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जेल में बंद 36 कैदी बनेंगे कृषि उद्यमी, जेल में सीख रहे हैं उद्यमी बनने के गुर

बेगूसराय जेल कैदियों को सुधारने का मौका देने के साथ ही उन्हें दोबारा समाज में लौटने के लिए भी तैयार कर रही है।

By इंडिया वॉइस 
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बेगूसराय, 20 नवंबर। कोई भी जेल आरोपियों के अपनी गलती का एहसास करने का स्थान होता है लेकिन बदलते दौर में बेगूसराय जेल ना सिर्फ सजा काटने की जगह बनी है, बल्कि यहां कैदियों को शिक्षा के साथ-साथ स्वरोजगार के लिए भी प्रेरित किया जाता है। जेल में बंद कैदियों को स्वरोजगार के प्रति प्रेरित करने के लिए लगातार अभियान चलाया जाता है। जिससे जेल में बंद कैदी बाहर निकलने के बाद आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महती भूमिका अदा करेंगे। इसी कड़ी में एक बार फिर यूको बैंक आरसेटी बेगूसराय के द्वारा कैदियों को कृषि उद्यमी बनने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। ताकि जेल से निकलने के बाद वे स्वरोजगार का रास्ता अपनाकर अपराध की दुनिया से दूर हो जाएं तथा अपने परिवार के लिए आत्मनिर्भरता का स्रोत बन सकें।

 

बेगूसराय जेल में कैदियों को उद्यमी बनने के गुर सिखाए जा रहे हैं

कारा अधीक्षक राजेश कुमार राय ने बताया कि कृषि क्षेत्र में अपना उद्यम (व्यवसाय) शुरू करने के लिए यूको बैंक के यूको आरएसईटीआई (आरसेटी) द्वारा कृषि उद्यमी योजना कार्यक्रम के लिए 36 कैदियों का चयन कर प्रशिक्षित किया जा रहा है। 13 दिवसीय प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरा होने के बाद परीक्षा आयोजित की जाएगी तथा संबंधित विषय का प्रमाण पत्र वितरित किया जाएगा। आरसेटी के फैकल्टी तथा जेल प्रोग्रामर की उपस्थिति में सभी बंदी तन-मन से प्रशिक्षण के तमाम बिंदुओं पर गहन प्रशिक्षण ले रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि देश में बढ़ती हुई बेरोजगारी एवं कृषि पर बढ़ रहे भार को कम करने के लिए खेती में नवाचार के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि से संबंधित रोजगार भी उपलब्ध कराने का प्रयास चल रहा है। सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में हो रहे पलायन को रोकने एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से कई योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है। राज्य तथा केंद्र सरकार किसानों को अलग-अलग क्षेत्र में प्रशिक्षण देकर रोजगार के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इसके तहत बिहार सरकार, केंद्र सरकार के कौशल विकास योजना के तहत कृषि उद्यमी प्रशिक्षण देकर रोजगार उपलब्ध करवा रही है। जिसमें अन्य लोगों के साथ-साथ जेल में बंद कैदियों को भी प्रशिक्षित किया जा रहा है। ताकि वह जेल से निकलने के बाद ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ कृषि के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकें।

हिन्दुस्थान समाचार

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