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यूपी कैबिनेट विस्तार में शपथ लेने वाले 7 मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड, दो पर हैं आपराधिक मामले एक है 9वीं पास

उप्र मंत्रिपरिषद का विस्तार, सात नये मंत्रियों ने ली शपथ

By इंडिया वॉइस 
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उत्तर प्रदेश में चुनाव की तारीख नज़दीक आने के साथ ही प्रदेश में बड़ा राजनितिक फेर बदल देखने को मिला है तीसरे कैबिनेट विस्तार में सात नए मंत्रियों को सरकार में कल जगह मिली है, जिनके जातीय समीकरण पर सबकी निगाहें टिकी हैं, सभी जातियों का गुलदस्ता सजाने की भरपूर कोशिश की गयी है। नवनियुक्त मंत्रियों ने दावा किया है कि आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा पिछली बार से अधिक सीटें जीतकर प्रदेश में फिर से पूर्ण बहुमत की सरकार बनायेगी। नये मंत्रियों ने यह भी कहा कि पार्टी संगठन और सरकार ने उन पर जो विश्वास जताया है, उस पर वे खरा उतरेंगे।

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आपको बता दें कि कल तीसरे कैबिनेट विस्तार में शामिल हुए 7 मंत्रियों में से कांग्रेस से भाजपा में आये जितिन प्रसाद ने कैबिनेट मंत्री की शपथ ली और बाकी अन्य को राज्य मंत्री बनाया गया है, इनमे से दो मंत्रियों का अपराधिक रिकॉर्ड भी है। आइये जानते हैं इन सभी नवनियुक्त मंत्रियों के बारे में।

जितिन प्रसाद  (ब्राह्मण)

कैबिनेट मंत्री की शपथ लेने वाले जितिन प्रसाद ने सबसे पहले पद और गोपनीयता की शपथ ली जितिन प्रसाद कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए हैं  उन्होंने कहा कि उनका पूरा प्रयास रहेगा कि पूरी मेहनत व लगन से जनता का विश्वास हासिल करूं, ताकि 2022 के चुनाव में एक बार फिर से प्रदेश में भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बने शपथ ग्रहण करने के बाद जितिन प्रसाद ने सबसे पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और मुख्यमंत्री योगी के प्रति आभार किया। उन्होंने हिन्दुस्थान समाचार से कहा कि प्रधानमंत्री, पार्टी अध्यक्ष और मुख्यमंत्री ने मुझपर जो विश्वास जताया है, मेरा पूरा प्रयास रहेगा कि मैं उनकी उम्मीदों पर खरा उतरुं।

धर्मवीर सिंह (ओबीसी)

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राज्य मंत्रियों के रुप में शपथ लेने वालों में धर्मवीर सिंह भी शामिल थे यह आगरा से हैं। एमएलसी और माटी कला बोर्ड के भी अध्यक्ष हैं। विशेषज्ञों की मानें तो ओबीसी मतों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला सरकार ने लिया है शपथ लेने के बाद धर्मवीर सिंह ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने का पूरा प्रयास करुंगा। साथ ही सभी योजनाओं को धरातल पर उतारने की कोशिश करुंगा।

दिनेश खटिक (एससी)

वहीं, राज्य मंत्री के ही रूप में शपथ लेने वाले दिनेश खटिक भी थे जो कि इन मंत्रियों में सबसे कम पढ़े लिखे विधायक हैं नवनियुक्त मंत्री ने सिर्फ 9वीं तक की पढाई की है इनके ऊपर एक अपराधिक केस भी दर्ज है। मंत्री बनने के बाद उन्होंने कहा कि हमें सबका साथ सबका विकास मंत्र के अनरूप चलना है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि काम करने के लिये एक दिन ही बहुत होता है। अभी तो चुनाव होने में चार माह का समय है। इस दौरान बहुत काम होंगे। दिनेश खटिक ने कहा कि दलित समाज के लोगों ने वर्ष 2014, 2017 और 2019 के चुनावों में भाजपा को एक तरफा वोट दिया था। आगे भी यही होगा और 2022 में भाजपा की फिर से सरकार बनेगी।

