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“यह भारत चुप नहीं रहता” – बदले तेवर, बदली रणनीति

By HO BUREAU 

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Indian soldier in action with flag

“भारत अब पहले जैसा नहीं रहा, अब वह जवाब भी देता है और ज़रूरत पड़े तो सामने जाकर प्रहार भी करता है।” यह कथन किसी जोशीले मंच का नारा भर नहीं, बल्कि बीते वर्षों में ज़मीनी सच्चाइयों से उपजा निष्कर्ष है। आज का भारत सहनशीलता और संकोच के बीच उलझा राष्ट्र नहीं, बल्कि स्पष्ट रणनीति के साथ निर्णय लेने वाला देश बन चुका है।

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इस बदलाव की पहली झलक 2016 में उरी हमले के बाद दिखी, जब भारत ने नियंत्रण रेखा पार कर आतंकियों के ठिकानों पर कार्रवाई की। यह कदम सिर्फ़ सैन्य प्रतिक्रिया नहीं था, बल्कि यह संकेत था कि सीमापार हमलों को अब केवल कूटनीतिक नोट्स तक सीमित नहीं रखा जाएगा। भारत ने पहली बार खुले तौर पर यह स्वीकार किया कि वह ज़रूरत पड़ने पर सीमा के उस पार भी कार्रवाई कर सकता है।

इसके बाद 2019 में पुलवामा हमले के जवाब में बालाकोट की कार्रवाई ने इस नीति को और स्पष्ट किया। भारतीय वायुसेना की इस स्ट्राइक ने यह संदेश दिया कि आतंकी ढाँचे अब भौगोलिक सीमाओं के पीछे सुरक्षित नहीं हैं। यह कदम सैन्य ताक़त से ज़्यादा मानसिक और रणनीतिक दबाव बनाने की दिशा में था।

बदला हुआ भारत केवल पश्चिमी सीमाओं तक सीमित नहीं रहा। डोकलाम और गलवान की घटनाओं के बाद पूर्वी सीमा पर भी भारत का रुख़ पहले से कहीं ज़्यादा सख़्त और संगठित दिखा। सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढाँचे का तेज़ी से विकास, सैनिक तैनाती और कूटनीतिक स्पष्टता, इन सबने मिलकर यह दिखाया कि अब सीमाओं को लेकर अस्पष्टता की गुंजाइश नहीं छोड़ी जाएगी।

समुद्री क्षेत्र में भी भारत ने अपनी मौजूदगी मज़बूत की है। अरब सागर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा अभियानों के ज़रिए यह साफ़ हुआ कि भारत अपने नागरिकों, जहाज़ों और व्यापारिक रास्तों की रक्षा के लिए सीमाओं से बाहर जाकर भी भूमिका निभाने को तैयार है। इससे भारत की छवि एक जिम्मेदार और सक्षम क्षेत्रीय शक्ति के रूप में उभरी है।

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आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर भी बड़े फैसले लिए गए। जम्मू-कश्मीर में संवैधानिक बदलाव और आतंकवाद की फंडिंग पर कड़ी कार्रवाई इस बात के संकेत हैं कि अब सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर आधे-अधूरे फैसले नहीं लिए जाएंगे।

आज का भारत केवल प्रतिक्रिया करने वाला देश नहीं रहा। वह परिस्थितियों को समझकर समय, जगह और तरीके खुद तय करता है। यही बदलाव उस वाक्य को अर्थ देता है, यह भारत अब चुप नहीं रहता। यह आक्रामकता नहीं, बल्कि आत्मविश्वास से भरा हुआ संकल्प है, जो नए भारत की पहचान बन चुका है।

सपन दास 

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