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वोटर ID से आधार को जोड़ने वाला चुनाव कानून संशोधन बिल लोकसभा में हुआ पास, कांग्रेस ने जताई आपत्ति

कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि चुनाव सुधार की दिशा में लाए गए इस विधेयक से फर्जी मतदान रोकने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि आधार को मतदाता पहचान पत्र से जोड़ना स्वैच्छिक होगा।

By इंडिया वॉइस 
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नई दिल्ली, 20 दिसंबर : लोकसभा में सोमवार को फर्जी मतदान को रोकने के उद्देश्य से मतदाता की पहचान के लिए आधार संख्या जोड़ने संबंधी चुनाव कानून (संशोधन) विधेयक,2021 को पारित कर दिया गया। विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि चुनाव सुधार की दिशा में लाए गए इस विधेयक से फर्जी मतदान रोकने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि आधार को मतदाता पहचान पत्र से जोड़ना स्वैच्छिक होगा।

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विधेयक में प्रावधान है कि मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने वाले व्यक्ति की पहचान के लिए संबंधित चुनाव पंजीकरण अधिकारी आधार संख्या की मांग कर सकता है। इसके साथ ही मतदाता सूची की जांच के दौरान भी मतदाता की पहचान सुनिश्चित करने के लिए आधार संख्या मांगी जा सकती है। इस प्रक्रिया से यह सुनिश्चित हो सकेगा कि किसी व्यक्ति का नाम किसी अन्य निर्वाचन क्षेत्र में पहले से ही दर्ज है या नहीं।

विधेयक में मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए अब वर्ष में 4 तिथियों तक नाम दर्ज कराए जा सकते हैं। अब तक यह प्रावधान था कि कोई व्यक्ति जो एक जनवरी को 18 वर्ष का हो चुका है तो वह मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करा सकता है। एक जनवरी के बाद 18 वर्ष का होने वाले व्यक्ति को मतदाता बनने के लिए एक वर्ष का इंतजार करना पड़ता था। लेकिन अब नए विधेयक के प्रावधान के तहत एक जनवरी, एक अप्रैल, एक जुलाई और एक अक्टूबर को आयु निर्धारण की तिथियों के रूप में स्वीकार किया जाएगा।

कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि आधार को मतदाता पहचान पत्र से जोड़ना स्वैच्छिक होगा। उन्होंने कहा कि यह विधेयक मतदाताओं के हितों को ध्यान में रखकर लाया गया है। उन्होंने विपक्ष से विधेयक को सर्वसम्मति से पारित किए जाने का अनुरोध किया।

कांग्रेस सहित विभिन्न विपक्षी सदस्यों ने विधेयक के प्रावधानों पर आपत्तियां जताईं। उन्होंने विधेयक पर विस्तार से चर्चा किए जाने की मांग की। कांग्रेस सदस्य शशि थरूर ने कहा कि आधार नागरिकता का नहीं बल्कि निवासी होने का प्रमाण है। यदि आधार को मताधिकार के दस्तावेज के रूप में स्वीकार किया गया तो इससे गैर नागरिकों को भी वोट डालने का अधिकार मिल सकता है।

कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा कि मत देना एक कानूनी अधिकार है। आधार को मतदाता पहचान पत्र से जोड़ना उचित नहीं है। तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय ने कहा कि सरकार चुनाव प्रक्रिया में दखलअंदाजी कर रही है।

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