डॉ संगीता बलवंत  (ओबीसी)

राज्य मंत्री बनने वालों की लिस्ट में डॉ संगीता बलवंत भी शामिल थी  संगीता बलवंत छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय रही हैं। वह गाजीपुर पीजी कॉलेज में छात्रसंघ उपाध्यक्ष निर्वाचित हुईं। वर्ष 2017 में विधायक बनने से पहले संगीता गाजीपुर जिला पंचायत सदस्य भी रह चुकी हैं। संगीता बलवंत के रूप में वर्तमान सरकार के मंत्रिमंडल में गाजीपुर को प्रतिनिधित्व करने का अवसर प्राप्त हुआ है।  उन्होंने कहा कि भाजपा के सिपाही बहुत निष्ठावान होते हैं। जितना भी समय मिला है उसमें बेहतर काम करेंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा पिछड़ों की हितैषी है।

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छत्रपाल गंगवार (कुर्मी)

बरेली की बहेड़ी सीट से दूसरी बार विधायक चुने गए छत्रवाल गंगवार को भी कैबिनेट में जगह मिली है दमखोदा के रहने वाले छत्रपाल सिंह को 2002 में भाजपा से पहली बार टिकट मिला लेकिन उसमें हार गए थे। जिसमे सपा के मंज़ूर अहमद जीते थे। उनकी हत्या के बाद  भाजपा बसपा का गठबंधन हो जाने पर बसपा को समर्थन दिया था। 2007 के चुनाव में पहली बार विधायक बने। इसके बाद 2012 के चुनाव में हार गए। आरएसएस में सीतापुर में प्रचारक और विस्तारक के रूप में काम कर चुके है। आरएसएस से जुड़े होने की वजह से इन्हें भाजपा 2002 में सियासत में उतारा गया। पार्टी में कुर्मी चेहरे के रूप में विधानसभा चुनाव में भाजपा उनका इस्तेमाल करेगी।

पलटूराम (एससी)

उनके राजनीतिक जीवन की कहानी भी बेहद गजब है। विधायक बनने से पहले पलटूराम वेल्डिंग का काम किया करते थे। गोंडा शहर में डाकखाने के सामने उन्होंने लोहे की ग्रिल व रेलिंग की दुकान खोली। वर्ष 2000 में वे पहली बार जिला पंचायत सदस्य बने। पहली बार विधायक बने और मंत्री बन गए। गोंडा के पारेद सरकार गांव में जन्मे पलटू राम सोनकर समाज से ताल्लुक रखते हैं। वर्तमान में गोंडा जिला मुख्यालय पर इनका आवास है। इनकी पत्नी ज्ञानमती गोंडा जिला पंचायत के अध्यक्ष रह चुकी है। पलटूराम  सोनकर(खटीक)बिरादरी से ताल्लुक रखते है। 2017 के चुनाव में कांग्रेस-सपा गठबंधन प्रत्याशी शिवलाल को 25000 के भारी अंतर से पराजित किया था। इनके खिलाफ एक आपराधिक केस भी दर्ज है।

संजीव कुमार (एसटी)

संजीव कुमार गोंड़ उर्फ संजय 2012 में ओबरा विधानसभा सीट से रिकार्ड मतों से जीतकर पहली बार भाजपा विधायक बने थे। दुद्धी से सात बार विधायक रह चुके विजय सिंह को अपना राजनीतिक गुरु मानने वाले संजीव कुमार उनके बाद मंत्री बनने वाले जिले के दूसरे आदिवासी नेता होंगे। संजीव गोंड़ 1978 में जनसंघ से विधायक रहे हैं। बताया जा रहा है कि पिछड़ा वोट का बड़ा असर इनके पास मौजूद है।

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विधानसभा चुनाव से कुछ माह पहले हुये इस विस्तार में सरकार और संगठन ने क्षेत्रीय संतुलन और जातीय समीकरण साधने की कोशिश की है। साथ ही एक महिला को राज्य मंत्री बनाकर आधी आबादी को भी तवज्जो दी गयी है।

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