ए की कमी से होने वाले नुकसान : बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता का कम होना, आंखों की रोशनी धुंधली पड़ जाना, एनीमिया रोग, अंधापन, आंखों में आंसुओं का न बनना, त्वचा रूखी हो जाना, मुंह में छाले पड़ना तथा दस्त जैसी समस्या का होना।

गाजियाबाद, 07 अगस्त। बाल चिकित्सक डॉ सुरेंद्र आनंद का मानना है कि विटामिन ए पिलाने से बच्चों में संक्रमण की आशंका काफी कम हो जाती है, क्योंकि इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। खान-पान पर ध्यान न दे पाने के कारण विटामिन ए की कमी हो जाती है। इसलिए बाल स्वास्थ्य पोषण माह में पांच वर्ष तक के बच्चों को विटामिन ए की खुराक अवश्य देनी चाहिए।

डॉ आनंद ने बताया कि बच्चों को विटामिन ए की खुराक देने से शरीर की एपिथीलियल लेयर मजबूत होती है। यह परत हर बच्चे के रिसपैरेट्री ट्रैक यानि श्वसन तंत्र में भी होती है। उन्होंने बताया कि यदि बच्चे के रिसपैरेट्री ट्रैक की एपिथीलियल लेयर मजबूत रहेगी, तो किसी भी वायरस के श्वसन तंत्र से भीतर जाने की गुंजाइश भी काफी कम हो जाती है।

उन्होंने बताया कि कोविड की सम्भावित तीसरी लहर से बचने के लिए हम सभी को अपनी और अपने बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी बनाए रखने की आवश्यकता है। इसके लिए विटामिन ए काफी मददगार साबित हो सकता है। यह वसा में घुलनशील विटामिन है और यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी मदद करता है। अगर सीएनएनएस की 2016-18 की रिपोर्ट की बात करें तो उत्तर प्रदेश में चार वर्ष तक की आयु के 16.9 प्रतिशत बच्चों में विटामिन A की कमी पाई जाती है ।

विटामिन ए की कमी से होने वाले नुकसान :

बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता का कम होना, आंखों की रोशनी धुंधली पड़ जाना, एनीमिया रोग, अंधापन, आंखों में आंसुओं का न बनना, त्वचा रूखी हो जाना, मुंह में छाले पड़ना तथा दस्त जैसी समस्या का होना।

क्या है योजना :

बाल स्वास्थ्य पोषण माह हर वर्ष जून और दिसम्बर में मनाया जाता है। इस दौरान अभियान चलाकर नौ माह से पांच वर्ष तक के बच्चों को विटामिन ए की खुराक दी जाती है। नौ महीने से 12 महीने तक बच्चों को नियमित टीकाकरण के दौरान एमआर के प्रथम टीके के साथ एक मिली (एमएल) विटामिन ए की खुराक पिलाई जाती है। जबकि 16 महीने से 24 महीने के बीच के बच्चों को एमआर की दूसरी खुराक के साथ विटामिन ए की खुराक दो एमएल देनी होती है। हर छह माह पर बाल स्वास्थ्य पोषण माह के दौरान दो वर्ष से पांच वर्ष तक की आबादी को विटामिन ए की खुराक दो एमएल पिलाई जाती है।

इसके अलावा खान-पान में भी विटामिन A के मुख्य स्रोतों का उपयोग किया जा सकता है जैसे कि अंडा, दूध, दही, इत्यादि।

 

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