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कुशीनगर : महापरिनिर्वाण प्रतिमा का दर्शन करने वाले पहले प्रधानमंत्री होंगे नरेन्द्र मोदी, जानें मंदिर से जुड़ी अन्य रोचक बातें !

तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम सहित आ चुके हैं म्यांमार, थाईलैंड व भूटान के शासक

By इंडिया वॉइस 
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कुशीनगर, 12 अक्टूबर। 20 अक्टूबर को पीएम मोदी उत्तर प्रदेश के दौरे पर रहेंगे जहाँ वो कुशीनगर अंतर्राष्ट्रीय  एयरपोर्ट के उद्घाटन समारोह में हिस्सा लेंगे। उद्घाटन समारोह के आलावा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कुशीनगर के महापरिनिर्वाण मंन्दिर स्थित बुद्ध की शयन मुद्रा वाली 5वीं सदी की प्रतिमा का दर्शन भी करेंगे.

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आपको बता दें कि पीएम मोदी कुशीनगर के महापरिनिर्वाण मंन्दिर स्थित बुद्ध की शयन मुद्रा वाली 5वीं सदी की प्रतिमा का दर्शन करने वाले पहले प्रधानमंत्री होंगे। इससे पहले राष्ट्रपति रहते हुए डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम ने बुद्ध प्रतिमा का दर्शन किया था। वहीं आपको बता दें कि  म्यांमार, थाईलैंड व भूटान के कई शासक,तिब्बती बौद्ध गुरु दलाईलामा भी इस प्रतिमा का दर्शन कर चुके हैं।

आकर्षण का केंद्र है मंदिर

महापरिनिर्वाण मंदिर में बुद्ध की 5वीं सदी की शयनमुद्रा वाली प्रतिमा स्थित है। भिन्न-भिन्न मुद्रा दर्शाती प्रतिमा के दर्शन के लिए दुनिया भर से सैलानी खिंचे चले आते हैं। सिर की तरफ से मुस्कुराती, मध्य से चिंतन मुद्रा व पैर की तरफ से देखने पर यह प्रतिमा शयन मुद्रा में प्रतीत होती है। यह मंदिर सैलानियों के लिए एक आकर्षण का केंद्र है.

20 अक्टूबर को कुशीनगर अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट के उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री का श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाबोए राजपक्षे के साथ प्रतिमा का दर्शन करने का कार्यक्रम प्रस्तावित है। कार्यक्रम को लेकर राज्य सरकार अभी से तैयारियों में जुट गई है।

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बौद्ध अनुयाई पीएम के आगमन से हैं आह्लादित 

देश के किसी प्रधानमंत्री के पहली दफा महापरिनिर्वाण भूमि पर कदम रखने की खबर से बौद्ध अनुयाई आह्लादित हैं। 1956 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का कार्यक्रम प्रस्तावित हुआ जरूर पर उनका आगमन नहीं हुआ।

तब केन्द्र सरकार ने बुद्ध की 2500 वीं जयंती पर एक समिट का आयोजन किया था। इस आयोजन में बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा,म्यांमार तत्कालीन प्रधानमंत्री ऊ नू समेत दुनिया भर से बौद्ध प्रतिनिधि आए थे। महापरिनिर्वाण मंदिर का वर्तमान स्वरूप उसी समय का है।

बौद्ध पर्यटन देश की अर्थव्यवस्था का आधार

महापरिनिर्वाण मंदिर के दर्शन के लिए प्रधानमंत्री के आगमन के कई निहितार्थ निकाले जा रहे है। पर्यटन के माध्यम से देश को समृद्ध बनाने के लिए बनी केंद्र सरकार की नीतियों की ब्रांडिंग से लेकर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय तक बुद्ध के शांति, अहिंसा व करुणा और मानवता के उपदेश पर भारत की पक्षधरता व दृढ़ता के सदेश पहुंचाए जाने की चर्चा हो रही है।

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प्रधानमंत्री की यात्रा के कई मायने निकाले जा रहे हैं। पर्यटन उद्यमी पंकज कुमार सिंह का कहना है कि बौद्ध पर्यटन देश की अर्थव्यवस्था का आधार है। समय- समय पर इसकी ब्रांडिंग भी जरूरी है। श्रीलंका के बौद्ध भिक्षु असजी महाथेरो का कहना है कि इस दौरे से दुनिया भर में बुद्ध के संदेशों के प्रति एक सकारात्मक संदेश जाएगा। वही विपक्ष प्रधानमंत्री के दौरे को उप्र के विधानसभा चुनाव से जोड़कर देख रहा है।

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