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IIT दिल्ली ने तैयार की बारिश की बूंदों से बिजली पैदा करने वाली डिवाइस

IIT दिल्ली के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी डिवाइस तैयार की है जो पानी की बूंदों, बारिश की बूंदों, पानी की धाराओं यहां तक कि समुद्र की लहरों से "ट्राइबोइलेक्ट्रिक इफेक्ट" और "इलेक्ट्रोस्टेटिक इंडक्शन" का इस्तेमाल कर बिजली पैदा की जा सकती है। डिवाइस को "लिक्विड-सॉलिड इंटरफेस ट्राइबोइलेक्ट्रिक नैनोजेनरेटर" कहा जाता है।

By इंडिया वॉइस 
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नई दिल्ली, 17 सितंबर। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी डिवाइस तैयार की है जो पानी की बूंदों, बारिश की बूंदों, पानी की धाराओं यहां तक कि समुद्र की लहरों से “ट्राइबोइलेक्ट्रिक इफेक्ट” और “इलेक्ट्रोस्टेटिक इंडक्शन” का इस्तेमाल कर बिजली पैदा की जा सकती है। डिवाइस को “लिक्विड-सॉलिड इंटरफेस ट्राइबोइलेक्ट्रिक नैनोजेनरेटर” कहा जाता है। उत्पन्न बिजली को आगे के उपयोग के लिए बैटरी में संग्रहित किया जा सकता है। नैनोस्केल रिसर्च फैसिलिटी (NRF), IIT दिल्ली में भौतिकी विभाग और उनके समूह के प्रोफेसर नीरज खरे, ट्राइबोइलेक्ट्रिक प्रभाव का उपयोग करके व्यर्थ यांत्रिक कंपन से विद्युत ऊर्जा का संचयन करने पर काम कर रहे हैं।

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3 साल में डिवाइस तैयार हुई

IIT दिल्ली में भौतिकी विभाग के प्रो. नीरज खरे ने इस बारे में शुक्रवार को जानकारी देते हुए बताया कि इस डिवाइस का ढांचा बहुत ही सरल है और ये ट्राइबोइलेक्ट्रिक प्रभाव पर आधारित है। ट्राइबोइलेक्ट्रिक प्रभाव में जब दो अलग-अलग मटेरियल को संपर्क में लाते हैं तो उसके घर्षण से बिजली पैदा हो सकती है। उन्होंने बताया कि ये डिवाइस तीन साल में तैयार की गई है।

कैसे बनती है पानी की बूदों से बिजली?

प्रो. नीरज खरे ने कहा कि इस डिवाइस में एक नैनोकम्पोजिट पॉलिमर फिल्म और दो इलेक्ट्रोड लगे हुए हैं। जब पानी की बूंद इस पर गिरती हैं तो पानी की बूंदों में कुछ ना कुछ चार्ज होते हैं और उसके कारण पानी की बूंदे जब सरफेस के संपर्क में आती है तो एक बिजली को इंड्यूज़ करती हैं। पानी की बूंदे जब आगे बढ़ जाती हैं तो इलेक्ट्रिकल चार्जेस इंड्यूज़ चार्जेस सरफेस पर रहते हैं और उन्हें बैलेंस करने के लिए दूसरे इलेक्ट्रोड से चार्जेस मोम करना शुरू कर देते हैं जिससे बिजली पैदा होती है। इस तरह इस डिवाइस में कुछ मिलीवाट (एमडब्ल्यू) के करीब ऊर्जा पैदा की जा सकती है। जो घड़ियों, डिजिटल थर्मामीटर, रेडियो फ्रीक्वेंसी ट्रांसमीटर, हेल्थकेयर सेंसर, पैडोमीटर जैसे छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को बिजली देने के लिए पर्याप्त है। प्रो. खरे ने कहा कि पीजोइलेक्ट्रिक प्रभाव का उपयोग जैसे पारंपरिक तरीकों की तुलना में मौजूदा उपकरण काफी अधिक बिजली पैदा कर सकते हैं।

IIT दिल्ली की शोध टीम की पड़ताल

IIT दिल्ली की शोध टीम ने पानी की बूंद को ठोस सतह के संपर्क में आने पर पैदा बिजली के अंतर्निहित तंत्र का भी पता लगाया और ये दिखाया गया कि खारे पानी की बूंदें अधिक बिजली पैदा करती है। शोधकर्ताओं ने ये भी दिखाया कि ये उपकरण समुद्र की लहरों के साथ भी काम कर सकता है जहां पानी खारा होता है, नैनोकंपोजिट पॉलीमर फिल्म की सतह से संपर्क करने वाली समुद्री लहरों के जरिए से बिजली उत्पन्न होती है।

हिन्दुस्थान समाचार

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