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GST काउंसिल की बैठक: कई अहम दवाइयों पर मिली छूट, अभी पेट्रोल-डीजल GST में शामिल नहीं

GST काउंसिल की बैठक में पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में अभी नहीं रखा गया, कई महंगी लाइफ सेविंग दवाओं को GST के दायरे से बाहर रखा गया है।

By इंडिया वॉइस 
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लखनऊ, 17 सितंबर। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतामरण की अध्यक्षता में शुक्रवार को लखनऊ में हुई GST काउंसिल की बैठक में कई अहम फैसले लिए गए। केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि केरल हाईकोर्ट के निर्देश पर डीजल और पेट्रोल को GST के दायरे में लाने को लेकर काउंसिल में चर्चा हुई है, लेकिन अधिकतर सदस्य डीजल-पेट्रोल को जीएसटी के दायरे में लाने के विरोध में हैं।

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GST काउंसिल की बैठक में लिए गए कई अहम फैसले

GST काउंसिल की बैठक के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि जरुरी दवाओं को लेकर प्रक्रिया बहुत लंबी थी, जिसको अब टैक्स के दायरे से बाहर कर दिया गया है। वित्त मंत्री ने बताया कि स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से जिन दवाओं को टैक्स के दायरे से बाहर रखने का सुझाव आया था, उन्हें भी छूट दी गई है। कोरोना से संबंधित दवाओं में छूट की सीमा को 3 महीने बढ़ाते हुए 31 दिसंबर तक कर दिया गया है। इसमें एम्फोटेरेसिन, रैमदिसीवर समेत 4 दवाओं का फायदा लोगों को मिलेगा। साथ अन्य दवाओं को भी 12 से 7 प्रतिशत की छूट की सीमा को भी 31 दिसंबर तक बढ़ाया गया है। कैंसर की दवा 12 प्रतिशत के दायरे से हटाकर 5 फीसदी कर दिया गया है। दिव्यांगों के लिए बनी गाड़ियों को अब सिर्फ 5 प्रतिशत कर देना होगा। बायोडीजल में घटोत्तरी करते हुए 12 से पांच प्रतिशत पर लाया गया है।

किस चीज पर कितना बढ़ा और घटा GST?

इसी तरह सभी तरह के पेन पर 18 फीसद GST होगा। बायो डीजल पर जीएसटी 12 से घटाकर 5% की गई। वहीं, पौष्टिकता से भरपूर फोर्टिफाइड चावल पर 18 से 5 फीसद जीएसटी किया गया। रेलवे लोकोमोटिव पार्ट्स पर 18 फीसद जीएसटी लगेगा। रिन्यूएबल एनर्जी के कंपोनेंट पर 12 फीसद GST होगी। वहीं, आयरन, कापर, लेड, जिंक, कोबाल्ट पर 18 फीसद GST लगेगा।

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वहीं उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने जीएसटी काउंसिल की 45वीं बैठक में उत्तर प्रदेश की तरफ से अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि इंफोर्समेंट और तकनीकी का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल किया जाए। समय के साथ कानूनों में जरुरी परिवर्तन स्वाभाविक है। आम लोगों के जनजीवन को आसान बनाने के लिए नियमों एवं कानूनों में संशोधन और परिवर्तन किया जाना चाहिए। जिससे कि आम आदमी पर बोझ न पड़े। उत्तर प्रदेश ने कोविड-19 के बाद बेहतर प्रदर्शन किया है।

बैठक से पहले ही उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने संकेत दिया था कि वो पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने का विरोध करेंगे। काउंसिल की बैठक से पहले वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा था कि उत्तर प्रदेश पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स को जीएसटी के अंतर्गत लाने के खिलाफ है। उनके साथ में बैठक में शामिल 6 अन्य राज्यों के वित्त मंत्री पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में शामिल करने पक्ष में नहीं हैं।

इस बैठक में जैसे ही पेट्रोल-डीजल को जीएसटी में शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया तो कई राज्य इसके विरोध में खड़े हो गए। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, झारखंड, छत्तीसगढ़, केरल समेत ज्यादातर राज्यों ने पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे से बाहर ही रखने को कहा है।

वहीं GST काउंसिल की बैठक में 7 राज्यों के उप मुख्यमंत्री शामिल रहे। इनमें अरुणाचल प्रदेश के चौना मेन, बिहार के उप मुख्यमंत्री राज किशोर प्रसाद, दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, गुजरात के नितिन पटेल, हरियाणा के दुष्यंत चौटाला, मणिपुर के युमनाम जोए कुमार सिंह और त्रिपुरा के जिष्णु देव वर्मा शामिल रहे। इसके अलावा कई राज्यों के वित्त या फिर मुख्यमंत्री की ओर से नामित मंत्री भी शामिल थे।

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