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कुतुब मीनार क्यों है दिल्ली का सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थल? जानिए खास वजहें

By HO BUREAU 

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दिल्ली में स्थित कुतुब मीनार देश ही नहीं, बल्कि दुनिया के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है। हाल ही में पर्यटन सर्वेक्षणों में यह सामने आया है कि राजधानी में आने वाले अधिकांश सैलानी इस ऐतिहासिक स्थल को जरूर देखने पहुंचते हैं। इसके पीछे कई ऐतिहासिक, स्थापत्य और सांस्कृतिक कारण हैं।

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सबसे पहले, कुतुब मीनार की ऐतिहासिक महत्ता इसे खास बनाती है। इसका निर्माण 12वीं शताब्दी में कुतुब-उद-दीन ऐबक ने शुरू कराया था, जिसे बाद में इल्तुतमिश ने पूरा करवाया। यह मीनार दिल्ली सल्तनत के उदय का प्रतीक मानी जाती है, इसलिए इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों के लिए यह एक प्रमुख आकर्षण है।

दूसरा बड़ा कारण इसकी अनोखी वास्तुकला है। लगभग 73 मीटर ऊंची यह मीनार लाल बलुआ पत्थर और संगमरमर से बनी है, जिस पर बारीक नक्काशी और कुरान की आयतें उकेरी गई हैं। इसकी पांच मंजिलें और अलग-अलग बालकनियां इसे देखने वालों को रोमांचित करती हैं। उदाहरण के तौर पर, विदेशी पर्यटक इसकी ऊंचाई और डिजाइन की तुलना दुनिया की अन्य ऐतिहासिक इमारतों से करते हैं।

तीसरा कारण है इसका यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त होना। यह दर्जा मिलने के बाद इसकी अंतरराष्ट्रीय पहचान और बढ़ गई है, जिससे हर साल लाखों विदेशी पर्यटक यहां आते हैं। यह भारत की सांस्कृतिक विरासत का वैश्विक प्रतीक बन चुका है।

इसके अलावा, कुतुब मीनार परिसर में स्थित लौह स्तंभ भी लोगों के आकर्षण का केंद्र है, जो सैकड़ों वर्षों से जंग न लगने के कारण वैज्ञानिकों के लिए भी रहस्य बना हुआ है। यह उदाहरण दर्शाता है कि भारत प्राचीन समय में धातु विज्ञान में कितना उन्नत था।

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सुविधाओं की दृष्टि से भी यह स्थान पर्यटकों के लिए अनुकूल है। यहां साफ-सफाई, गाइड, टिकट व्यवस्था और आसपास खाने-पीने की सुविधाएं आसानी से उपलब्ध हैं। मेट्रो और सड़क मार्ग से इसकी अच्छी कनेक्टिविटी भी पर्यटकों की संख्या बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कुतुब मीनार सिर्फ एक ऐतिहासिक इमारत नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध विरासत, उत्कृष्ट वास्तुकला और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। यही कारण है कि दिल्ली आने वाला लगभग हर सैलानी इस अद्भुत धरोहर को देखने जरूर पहुंचता है।

सपन दास 

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