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NGT का CPCB को आदेश: 500 मिग्रा. से कम TDS वाले क्षेत्रों में वाटर प्यूरीफायर पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश

कमेटी के मुताबिक RO की जरूरत उन्हीं इलाकों में पड़ती है, जहां TDS का लेवल 500 मिलीग्राम प्रति लीटर से ज्यादा हो।

By इंडिया वॉइस 
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नई दिल्ली, 03 दिसंबर। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) को आदेश दिया है कि वो उन सभी RO निर्माताओं को वाटर प्यूरीफायर पर बैन लगाने का निर्देश जारी करें, जहां पानी में कुल घुलित ठोस (TDS) का स्तर 500 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम है। NGT के चेयरपर्सन जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता बेंच ने ये आदेश जारी किया है।

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पर्यावरण संरक्षण रूल्स के नियम 115 में संशोधन की जरूरत

NGT ने RO के रेगुलेशन को लेकर केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्रालय की ओर से जारी नोटिफिकेशन को नाकाफी बताते हुए नाराजगी जताई। NGT ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण रूल्स के नियम 115 में संशोधन करने की जरूरत है। NGT ने CPCB को निर्देश दिया कि वो RO से अपशिष्ट उपकरणों के प्रबंधन को लेकर दिशानिर्देश जारी करे। NGT ने कहा कि RO को लेकर एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उचित तरीके से पालन करने के लिए एक महीने के अंदर दिशानिर्देश जारी किए जाएं।

NGT ने कहा कि उन्होंने अपने आदेश में कहा था कि 500 TDS से कम वाली जगहों पर RO पर रोक लगाई जाए, लेकिन पर्यावरण मंत्रालय के नोटिफिकेशन में 500 TDS से कम वाले जगहों पर आरओ के रेगुलेशन का कोई प्रावधान नहीं है। इसी तरह इस नोटिफिकेशन में पानी की बर्बादी पर भी कोई ध्यान नहीं दिया गया है।

NGT ने 20 मई 2019 को आदेश दिया था कि जहां के पानी का TDS 500 मिलीग्राम प्रति लीटर तक हो, वहां RO की जरूरत नहीं है। इससे ज्यादा होने पर ही RO का इस्तेमाल किया जाए, लेकिन इस संबंधी नोटिफिकेशन अभी तक वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने जारी नहीं किया था। NGT ने कहा कि इस नोटिफिकेशन को जारी करने में देरी से लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है।

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TDS का लेवल 500 मिलीग्राम प्रति लीटर से ज्यादा होने पर RO की जरूरत

दरअसल NGT की गठित विशेषज्ञों की कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि नगर निगमों या जल बोर्ड की ओर से घरों में जो पानी की सप्लाई की जाती है, उसके शुद्धिकरण के लिए RO लगाने की कोई जरूरत नहीं है। विशेषज्ञ कमेटी ने NGT को सौंपी रिपोर्ट में कहा था कि नगर निगमों के पानी को अगर आरओ के जरिए पीते हैं तो ये हमारी सेहत को खराब करता है, क्योंकि इससे मिनरल गायब हो जाते हैं। कमेटी के मुताबिक नदी, तालाबों और झील के सतह पर मौजूद पानी के स्रोतों से निगम की ओर से पाइप के जरिए सप्लाई किए जाने वाले पानी के लिए RO की कोई जरूरत नहीं है। कमेटी के मुताबिक RO की जरूरत उन इलाकों में पड़ती है, जहां TDS का लेवल 500 मिलीग्राम प्रति लीटर से ज्यादा हो।

याचिका फ्रेंड नामक एक NGO ने दायर की है। याचिका पर सुनवाई करते हुए एनजीटी ने 21 दिसंबर, 2018 को एक कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी में केंद्रीय पर्यावरण विभाग, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड, IIT दिल्ली और नेशनल एनवायरमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट दिल्ली के प्रतिनिधि शामिल हैं।

हिन्दुस्थान समाचार

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