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कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने किया किसानों के ‘भारत बंद’ का समर्थन

तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ सोमवार यानि (27 सितम्बर) को किसानों ने 'भारत बंद' का ऐलान किया है, जिसका कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों ने समर्थन किया है।

By इंडिया वॉइस 
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नई दिल्ली, 26 सितंबर। केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ सोमवार यानि (27 सितम्बर) को किसानों ने ‘भारत बंद’ का ऐलान किया है, जिसका कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों ने समर्थन किया है। कांग्रेस ने अपने प्रदेश इकाइयों, सभी प्रकोष्ठों और कार्यकर्ताओं से किसानों को समर्थन देने की अपील की है।

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कांग्रेस का किसानों के ‘भारत बंद’ को समर्थन

कांग्रेस ने रविवार को अपने सभी कार्यकर्ताओं, प्रदेश इकाई प्रमुखों और पार्टी से जुड़े सभी संगठनों के प्रमुखों से किसानों के आंदोलन की अगुवाई कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा के बंद में शामिल होने की अपील की है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस और उनके कार्यकर्ता सोमवार को किसान यूनियन की ओर से ऐलान किए गए ‘भारत बंद’ को अपना पूरा समर्थन देंगे। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए कहा कि कांग्रेस किसानों के अधिकारों में विश्वास करती है और काले कृषि कानूनों के खिलाफ उनकी लड़ाई में कांग्रेस उनके साथ खड़ी रहेगी। वेणुगोपाल ने कहा कि सभी प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्षों, संगठन प्रमुखों से अपील है कि वो देशभर में शांतिपूर्ण भारत बंद में हमारे अन्नदाता के साथ दें। कांग्रेस के अलावा राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने भी पार्टी की ओर से किसानों के ‘भारत बंद’ को अपना समर्थन देने की घोषणा की है।

बसपा सहित कई पार्टियों का भी किसानों को समर्थन

बसपा प्रमुख मायावती ने भी किसानों के ‘भारत बंद’ को समर्थन देने का ऐलान करते हुए कहा कि अगर किसान खुशह रहेगा, तो देश खुशहाल होगा। मायावती ने कहा कि तीनों कृषि कानूनों को तुंरत वापस लिया जाना चाहिए। वहीं आंध्र प्रदेश सरकार का नेतृत्व कर रही YSR कांग्रेस की ओर से भी किसानों को समर्थन देते हुए भारत बंद में पूरा सहयोग का ऐलान किया गया है। इसके अलावा तेलगू देशम पार्टी (TDP), CPI ने भी किसानों के आंदोलन का समर्थन देने की घोषणा की। वहीं दिल्ली में भी आम आदमी पार्टी की ओर से AAP नेता राघव चड्ढा ने पार्टी की ओर से किसानों के ‘भारत बंद’ को समर्थन देने की घोषणा की है।

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गौरतलब है कि तीनों नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसान पिछले साल नवंबर 2020 से दिल्ली की सीमाओं को घेर कर बैठे हुए हैं। किसान धरना आंदोलन का नेतृत्व 40 से अधिक किसान यूनियन की निकाय संयुक्त किसान मोर्चा कर रहे हैं। किसानों के विरोध प्रदर्शन को खत्म कराने और गतिरोध को तोडऩे के लिए सरकार और किसान यूनियनों ने अब तक करीब 11 दौर की बातचीत की है। लेकिन सभी बैठके बेनतीजा ही निकली, आखिरी बातचीत इसी साल 22 जनवरी को हुई थी। 26 जनवरी को किसान प्रदर्शनकारियों की ओर से एक ट्रैक्टर रैली के दौरान व्यापक हिंसा के बाद बातचीत फिर से शुरू नहीं हो सकी। किसान संगठनों का आरोप है कि ये कानून ‘मंडी’ और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) खरीद प्रणाली को खत्म कर देंगे और किसानों को बड़े कॉरपोरेट की दया पर छोड़ दिया जाएगा। इसलिए किसान हर हाल में तीनों कृषि कानून रद्द करने की मांग पर अड़े हुए हैं।

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