शिक्षा के सुपरस्टार से बने हेल्थकेयर रेवोल्यूशनरी
पटना के फैज़ल खान, जिन्हें ‘ख़ान सर’ के नाम से देशभर में जाना जाता है, अब सिर्फ़ पढ़ाई में ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में भी बड़ी मिसाल कायम कर रहे हैं। 2026 में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में एक अल्ट्रा-लो-कॉस्ट अस्पताल शुरू किया है, जिसका उद्देश्य स्पष्ट है, महँगे इलाज की वजह से कोई गरीब या मध्यमवर्गीय परिवार इलाज से वंचित न रहे।
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ख़ान सर ने यह अस्पताल मुनाफ़ा कमाना नहीं बल्कि सेवा देना को प्राथमिकता देते हुए शुरू किया है। उनका मानना है कि अगर लोगों को समय पर सस्ती और भरोसेमंद हेल्थकेयर मिले, तो लाइफ-सेविंग इलाज के दरवाज़े हर किसी के लिए खुलेंगे।
अस्पताल की सुविधाएँ और लो-कोस्ट स्ट्रक्चर
यह अस्पताल पटना के प्रमुख इलाके—जैसे अशोक राजपथ के आसपास—स्थापित किया गया है और यह कम आय वाले परिवारों को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किया गया है। इसमें मिलने वाली सेवाओं की कीमतें साधारण बातों से कहीं ज़्यादा अविश्वसनीय रूप से कम हैं:
- ब्लड टेस्ट केवल ₹7
- ECG मात्र ₹25
- X-Ray ₹35
- किडनी फ़ंक्शन टेस्ट ₹17
इन दरों से यह अस्पताल कुछ परिक्षण और इलाजों में सरकारी अस्पतालों से भी सस्ता साबित हो रहा है।
आधुनिक उपकरण और मरीज-सुविधाएँ
यह अस्पताल सिर्फ़ सस्ता नहीं बल्कि उन्नत तकनीक से लैस भी है। यहाँ उपलब्ध मुख्य सुविधाओं में शामिल हैं:
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- उच्च गुणवत्ता वाला डायलिसिस यूनिट जो गुर्दा रोगियों के लिए जीवन-रक्षक है।
- ऑपरेशन थिएटर जिसे ख़ास “एंटी-इंफेक्शन” मैट से तैयार किया गया है ताकि संक्रमण के जोखिम को कम किया जा सके।
- ब्लड बैंक और कैंसर उपचार की योजना, भविष्य के विस्तार के लिए।
इन उपकरणों और सुविधाओं को देखकर यह स्पष्ट है कि कीमतों में कटौती का मतलब गुणवत्ता में समझौता नहीं है — बल्कि बेहतर प्रबंधन और मिशन-ओरिएंटेड मॉडल है।
इलाज से पहले: मकसद और इंसानियत
ख़ान सर ने अपनी मां के अनुभव और स्वास्थ्य सेवा में बराबरी की कमी को देखते हुए यह अस्पताल शुरू किया। वे मानते हैं कि दूसरी सुविधाएँ मौजूद होने के बावजूद गरीब और मध्यम वर्ग अस्पतालों के पास जाना टालते हैं क्योंकि इलाज की लागत उनके बजट से बाहर होती है।
उनका लक्ष्य केवल सेवाएँ देना नहीं है, बल्कि न्यायसंगत इलाज और सम्मानजनक देखभाल दिलाना है। उनका कहना है:
इस बात से प्रेरित होकर अस्पताल की दरें इतनी कम रखी गई हैं कि डेली-वेज़ कर्मी से लेकर बुज़ुर्ग तक हर कोई इलाज करा सके।
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सस्ते इलाज की सच्ची जरूरत
भारत में स्वास्थ्य खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है और कई गरीब परिवार इलाज की लागत के बोझ में दबे हुए हैं। ख़ान सर के इस अस्पताल से मिलने वाली इन सुविधाओं के ज़रिये:
- रोज़ाना परीक्षणों का खर्च गिरता है
- बीमारी की जल्दी पहचान और इलाज संभव होता है
- बड़ी सर्जरी और डायलिसिस जैसी सुविधाएँ भी किफायती हो जाती हैं
- परिवारों को पैसों के अभाव में इलाज छोड़ने की मजबूरी नहीं होती
यह पहल उन लाखों लोगों के लिए सोच की नई राह खोल रही है जो कोविड-काल से पहले भी महँगी चिकित्सा सेवा से त्रस्त थे।
आगे की योजनाएँ: विस्तार और सेवाओं का विस्तार
- ख़ान सर अस्पताल का लक्ष्य सिर्फ़ पटना तक सीमित नहीं है।
- जल्द ही ब्लड बैंक और कैंसर उपचार सुविधाएँ शुरू होंगे
- मरीजों के लिए ऑपरेशन और अन्य गंभीर उपचार भी सरकारी अस्पतालों से कम खर्च में उपलब्ध होंगे
- भविष्य में ऐसे केंद्रों का विस्तार बिहार के हर ज़िले में करने की योजना है
-निष्कर्ष: सिर्फ़ अस्पताल नहीं, एक सेवा-क्रांति
ख़ान सर का यह अस्पताल किसी सामान्य मेडिकल सुविधा की तरह नहीं है, यह एक मिशन-ओरिएंटेड समाज सेवा मॉडल है। जहाँ स्वास्थ्य सेवा को सबके लिए सुलभ, सस्ता और सम्मानजनक बनाया गया है, वहाँ एक बड़ा बदलाव नज़र आता है।
यह पहल यह दिखाती है कि मुनाफ़ा ही स्वास्थ्य सेवा की आख़िरी मंज़िल नहीं हो सकती, बल्कि इंसानियत, सेवा भावना और सामाजिक जवाबदेही भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं।
अगर ऐसे मॉडल पूरे देश में फैलें, तो इलाज के खर्च के कारण किसी की जिंदगी खतरे में नहीं फँसेगी, खासकर उन लोगों की जो सबसे ज़्यादा मदद के हक़दार हैं।