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FDI की तेज आवक से कैसे बदलेगी भारत की तस्वीर?, पढ़िए आर.के. सिन्हा का लेख

वित्त वर्ष 2020-21 के पहले 9 महीनों के दौरान, एफडीआई में 40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। जो कि इस अवधि में 51.47 अरब अमेरिकी डॉलर था।

By इंडिया वॉइस 
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इकबाल का एक शेर है- कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी, सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा। कोरोना जैसी भीषण वैश्विक महामारी से जूझते भारत को लेकर दुनिया भर के निवेशकों का रुख सकारात्मक बना हुआ है। उन्हें भारत में अपना पैसा निवेश करने पर बेहतर रिटर्न की उम्मीद बंधी रहती है। यह गवाही है कि हमारी अर्थव्यवस्था चट्टान की तरह मजबूत हो चुकी है। अगर यह बात सच न होती तो अप्रैल से दिसंबर, 2020 के दौरान, 67.54 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष पूंजी निवेश (एफडीआई) देश में ना आया होता। यह किसी वित्तीय वर्ष के पहले 9 महीनों में आया सबसे अधिक एफडीआई है। वित्त वर्ष 2020-21 के पहले 9 महीनों के दौरान, एफडीआई में 40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। जो कि इस अवधि में 51.47 अरब अमेरिकी डॉलर था।

बहुत ज्यादा आंकड़ों के सहारे बात नहीं करेंगे। दरअसल भारत में एफडीआई सरकार की नीतियों और कुछ सेक्टरों के बेहतर प्रदर्शन करने के कारण आ रहा है। यह बात निर्विवाद है। पहले जान लेते हैं कि एफडीआई क्या है? इसका मतलब क्या होता है? भारत की अर्थव्यवस्था को विदेशी निवेश कैसे लाभ पहुंचाता है? दरअसल किसी विदेशी व्यक्ति या कंपनी द्वारा किसी भारतीय कंपनी में लगने वाले पैसे को विदेशी निवेश कहा जाता है। विदेशी निवेशक उस कंपनी के शेयर या बांड खरीद सकता है या अपना कोई उद्योग लगा सकता है। याद रखें कि विदेशी निवेशक अपने पैसे को स्वदेश वापस ले जाने के लिए आजाद है। मतलब किसी भी दूसरे देश की परियोजना या कंपनी में किया जाने वाला निवेश एफडीआई है। यह सीधा निवेश होता है और लंबी अवधि के लिए होता है।

भारत के चौतरफा विकास में एफडीआई का अहम रोल रहता है। इसके आने से देश का चौतरफा विकास होता है। यह बिना कर्ज लिए पूंजी जुटाने का एक महत्वपूर्ण रास्ता है। यह भी जान लें कि एफडीआई ‘ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड’ क्या होती है। अगर कोई विदेशी कंपनी भारत में निवेश कर अपना नया उद्योग लगाती है तो उसे ‘ग्रीनफील्ड’ एफडीआई कहते हैं, लेकिन जब विदेशी कंपनी भारत में पहले से ही चल रहे कारखाने या ब्रांड में हिस्सेदारी खरीदकर या अधिग्रहण कर उसके मैनेजमेंट पर अपना नियंत्रण हासिल कर लेती है तो उसे ‘ब्राउनफील्ड’ एफडीआई कहा जाता है।

दरअसल सरकार का प्रयास रहा है कि वह एक सक्षम और निवेशक अनुकूल एफडीआई नीति लागू करे। अगर बात साल 2014 से करें तो इस दिशा में उठाए गए कदमों का परिणाम है कि देश में एफडीआई प्रवाह लगातार, रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ता जा रहा है। भारत में सबसे अधिक एफडीई आ रही है इंफोरमेशन टेक्नालॉजी (आईटी) सेक्टर में। सबको पता है कि इस सेक्टर ने भारत की किस्मत बदल दी है। देश के करोड़ों नौजवान आईटी सेक्टर से किसी ना किसी रूप में जुड़े हुए हैं। ये सब बेहतर सैलरी लेकर अपने परिवारों का जीवन भी सुधार रहे हैं। भारत चाहे तो कपड़ा, फूड प्रोसेसिंग, इलेक्ट्रानिक, फार्मा, आटो वगैरह सेक्टरों में मोटा एफडीआई आकर्षित कर सकता है। इस तरफ गौर करना होगा। हाथ पर हाथ धर करके नहीं बैठा सकता।

