Abhijit Dipke : कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने जेल में बंद सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका को याद करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक लंबा संदेश लिखा है। दिपके ने कहा है कि मैं चाहता हूं कि दोनों जल्द वापस आ जाएं।
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सोशल मीडिया पर आशुतोष और सौरव को संबोधित करते हुए अभिजीत दिपके ने लिखा, “आज आप दोनों का जेल में छठा दिन है। मैं बता नहीं सकता कि मुझे तुम्हारी कितनी याद आ रही है। पिछले तीन महीनों से मुझे दिन-रात कभी भी आने वाली तुम्हारी ढेरों परेशान करने वाली कॉलों और संदेशों की आदत सी हो गई थी। मैं उनमें से अधिकतर को अनदेखा कर देता था या टाल देता था, क्योंकि मुझे पता था कि मेरे बिना भी तुम दोनों किसी न किसी तरह सब संभाल लोगे और तुम हमेशा ऐसा करते भी थे।
“पिछले तीन महीनों में लोगों ने शायद मुझे सीजेपी के चेहरे के रूप में देखा हो, लेकिन ज्यादातर लोग यह नहीं जानते कि असल में तुम दोनों ही इसे चला रहे थे, इसे बना रहे थे और सब कुछ एक साथ जोड़े हुए थे। हो सकता है कि सीजेपी की शुरुआत मुझसे अनजाने में हुई हो, लेकिन यह तुम्हारी समझदारी, लगन और हिम्मत ही थी जिसने इसे आज इस मुकाम तक पहुंचाया है।”
दिपके ने आगे लिखा, “मुझे सच में नहीं लगता कि तुम दोनों (आशुतोष और सौरव) के बिना सीजेपी अपनी मौजूदा उपलब्धियों का आधा भी हासिल कर पाता। काश, लोग जान पाते कि तुमने इस आंदोलन के लिए खुद को कितना समर्पित किया है, कितनी कुर्बानियां दी हैं और बदले में कभी कोई श्रेय भी नहीं मांगा। आज तुम्हारी हिरासत का आखिरी दिन है और इस समय मेरी बस यही एक इच्छा है कि तुम दोनों आजाद होकर बाहर आ जाओ। इस पल मेरे लिए और कुछ भी मायने नहीं रखता। मुझे बस अपने भाई वापस चाहिए।”
आशुतोष और सौरव को संबोधित करते हुए सीजेपी संस्थापक ने कहा, “मेरे भाइयों, तुम जिस दौर से गुजर रहे हो, उसके लिए मुझे बहुत अफसोस है। मैं तुम्हारे परिवारों से भी माफी मांगना चाहता हूं, जिन्हें इस दर्द, चिंता और अनिश्चितता का सामना करना पड़ा है। मुझे पता है कि माफी मांगने से हालात आसान नहीं हो जाएंगे, लेकिन मेरी दिली इच्छा है कि तुम्हें और तुम्हारे परिवारों को इस सब से गुजरना ही न पड़ता। मुझे तुम्हारी लगातार आने वाली कॉलें और संदेश याद आ रहे हैं। मुझे यह एहसास याद आ रहा है कि चाहे कुछ भी हो जाए, तुम दोनों बस एक फोन कॉल की दूरी पर हो। मैं बस यही चाहता हूं कि वह फोन फिर से बजे। जल्दी वापस आ जाओ, मेरे भाइयों।”
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बता दें कि 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर कथित तौर पर प्रवेश करने और राष्ट्रीय ध्वज फहराने के आरोप में आशुतोष रांका और सौरव दास को हिरासत में लिया गया था। इसके बाद दोनों को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया था।
(आईएएनएस)
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