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ग्रीन दीपावली को ध्यान में रखकर गोबर के लक्ष्मी-गणेश और दीपक बना रही है हिमवंत फाउंडेशन !

लक्ष्मी जी की मूर्ति सहित आकर्षक दीये, तोरण द्वार, लक्ष्मी जी के पैर सहित अन्य सजावटी सामान तैयार किये गये हैं।

By इंडिया वॉइस 

Updated Date

देहरादून, 26 अक्टूबर। अब ग्रीन दीपावली के लिए सामाजिक संस्थाएं भी प्रतिबद्ध दिखाई दे रही हैं। हिमवंत फाउंडेशन सोसाइटी ने दीपावली पर्व के लिए गोबर के खास सामान बनाकर उन्हें बिक्री के लिए तैयार कर लिया है।

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हिमवंत फाउंडेशन सोसाइटी ने अपने कार्यालय में मंगलवार को मीडिया से बातचीत में अध्यक्ष संगीता थपलियाल ने बताया कि इस बार कुछ खास तरह के उत्पादों के साथ ग्रीन दीपावली मनाए जाने का प्रयास किया जा रहा है। सोसायटी की ओर से गोबर और मैदा-लक्कड़ से गणेश जी, लक्ष्मी जी की मूर्ति सहित आकर्षक दीये, तोरण द्वार, लक्ष्मी जी के पैर सहित अन्य सजावटी सामान तैयार किये गये हैं।

थपियाल ने बताया कि इनकी विशेषता यह है कि दीपावली पूजन के बाद इन्हें आसानी से समाप्त किया जा सकता है। पूजा के बाद इन मूर्तियों को इधर-उधर फेंकने की जगह घर के गमलों में डाल दिया जाए तो इसकी खाद बन जाएगी। उन्होंने बताया कि इस तरह के उत्पादों से किसी तरह का कूड़ा नहीं बनेगा जबकि अक्सर दीपावली के बाद पूजा की गई गणेश जी और लक्ष्मी जी की मूर्ति को पेड़ों के नीचे छोड़ दिया जाता है, क्योंकि हर वर्ष नई मूर्ति खरीदी जाती है। ऐसे में देवी-देवताओं का अपमान होता है।

उन्होंने बताया कि गोबर से गणेश जी और लक्ष्मी जी की मूर्ति के साथी शुभ लाभ, लक्ष्मी जी के पैर,दरवाजे पर लगाने वाली गणेश जी की मूर्ति सहित अन्य तरह के सजावटी सामान तैयार किए गए हैं। हिमालय की जड़ी-बूटी से खास तरह की धूप भी बनाई जा रही है जिससे घरों में सूक्ष्म हवन किया जा सकता है। लक्ष्मी जी के पैर अक्सर कागज के होने की वजह से घरों के फर्श पर चिपक जाते हैं, लेकिन गोबर से बने इन पैरों को पूजा के बाद आसानी से खाद के रूप में परिवर्तित किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि दीये भी यहां तैयार किए जा रहे हैं जिनके जलने के बाद उनकी खाद बनाई जा सकती है।

महिलाओं को रोजगार और बच्चों को संरक्षण

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संगीता थपलियाल ने कहा कि इस योजना से कई जरूरतमंद महिलाओं को रोजगार भी दे रही है। हिमवंत फाउंडेशन सोसाइटी के माध्यम से कई ऐसी घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं की मदद कर रही हैं। साथ ही उनके बच्चों का भी संरक्षण संरक्षण कर रही है। इन दिनों ये महिलाएं यहां दीये,मूर्तियां आदि उत्पाद तैयार कर रही हैं। इन मूर्तियों को पूरी तरह से ईको- फ्रेंडली बनाने के लिए इनमें गेरू का रंग बना इस्तेमाल किया जा रहा है।

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