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बेटे की चाह में एक के बाद एक सात बेटियों ने लिया जन्म, अब घर के मुखिया की मलेरिया से मौत

परिवार के एकमात्र सहारे शिवराम की मौत से परिजनों पर मानो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। जो कुछ जमा पूंजी थी वह इलाज में खर्च कर दी

By इंडिया वॉइस 
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पाली : सोजत क्षेत्र के चौपड़ा गांव में एक ऐसा भी परिवार है, जहां बेटे की चाह में एक के बाद एक सात बेटियों के जन्म के बाद बेटे ने जन्म लिया तो परिवार में खुशियां मनाई गई। लेकिन, हाल ही में परिवार के मुखिया की मलेरिया के कारण जोधपुर में उपचार के दौरान मौत हो गई। जिससे आर्थिक रूप से कमजोर इस परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। क्योंकि, घर चलाने की जारी जिम्मेदारी उनके कंधों पर थी। उनकी अकाल मौत से पूरा परिवार सदमें हैं।

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जानकारी के अनुसार सोजत क्षेत्र के चौपड़ा गांव में 55 वर्षीय शिवराम पुत्र सांवतराम गुर्जर को मलेरिया रोग ने चपेट में ले लिया। तबीयत नहीं सुधरी तो 8 अक्टूबर को उसे जोधपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती करवाया। बाद में जोधपुर एम्स में भर्ती करवाया। स्वास्थ्य में सुधार होने पर 27 अक्टूबर को उन्हें डिस्चार्ज किया गया तो परिजन घर ले आए। लेकिन दो दिन बाद ही उनकी तबीयत फिर से बिगड़ गई तो परिजन फिर से उन्हें जोधपुर एम्स अस्पताल ले गए। जहां उपचार के दौरान 29 अक्टूबर को उनकी मौत हो गई। परिवार के एकमात्र सहारे शिवराम की मौत से परिजनों पर मानो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। जो कुछ जमा पूंजी थी वह इलाज में खर्च कर दी। उसके बाद भी शिवराम को परिवार के लोग नहीं बचा पाए।

भेड़-बकरी पालन कर शिवराम अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। उसने कभी भी बेटियों को बोझ नहीं समझा। शिवराम की मौत के बाद उसकी पत्नी पर आठ बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी आ गई हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं हैं। ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर इस परिवार को भामाशाह एवं सरकार से सहायता की दकरार हैं।

चौपड़ा निवासी शिवराम गुर्जर भेड़-बकरी पालन कर जैसे-तैसे अपना घर चलाता था। आठ बच्चों के पालन-पोषण व पढ़ाई लिखाई करवाना उसके लिए काफी मुश्किल था। ऐसे में सबसे बड़ी बेटी 20 वर्षीय गुड्डी ने 6 कक्षा तक पढ़ने के बाद पढ़ाई छोड़ दी। इसी तरह 18 वर्ष की बेटी साऊ 6 कक्षा, 16 वर्षीय गणकी कक्षा 9वीं व 14 वर्षीय राजूदेवी ने कक्षा 2 तक ही पढ़ सकी। वर्तमान में मृतक शिवराम गुर्जर की 12 साल की बेटी सुशीला कक्षा 8वीं, 11 साल की मनीषा छठी व 8 साल की सरोज तीसरी व सबसे छोटा बेटा 6 साल का प्रधान दूसरी कक्षा में पढ़ रहा हैं। शिवराम की मौत के बाद घर की सारी जिम्मेदारी उनकी पत्नी राधादेवी के कंधों पर आ गई हैं। बड़ी हो चुकी तीनों बेटियों चुकी गुड्डी, साऊ व गणकी की अगले कुछ वर्षों में शादी करने के लिए भी उन्हें आर्थिक रूप से परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

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