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Mumbai Attack के आतंकी अजमल कसाब पर सरकार ने क्यों खर्च किए थे 50 करोड़, जानें यहां

Mumbai Attack: 26/11 हमले के आतंकी अजमल कसाब पर सरकार की ओर से करीब 50 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किया गया।

By इंडिया वॉइस 
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Mumbai Attack 26/11 : देश के चर्चित आतंकी हमले में पकड़े गए आरोपी पर सरकार की ओर से करोड़ो रुपये खर्च कर दिये गए। वर्ष 2008 में हुए मुबंई हमले में पकड़े गए एक मात्र आतंकी अजमल कसाब पर सरकार की ओर से उसके रहने, खाने-पीने, सुरक्षा और वकील पर करोड़ों रुपये खर्च किया। इस मामले से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक पाकिस्तानी आतंकी कसाब को गिरफ्तार करने के बाद उस पर हर रोज करीब 3.5 लाख रुपये का खर्च होता था। वहीं 46 महीनों की न्याय प्रक्रिया का हिसाब लगाया जाए तो आतंकी कसाब पर करीब 48 करोड़ रुपये खर्च किये गए थे। कानून प्रक्रिया के चलते सरकार को इस बोझ को झेलना पड़ा। जबकि अन्य अधिकारियों की मानें तो वह आतंकी कसाब के खर्च को 50 करोड़ से अधिक बताते हैं।

 

5.25 करोड़ खर्च कर बनाया गया था स्पेशल बैरक

पाकिस्तानी आंतकी को गिरफ्तार करने के बाद उसे ऑर्थर रोड़ पर रखा गया। कसाब की सुरक्षा को देखते हुए उसके लिए एक स्पेशल बैरक बनाई गई थी। बुलैटप्रूफ बैरक को बनाने में सरकार का करीब 5.25 करोड़ का खर्च आया था। जबकि इसकी सुरक्षा में लगाई गई गाड़ियों पर 1.5 करोड़ का खर्च आता था। इतना ही नहीं एक जगह से दूसरी जगह ले जानें के लिए आईटीबीपी के जवानों की भी मदद ली जाती थी। आईटीबीपी ने कसाब की सुरक्षा पर 11 करोड़ रुपये खर्च किये थे।

 

फांसी की सजा से बचने के लिए कसाब ने क्या किया

कसाब के वकील ने उसकी फांसी की सजा को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाते हुए मामले की सुनवाई की। कई दलीलों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फांसी के फैसले को बरकरार रखा। इसके बाद कसाब  ने राष्ट्रपति को दया याचिका भेजी। जिसको गृह मंत्रालय ने खारिज करते हुए अपनी सिफारिश राष्ट्रपति को भेज दी। राष्ट्रपति ने भी दया याचिका को खारिज कर दिया। इसके बाद महाराष्ट्र सरकार को कसाब की फांसी की फाइल भेजी गई। 21 नवंबर को आंतकी अजमल कसाब को मृत्यु दंड दिया जाना तय किया गया।

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करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद केवल 50 रुपये में दे दी गई थी कसाब को फांसी

करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद कसाब को मात्र 50 रुपये में फांसी दी गई थी। आपको ये जानकार काफी हैरानी होगी कि हमारे देश के कानून में किसी भी अपराधी को फांसी देने के लिए केवल 50 रुपये के बजट का ही प्रावधान है। ऐसे में सोचिए यदि कसाब को कुछ माह पहले ही फांसी दी जाती तो सरकार का करोड़ों का खर्च बच जाता।

 

कसाब की जेल में आखिरी रात कैसे बीती

मुबंई हमले की चौथी बरसी से पहले कसाब को फांसी दी गई थी। कसाब की फांसी को बेहद ही गोपनीय रखा गया था। इस पूरी प्रक्रिया को ऑपरेशन एक्स दिया गया था। इससे पहले कसाब को ऑर्थर रोड़ जेल से पुणे की यरवडा जेल लाया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए कसाब को बुर्का पहनाकर यरवडा जेल लाया गया था। कसाब शिफ्टिंग के दौरान कुछ नहीं बोला। फांसी से पहले उसकी आखिरी इच्छा पूछी गई। कसाब ने कुछ इच्छा जाहिर नहीं की। सुबह रोजाना की तरह कसाब ने नहाया और फांसी से पहले नमाज अदा की। उसने कहा फांसी की खबर उसकी मां तक पहुंची दी जाए। इसके बाद उसने अल्लाह से अपनी गलतियों की माफी मांगी और दोबारा ऐसी गलती न करने की बात कही।

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