सरकार को पता है कि बिना मोटा एफडीआई देश का कल्याण नहीं हो सकता। इसीलिए सरकार अनेक कदम उठाती रही है। भारत में जिस गति से एफडीआई आ रही है, उससे साफ है कि वैश्विक निवेशकों के बीच भारत एक पसंदीदा निवेश की जगह के तौर पर स्थापित हो चुका है। यह बात संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट से सामने आई है। हमें अब कोशिश करनी होगी कि हम दुनिया के पहले उन तीन देशों में आ जाएं जिन्हें सबसे ज्यादा एफडीआई मिलती है। अभी हमारा स्थान पांचवां है। हमें पहले तीसरे स्थान पर और फिर पहले स्थान के लिए कोशिश करनी होगी। कोशिश करेंगे तो बात बन भी जाएगी। रिपोर्ट में कहा गया कि देश में कोविड की दूसरी लहर के बावजूद भारत में एफडीआई की आवक साबित करती है कि निवेशक हमें पसंद करने लगे हैं।

अब यह जानना भी महत्वपूर्ण है कि भारत के किस राज्य में सबसे अधिक एफडीआई पहुंची है। इस लिहाज से कर्नाटक सबसे आगे है। वित्त वर्ष 2021-22 (जुलाई, 2021 तक) के दौरान कुल एफडीआई 45 प्रतिशत हिस्से के साथ कर्नाटक में सबसे ज्यादा आया। इसके बाद महाराष्ट्र (23 प्रतिशत) और दिल्ली (12 प्रतिशत) का स्थान रहा है। कर्नाटक और महाराष्ट्र भारत की अर्थव्यवस्था की आत्मा हैं। कर्नाटक तो भारत की आईटी राजधानी है। उसका एफडीआई हासिल करने में पहला स्थान हासिल करना हैरान नहीं करता। वहां पर ही हैं देश की चोटी की आईटी कंपनियां। यह सब जानते हैं।

बेशक महाराष्ट्र आजादी के बाद से ही देश का सबसे प्रमुख औद्योगिक राज्य रहा है। समय के साथ हुई इनकी आर्थिक प्रगति ने देश की अर्थव्यवस्था को और मजबूती प्रदान की है। नब्बे के दशक में शुरू हुए आर्थिक उदारीकरण का लाभ उठाते हुए इसनेअपनी जीडीपी को मजबूत बनाया और वर्तमान में जीडीपी के हिसाब से महाराष्ट्र देश का सबसे अग्रणी राज्य है। आज पाकिस्तान से बड़ी है महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था। महाराष्ट्र की जीडीपी का आकार पाकिस्तान की जीडीपी से अधिक है। ना केवल पाकिस्तान बल्कि मिस्र और दुनिया के 38 अन्य देशों की अर्थव्यवस्था से महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था बड़ी है। टैक्स संग्रहण के मामले में भी महाराष्ट्र सबसे अव्वल है।

देश के अन्य राज्यों को भी इन सूबों के हिसाब से चलना होगा। वे केंद्र के रहमोकरम पर नहीं रह सकते। देश के बाकी राज्यों को ठोस प्रयास करने होंगे कि उनके राज्यों में भी भारी एफडीआई आए। यह जानना जरूरी है कि सबसे ज्यादा एफडीआई सिंगापुर से आती है। उसके बाद अमेरिका का नंबर आता है। हमें एफडीआई की ताजा आवक से खुश नहीं होना। अभी संतोष करने का वक्त नहीं है। अभी तो मंजिल बहुत दूर है।

(लेखक वरिष्ठ संपादक, स्तंभकार और पूर्व सांसद हैं।)

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