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रिम्स में कर्मचारियों की कमी से मरीजों को नहीं मिल रही पर्याप्त सुविधाएं

संसाधन तो बढ़ रहे लेकिन मरीजों को कैसे मिलेगा 100% लाभ: डेंटल की एक्सरे मशीन पारामेडिकल स्टूडेंट के भरोसे- सीटी स्कैन-सेंट्रल लैब चलाने के लिए पर्याप्त टेक्निशियन-मैनपावर नहीं

By इंडिया वॉइस 
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रांची- सिर्फ संसाधन बढ़ाने से अस्पताल की छवि में ज्यादा फर्क नही पड़ेगा, यहां पहले सिरे से प्रबंधन पर ध्यान देते हुए मैनपावर बढ़ाने पर भी ध्यान देना होगा। राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स में मैनपावर की भारी कमी है। नतीजा यह है कि सीमित मैनपावर के कारण रोगियों को सही पेशेंट केयर नही मिल पा रहा। पिछले तीन माह में अस्पताल में आधा दर्जन से ज्यादा एडवांस उपकरण लगाए गए है। प्रबंधन का दावा है कि ट्रॉमा सेंटर में लगे पैथोलॉजिकल सेंट्रल लैब में 10 हजार से ज्यादा ब्लड, यूरिन आदि समस्याओं के जांच किए जा सकेंगे। लेकिन सवाल यह उठता है कि बगैर मैनपावर इतने जांच कैसे संभव है?… रिम्स के नए सेंट्रल लैब में 6 से ज्यादा मशीन लगाए गए है, ताकि जांच की गति व संख्या दोनों बढ़ सके, लेकिन इतने मशीन के संचालन का जिम्मा एक शिफ्ट में दो टेक्निशियनों के भरोसे है। यदि 24 घंंटे की बात करें तो प्रति शिफ्ट दो-दो टेक्निशिन मिलकर 1500 सैंपल भी नही जांच सकेंगे। वर्तमान में जांच 500-800 में ही सीमित है। इधर, सीटी स्कैन मशीन का संचालन रेडियोलॉजी विभाग की देखरेख में होना है, जबकि रिम्स को इसके संचालन के लिए भी तीन से पांच ट्रेन्ड टेक्निशियन की जरूरत पड़ेगी। सेंट्रल लैब में प्रति शिफ्ट कम से कम 15 टेक्निशियन की जरूरत है। 24 घंटे संचालन के लिए स्थाई तैर पर यहां 45 टेक्निशियन नियुक्त करने होंगे।

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डेंटल में पारा मेडिकल के भरोसे दांतों का एक्सरे- एक मरीज की 2 मिनट की लेकिन लगाते हैं आधा घंटा समय

पारा मेडिकल के स्टूडेंट्स को प्रैक्टिकल नॉलेज के लिए अस्पताल में उपकरण चलाने की अनुमति दी जाती है, ताकि वे सीख सके। लेकिन रिम्स में इन स्टूडेंट्स के भरोसे पूरा विभाग और जांच का जिम्मा सौंप दिया गया है। डेंटल कॉलेज में सुबह की पाली में पारा मेडिकल के फस्ट इयर के बच्चे बगैर एक्सपर्ट जांच करते है। एक्सरे में 2 से 3 मिनट का समय लगता है लेकिन ये प्रति मरीज आधे घंटे का समय लगाते है। बगैर तकनीकी अनुभव के मशीनों के संचालन के कारण उपकरण खराब भी हो सकती है।

सीटी स्कैन संचालन के लिए एईआरबी से मिल गई एनओसी, लेकिन मैनपावर पर फंस सकता है पेंच

ट्रॉमा सेंटर के ग्राउंड फ्लोर में सीटी स्कैन जांच मशीन इंस्टॉल हो चुकी है, इसके संचालन के लिए प्रबंधन ने पत्र लिखकर एटॉमिक एनर्जी रेगुलेट्री बोर्ड से एनओसी मांगी थी। दो दिन पहले रिम्स को इसके लिए एनओसी भी मिल गइ है। एक सप्ताह में इसका संचालन भी शुरू हो जाएगा और मरीजों को इसका फायदा भी मिलेगा। हालांकि मशीन से जांच क्षमता में फर्क पड़ सकता है। क्योंकि एक शिफ्ट में रिम्स को छह से ज्यादा टेक्निशियन की जरूरत पड़ेगी, जबकि रिम्स में इतने टेक्निशियन इस विभाग में नही हैं।

रिम्स के पास स्थाई टेक्निशियन करीब 40, आउटसोर्स भी सीमित संख्या में

रिम्स के पास वर्तमान में स्थाई टेक्निशियन के नाम पर करीब 40 टेक्निशियन है, जबकि 1800 बेडेड हॉस्पिटल की क्षमता के अनुसार, 200 से ज्यादा टेक्निशियन की जरूरत है। स्थाई के अलावा करीब इतने ही आउटसोर्स पर लैब टेक्निशियन रखे गए है। माइक्रोबायोलॉजी, पैथोलॉजी, लैब मेडिसिन, बायोकेमेस्ट्री आदि विभागों में यदि 10 टेक्निशियन की है तो पदस्थापित सिर्फ एक हैं। इसी अनुपात में रिम्स की व्यवस्था चल रही है। बताते चले कि रिम्स के ब्लड बैंक में रोजाना 150 से 200 यूनिट खून की सप्लाई होती है, ऐसे में सप्लाई से पहले क्रॉस मैचिंग, कई तरह के जांच व अन्य काम है। इन सभी के लिए 24 लैब टेक्निशियनों की ड्यूटी लगाई गई है, अब सूचना यह है कि यहां से टेक्निशियन को सेंट्रल लैब में भेजा जाएगा।

स्टाफ नर्से सिर्फ 250, कई बार विज्ञापन निकलकर रद्द- 2002 के बाद से नही हुई है स्थाई नियुक्ति

1800 मरीजों पर कम से कम 800 स्टाफ नर्सो की जरूरत है। पर रिम्स में इनकी संख्या सिर्फ 250 के करीब है। मिली जानकारी के अनुसार, नियुक्ति 425 नर्सो की हुई थी, इसके कई लोग सेवानिवृत्त और कई लोगों की बीमारी के कारण जान भी जा चुकी है। पिछले तीन सालों में पांच बार से अधिक स्थाई नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकाला गया है, लेकिन किसी न किसी विवाद व राजनीतिक हस्तक्षेप के बाद इसे रद्द कर दिया जाता है। करीब छह माह पहले विज्ञापन निकाली गई है, अब तक प्रक्रिया अधूरी है।

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