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पेट्रोल-डीजल के जल्द गिर सकते हैं दाम!

क्रूड ऑयल का उत्पादन बढ़ाने पर बनी सहमति, पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से मिलेगी जनता को राहत

By इंडिया वॉइस 
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नई दिल्ली, 02 सितंबर (हि.स.)। बढ़ते पेट्रोल-डीजल के दामों ने जनता की परेशानियों की दोगुना किया हुआ है। लेकिन जल्द पेट्रोल-डीजल के दामों में कमी हो सकती है। ये इसलिए हो रहा कि क्योंकि तेल उत्पादक और निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) और रूस जैसे उसके सहयोगी देशों (ओपेक प्लस) के बीच 1 अक्टूबर से कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) के उत्पादन में रोजाना 4 लाख बैरल की बढ़ोतरी करने की बात पर सहमति बन गई है।

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बताया जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की मांग में हुई बढ़ोतरी, और कोरोना महामारी से वैश्विक अर्थव्यवस्था को दोबारा मजबूत करने की बात को ध्यान में रखते हुए, ओपेक और ओपेक प्लस देशों ने मिलकर कच्चे तेल के उत्पादन में बढ़ोतरी करने की बात पर सहमति जताई है। ओपेक और ओपेक प्लस देशों के बीच हुई बातचीत में कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाने से जहां वैश्विक जरूरतों को आसानी से पूरा किया जा सकेगा, वहीं कच्चे तेल की कीमत के नियंत्रित होने के बावजूद इन देशों को बड़ी मात्रा में राजस्व की प्राप्ति हो सकेगी।

बतादें कि पिछले साल कोरोना महामारी आने के बाद दुनिया के अधिकतर देशों की सभी गतिविधियों पर रोक लग गई थी। कोरोना के कारण आर्थिक गतिविधियां बुरी तरह से प्रभावित हुई थीं, जिसकी वजह से दुनिया भर के ज्यादातर देशों में ईंधन की जरूरत भी न्यूनतम हो गई थी। ऐसा होने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का बड़ा स्टॉक जमा हो गया था। इसकी वजह से कच्चे तेल की कीमत गिरकर न्यूनतम स्तर पर आ गई थी।

दुनिया भर में कच्चे तेल के भाव में कमी होने की वजह से कच्चे तेल का उत्पादन और निर्यात करने वाले देशों काफी नुकसान का सामना करना पड़ा था। इसी वजह से इन देशों ने मिलकर कच्चे तेल के उत्पादन में कटौती करने का फैसला लिया था। इस फैसले के बाद कच्चे तेल का उत्पादन चरणबद्ध तरीके से कम कर दिया गया, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की काफी कमी हो गई और इसका भाव बढ़कर 76 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया था।

कच्चे तेल की कीमत में हुई जोरदार बढ़ोतरी की वजह से ही भारत में भी साल 2021 के दौरान पेट्रोल और डीजल की कीमत में काफी उछाल आया है। जिसकी वजह से फिलहाल भारत के कई शहरों में पेट्रोल और डीजल 100 रुपए के ऊपर जा चुका है। हालांकि माना जा रहा है कि अगर ओपेक और ओपेक प्लस देशों के बीच कच्चे तेल के उत्पादन को बढ़ाने को लेकर बनी सहमति के हिसाब से कच्चे तेल का उत्पादन शुरू हो जाता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में भी गिरावट आएगी। इसका असर भारतीय बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमत में कमी आने के रूप में भी नज़र आएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार

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