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’82वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों’ की बैठक को पीएम ने किया वर्चुअली संबोधित

अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन' के 100 वर्ष पुर होने पर होने पर शिमला में आयोजित '82वें पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे'।

By इंडिया वॉइस 
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नई दिल्ली, 17 नवम्बर। पीएम नरेन्द्र मोदी ने आज बुधवार को वीडियो कॉन्फेंस के माध्यम से ’82वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों‘ के सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। इस दौरान कार्यक्रम को वर्चुअली सम्बोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि ‘भारत के लिए लोकतंत्र केवल एक व्यवस्था मात्र नहीं है बल्कि यह देश का स्वभाव और सहज प्रकृति है’।

 

आने वाले वर्षों में देश को नई उंचाईयों पर ले जाना है 

यहाँ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम ने देश के विकास में राज्यों की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘लोकतंत्र में लोगों और राज्यों की बड़ी भूमिका होती है’, और हम इसे ‘सबका प्रयास’ कहते हैं। यह भारत की प्रकृति है। उन्होंने कहा कि ‘हमें आने वाले वर्षों में देश को नई ऊंचाइयों पर लेकर जाना है और असाधारण लक्ष्य हासिल करने हैं। सिर्फ इतना ही नहीं उन्होंने यह भी कहा कि यह संकल्प ‘सबके प्रयास’ से ही पूरे होंगे और लोकतंत्र में भारत की संघीय व्यवस्था में जब हम ‘सबका प्रयास’ की बात करते हैं तो सभी राज्यों की भूमिका उसका बड़ा आधार होती है।”

कोरोना के खिलाफ लड़ाई में राज्यों की भूमिका को सराहा 

पीएम मोदी ने यहाँ कहा कि ‘देश ने बीते सालों में पूर्वोत्तर की दशकों पुरानी समस्याओं का समाधान और दशकों से अटकी-लटकी विकास की तमाम बड़ी परियोजनाओं को पूरा करने का काम किया है। उन्होंने यह भी कहा कि यह कार्य ‘सबके प्रयास से ही संभव हुए हैं’। पीएम मोदी ने इस दौरान कोरोना के खिलाफ लड़ाई में राज्यों की भूमिका को भी सराहा।

 

हमारे विचार ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को मजबूत करने वाले हों

प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि ‘विधायिकाओं में हमारा आचरण भारतीय मूल्यों के अनुरूप होना चाहिए’। ‘हमारे सदन की परम्पराएं और व्यवस्थाएं स्वभाव से भारतीय हैं’। उन्होंने कहा कि हमारी नीतियां और कानून भारतीयता के भाव को ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को मजबूत करने वाले हों। पीएम ने कहा कि ‘सबसे महत्वपूर्ण सदन में हमारा खुद का भी आचार-व्यवहार’ ‘भारतीय मूल्यों के हिसाब से हो ये हम सबकी जिम्मेदारी है’।

 

भारत तमाम विविधताओं से भरा हुआ देश 

पीएम ने कहा कि ‘हमारा देश तमाम विविधताओं से भरा हुआ देश है। ‘अपनी हजारों वर्ष की विकास यात्रा में हम इस बात को अंगीकृत कर चुके हैं कि विविधता के बीच भी एकता की भव्य और दिव्य अखंड धारा बहती है’। पीएम ने कहा कि ‘एकता की यही अखंड धारा हमारी विविधता को संजोती है और उसका संरक्षण करती है’।

 

पीएम ने अधिकारियों से पूछे सवाल 

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन के दौरान ‘सवालिया’ लहजे में अधिकारियों से पूछा कि ‘क्या साल में 3-4 दिन सदन में ऐसे रखे जा सकते हैं जिसमें समाज के लिए कुछ विशेष कर रहे जनप्रतिनिधि अपना अनुभव बताएं ? सिर्फ यही नहीं अपने सामाजिक जीवन के इस पक्ष के बारे में भी देश को बताएं। उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि इससे दूसरे जनप्रतिनिधियों के साथ ही समाज के अन्य लोगों को भी कितना कुछ सीखने को मिलेगा।

आपको बता दें कि पीएम मोदी आज ‘अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन’ के 100 वर्ष पुर होने पर होने पर शिमला में आयोजित ’82वें पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे’। वहीं आपको बता दें कि पीठासीन अधिकारियों की पहली बैठक भी 1921 में शिमला में ही हुई थी। इस मौके पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भी कार्यक्रम में मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

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