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भारतीय सिनेमा को किस तरह नई दिशा दी थी वी शांताराम ने

आज का इतिहास- बॉलीवुड जैसा आज दिखता है वर्षों पहले इसका वैसा रूप नहीं था। वी शांताराम जैसे फिल्मकारों ने इसे मूल फिल्मों से बोलती फिल्मों तक कई बदलाव में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। आज उनकी पुण्यतिथि पर जानें उनके जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें...

By इंडिया वॉइस 

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सिनेमा में नये रंग भरने वाला फिल्मकारः शांताराम राजाराम वनकुद्रे यानी वी शांताराम भारतीय सिनेमा के ऐसे फिल्मकार हैं जो दर्शकों के बीच अपने नाम से ज्यादा काम के लिए जाने जाते हैं। मूक फिल्मों के दौर से शुरू हुए शांताराम के इस स्वर्णिम सफर में कामयाबी के कई मुकाम हैं, जो फिल्म निर्माण के क्षेत्र में आने वाली नयी प्रतिभाओं को प्रेरित करते रहेंगे। 1985 में उन्हें सिनेमा का सबसे बड़ा सम्मान ‘दादासाहेब फाल्के पुरस्कार’ मिला। पांच साल बाद 30 अक्टूबर 1990 को उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।

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वी शांताराम ने 1927 में बनाई थी पहली फिल्म

वी शांताराम ने 1927 में पहली बार फिल्म ‘नेताजी पालकर’ का निर्देशन किया और ऐसी ही कई दूसरी मूक फिल्में बनायीं। उसके बाद ‘अमृत मंथन’ जैसी बोलती फिल्मों से शुरू हुआ उनका सफर लगभग 90 फिल्मों तक जारी रहा। खास बात यह है कि भारतीय सिनेमा के शैशव काल में उन्होंने सिनेमा निर्माण के तकनीकी पक्ष को मजबूत करने का साहस किया। नारी की सामाजिक असमानता, बाल विवाह सहित अलग-अलग जीवंत सवालों पर उन्होंने कई सार्थक फिल्मों का निर्माण किया। उन्होंने कई अछूते विषयों को उस समय अपनी फिल्मों का विषय बनाया जब शायद ही उसके बारे में आमतौर पर सोचा जा सकता था।

उन्होंने लगभग 90 फिल्में बनायीं जिनमें ‘दो आंखें बारह हाथ’, ‘नवरंग’, ‘डॉ. कोटनीस की अमर कहानी’, ‘झनक-झनक पायल बाजे’, ‘पिंजरा’, ‘दुनिया न माने’ जैसी दर्जनों यादगार फिल्में शामिल हैं। फिल्म ‘दो आंखें बारह हाथ’ के लिए लता मंगेशकर का गाया गीत ‘ऐ मालिक तेरे बंदे हम’ आज भी पसंद किया जाता है। उनकी फिल्म ‘नवरंग’ में महेंद्र कपूर को पहली बार गाने का अवसर मिला। ‘झनक-झनक पायल बाजे’ उनकी चुनिंदा फिल्मों में शामिल है तो ‘डॉ. कोटनीस की अमर कहानी’ अपने समय की बेजोड़ फिल्मों में शामिल है। उन्होंने 1929 में विष्णुंत दामले के साथ ‘प्रभात’ फिल्म कंपनी की स्थापना की और 1942 में ‘राजकमल कला मंदिर’ का निर्माण किया।

अन्य अहम घटनाएं:

1853: ‘अनुशीलन समिति’ के प्रारंभिक संस्थापक सदस्यों में एक प्रमथनाथ मित्र का जन्म।
1883: महान समाज सुधारक व चिंतक स्वामी दयानंद सरस्वती का निधन।
1887: बंगाल के लोकप्रिय उपन्यासकार सुकुमार राय का जन्म।
1909: प्रसिद्ध वैज्ञानिक होमी जहांगीर भाभा का जन्म।
1925: पहली बार लंदन में टेलीविजन का ट्रांसमीशन हुआ।
1932: प्रसिद्ध इतिहासकार बरुन डे का जन्म।
1945: भारत संयुक्त राष्ट्र में शामिल हुआ।
1949: भाजपा नेता प्रमोद महाजन का जन्म।
1958: हिंदी फिल्मों के गायक अभिजीत भट्टाचार्य का जन्म।
1960: ब्रिटेन में पहली बार सफलतापूर्वक किडनी ट्रांसप्लांट की गयी।
1974: सुप्रसिद्ध गायिका बेगम अख्तर का निधन।
1990: फिल्म अभिनेता विनोद मेहरा का निधन।
2014: साहित्यकार रोबिन शॉ का निधन।
हिन्दुस्थान समाचार

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