Advertisement
  1. हिन्दी समाचार
  2. देश
  3. होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर बढ़ते जोखिम के बीच भारत को वैकल्पिक मार्ग तलाशने की जरूरत

होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर बढ़ते जोखिम के बीच भारत को वैकल्पिक मार्ग तलाशने की जरूरत

By HO BUREAU 

Updated Date

Oil Crisis Alert

दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) आज वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की धुरी बना हुआ है। भारत अपनी कच्चे तेल की लगभग 60 प्रतिशत आपूर्ति इसी मार्ग से प्राप्त करता है। ऐसे में पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और समय-समय पर उत्पन्न होने वाले सुरक्षा संकट भारत के लिए चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अब इस मार्ग पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए वैकल्पिक रास्तों की खोज तेज करनी चाहिए।

पढ़ें :- अमेरिकी राष्ट्रपति के खिलाफ अमेरिका और यूरोप में उठी विरोध की लहर, सड़कों पर उतरे लाखों लोग

होर्मुज़ जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित एक संकरा समुद्री मार्ग है, जिससे होकर विश्व का लगभग एक-तिहाई समुद्री तेल व्यापार गुजरता है। यदि किसी भी कारण से यह मार्ग बंद होता है या यहां सैन्य तनाव बढ़ता है, तो इसका सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा, तेल कीमतों और घरेलू अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। यही कारण है कि हाल के वर्षों में भारत सरकार और रणनीतिक विशेषज्ञ इस विषय पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं।

भारत के सामने सबसे बड़ा विकल्प वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों और सप्लाई रूट्स का विकास है। रूस, अमेरिका और अफ्रीकी देशों से सीधे समुद्री मार्गों के जरिए तेल आयात बढ़ाना एक विकल्प हो सकता है। इसके अलावा, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों के साथ दीर्घकालिक आपूर्ति समझौते भी भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत कर सकते हैं।

एक और महत्वपूर्ण पहलू है रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserves) का विस्तार। यदि भारत अपने तेल भंडारण क्षमता को और बढ़ाता है, तो किसी आपात स्थिति में देश कई महीनों तक बिना बाहरी आपूर्ति के भी अपनी जरूरतें पूरी कर सकता है। सरकार पहले ही आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में ऐसे भंडार विकसित कर चुकी है, लेकिन विशेषज्ञ इसे और बढ़ाने की सलाह दे रहे हैं।

इसके साथ-साथ, नवीकरणीय ऊर्जा जैसे सौर और पवन ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ना भी दीर्घकालिक समाधान माना जा रहा है। भारत ने 2030 तक अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा हरित ऊर्जा से पूरा करने का लक्ष्य रखा है, जो भविष्य में तेल पर निर्भरता कम करने में मदद करेगा।

पढ़ें :- तेज धूप में त्वचा की सुरक्षा के लिए प्रभावी घरेलू उपाय

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदलते हालात और पश्चिम एशिया में अस्थिरता को देखते हुए यह स्पष्ट है कि भारत को केवल एक ही समुद्री मार्ग पर निर्भर रहना जोखिम भरा साबित हो सकता है। इसलिए होर्मुज़ जलडमरूमध्य के विकल्पों की तलाश और ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाना आज की रणनीतिक जरूरत बन चुकी है। यह कदम न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि वैश्विक संकटों के समय देश की आर्थिक स्थिरता को भी सुनिश्चित करेगा।

सपन दास

Advertisement