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पहले दिन 3,897 ‘पिंक सहेली’ मोबिलिटी कार्ड जारी

By HO BUREAU 

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rekha gupta

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा सोमवार को लॉन्च किए गए पिंक सहेली या राष्ट्रीय सामान्य मोबिलिटी कार्ड के पहले दिन ही 3,987 कार्ड जारी किए गए। इनमें से 3,897 पिंक कार्ड पात्र महिलाओं और दिल्ली के ट्रांसजेंडर निवासियों के लिए थे, जबकि 90 नीले कार्ड पुरुषों सहित सामान्य यात्रियों के लिए जारी किए गए।

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वितरण काउंटरों की स्थापना

कार्ड वितरण के लिए 50 काउंटर स्थापित किए गए हैं। ये काउंटर जिला मजिस्ट्रेट और उप-मंडल मजिस्ट्रेट कार्यालयों तथा चुनिंदा दिल्ली परिवहन निगम बस डिपो में लगाए गए हैं। इससे नागरिकों को कार्ड प्राप्त करने में सुविधा हो रही है और विभिन्न स्थानों पर पहुंच सुनिश्चित की जा रही है।

पिंक सहेली कार्ड क्या है

यह पहल महिलाओं और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को डीटीसी और क्लस्टर बसों पर मुफ्त यात्रा प्रदान करने के लिए शुरू की गई है। यह कार्ड मौजूदा कागज-आधारित पिंक टिकट प्रणाली को प्रतिस्थापित करेगा। नई प्रणाली डिजिटल और अधिक सुविधाजनक है, जो यात्रियों को हर बार टिकट लेने की परेशानी से मुक्त करती है।

बहु-मोडल उपयोग की सुविधा

कार्ड की एक प्रमुख विशेषता यह है कि इसका उपयोग दिल्ली मेट्रो और क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट सिस्टम जैसी अन्य सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर सशुल्क यात्राओं के लिए भी किया जा सकता है। यह यात्रियों को विभिन्न नेटवर्क में एक ही कार्ड का उपयोग करने की अनुमति देता है, जो ‘वन नेशन-वन कार्ड’ की दृष्टि के अनुरूप है। यह एकीकृत दृष्टिकोण शहरी गतिशीलता को सरल और अधिक कुशल बनाता है।

महत्व और प्रभाव

पहले दिन लगभग 4,000 कार्डों का वितरण योजना के प्रति जनता की सकारात्मक प्रतिक्रिया को दर्शाता है। यह पहल न केवल महिलाओं और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए यात्रा को किफायती बनाती है बल्कि उन्हें शिक्षा और रोजगार के अवसरों तक बेहतर पहुंच भी प्रदान करती है। पेपर टिकट से डिजिटल कार्ड की ओर संक्रमण पर्यावरण के अनुकूल भी है और प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाता है।

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निष्कर्ष

पिंक सहेली कार्ड का सफल पहला दिन दिल्ली सरकार की महिला-केंद्रित पहलों की दिशा में एक सकारात्मक शुरुआत है। 50 वितरण काउंटरों की उपलब्धता यह सुनिश्चित करती है कि अधिक से अधिक पात्र नागरिक इस सुविधा का लाभ उठा सकें। बहु-मोडल उपयोग की क्षमता इसे एक व्यापक गतिशीलता समाधान बनाती है। आने वाले दिनों में और अधिक नागरिकों द्वारा इस योजना को अपनाने की उम्मीद है, जो दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन को अधिक समावेशी और सुलभ बनाएगा।

सपन दास  

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