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सरकार बदली सिस्टम बदला, अब पब्लिक साइकिल शेयरिंग सिस्टम की विदेशी साईकिलें खा रही जंग

- साइकिल को लॉक-अनलॉक करना बड़ी चुनौती

By इंडिया वॉइस 
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रांची- एक वक्त था जब रांची में खास तरह की साइकिलों का क्रेज था। शहर की हर गलियों और चौराहों पर ये हाईटेक साइकिलें दौड़ती दिखती थी। खासकर छात्रों के लिए तो ये किसी सौगात से कम नहीं था।
इको फ्रेडली, सस्ता, सहज और सुलभ ये साइकिल बीजेपी की अगुवाई वाली पिछली सरकार ने स्मार्ट सिटी मिशन प्रोजेक्ट के तहत पब्लिक साइकिल शेयरिंग सिस्टम की शुरुआत की थी।
उदेश्य था लोगों को शहर में आने-जाने के लिए सस्ता और आधुनिक सवारी मुहैया कराना। साथ में प्रदूषण और जाम से शहर को मुक्ति दिलाना, लेकिन आज ये योजना दम तोड़ती नज़र आ रही है। अब तो कई लोगों का कहना है कि अगर आपने साइकिल ली तो समझो मुसीबत मोल ले ली है।

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विदेश से मंगाई गई थी ये साईकल

स्टैंड में खड़ी ये साइकिलें आम लोगों को सहुलियत देने के लिए सरकारी पैसे से खरीदी गई थी।
सभी साइकिलें हाईटेक है। इसे विदेश से लाई गई थी। जगह-जगह स्टैंड बनवाये गए। शुरुआत में तो ये शहर के कोने-कोने में सड़कों पर दौड़ती थी। खास कर छात्रों के बीच ये काफी लोकप्रिय हुआ, लेकिन समय बदलने के साथ सूबे की सरकार बदली और साथ में बदल गया पब्लिक साइकिल शेयरिंग सिस्टम। स्टैंड में साइकिलें तो लगी रहती है लेकिन सही रखरखाव के अभाव में ये जंग खा रही है। सबसे बड़ी समस्या साइकिल का ताला खोलने की है। पहले ये तो खुलता नहीं और अगर खुल जाए तो जल्द बंद होता नहीं।

मेंटेनेंस के अभाव में जंग खा रही ये साईकल

पब्लिक साइकिल शेयरिंग सिस्टम में कोई दिक्कत न आए और साइकिल भी सुरक्षित रहे , इसके लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। साइकिल के ताले को खोलने और बंद करने के लिए चार्टर्ड बाइक नाम के मोबाइल एप्लीकेशन का इस्तेमाल होता है, लेकिन सही मेंटेनेंस के अभाव में अब ये किसी जंजाल से कम नहीं लगता। पूर्व नगर विकास मंत्री सीपी सिंह कहते हैं कि उनकी सरकार खास उदेश्य से इस योजना को लाई थी। सरकार के इस सेवा से ज्यादातर लोग सहमत हैं कि पब्लिक साइकिल शेयरिंग सिस्टम एक अच्छी योजना है। जिससे लोगों को न सिर्फ कहीं आने-जाने में सहुलियत होती है बल्कि पैसे भी काफी कम लगते हैं। पर्यावरण के लिहाज से भी ये काफी अच्छा है, लेकिन रख-रखाव के अभाव में ज्यादातर साइकिलें स्टैंड में पड़ी-पड़ी जंग खा रही है और जो लोग इसका इस्तेमाल कर रहे हैं उनके लिए साइकिल को लॉक और अनलॉक करना सबसे बड़ी चुनौती है।

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