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कोलकाता में ‘हम किसान हैं, आतंकवादी नहीं’ की थीम पर बना पूजा पंडाल

शहर के उत्तरी किनारे पर दमदम पार्क भारत चक्र पंडाल के प्रवेश द्वार पर खेती के लिए इस्तेमाल होने वाले ट्रैक्टर की विशाल प्रतिकृति उनके संघर्ष को दर्शाती है

By इंडिया वॉइस 
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कोलकाता : किसान आंदोलन का असर पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के लिए बने पंडालों में दिखने लगा है। इस बार कोलकाता में किसान आंदोलन पर केंद्रित पूजा पंडाल बनाया गया है। आयोजकों ने इस बार पंडाल का थीम “हम किसान हैं आतंकवादी नहीं” रखा है।

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शहर के उत्तरी किनारे पर दमदम पार्क भारत चक्र पंडाल के प्रवेश द्वार पर खेती के लिए इस्तेमाल होने वाले ट्रैक्टर की विशाल प्रतिकृति उनके संघर्ष को दर्शाती है। फुटपाथ एक कार का स्केच है, जिसके रास्ते में एक किसान लेटा हुआ है। यहां बंगाली में एक पंक्ति है लिखी है – “मोटरगारी उराए धुलो, नीचे पोरे चाशिगुलो (मोटर कार धूल उड़ाती है और उसके नीचे किसान दबते हैं)। वहां सैकड़ों चप्पल पंडाल की जमीन पर पड़े हैं, जो एक विरोध के बाद के उन दृश्यों का प्रतीक है- जिसके दौरान पुलिस की कार्रवाई के दौरान कई लोगों ने अपने जूते खो दिए। मुख्य पंडाल को छत को लटकते धान की बालियों से सजाया गया है। इस विषय की अवधारणा करने वाले कलाकार अनिर्बान दास ने बताया कि आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों के नाम विशाल ट्रैक्टर पर कागज की चिटियों में लिखे गए हैं। इसमें एक बड़ा पंख भी है। पंख बंधन से मुक्त होने की इच्छा का प्रतीक हैं।” पंडाल के एक अन्य पोस्टर में अंग्रेजी में लिखा है, “हम किसान हैं, आतंकवादी नहीं, किसान अन्न सैनिक हैं।”

पूजा समिति के सचिव प्रतीक चौधरी ने बताया कि वे किसानों के शोषण को उजागर करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि 1946-47 में तेभागा आंदोलन के दिनों से लेकर वर्तमान कृषि बिलों के खिलाफ हालिया आंदोलन तक, हमने उन किसानों की कहानी बताने की कोशिश की है जो हमें भोजन मुहैया कराते हैं। चौधरी ने कहा कि उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में हालिया घटना में चार किसानों को एक वाहन ने कुचल कर मार डाला। हमने इसे थीम में शामिल कर लिया। उन्होंने बताया कि इस पंडाल के जरिए किसानों के संघर्ष को दर्शाने की कोशिश की गई है।

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