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Delhi NCR में प्रदूषण के बढ़ते संकट पर कोर्ट सख्त, कहा प्रदूषण की सुनवाई नहीं होगी बंद

चीफ जस्टिस एनवी रमना ने कहा कि कोर्ट इस मामले पर विस्तृत आदेश जारी करेगा। मामले की अगली सुनवाई 29 नवंबर को होगी।

By इंडिया वॉइस 
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नई दिल्ली, 24 नवंबर : सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के मामले की सुनवाई बंद नहीं होगी। चीफ जस्टिस एनवी रमना ने कहा कि कोर्ट इस मामले पर विस्तृत आदेश जारी करेगा। मामले की अगली सुनवाई 29 नवंबर को होगी।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील विकास सिंह ने कहा कि चुनाव के चलते पंजाब में पराली जलाने वालों पर जुर्माना नहीं लगाया जा रहा है। तब कोर्ट ने कहा था हम हर चीज़ नियंत्रित नहीं कर सकते। सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि 16 नवंबर को एक्यूआई 403 थी अब 290 है। तब चीफ जस्टिस ने कहा कि यह तो हवा बहने के चलते हुआ है। आपने क्या किया है।

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा था हमारे पास कई नई अर्ज़ियां आई हैं। एक मजदूर संगठन की है कि निर्माण कार्य शुरू करवाया जाए। तब मेहता ने कहा कि प्रतिबंध 21 तारीख तक था। अब स्थिति बेहतर है तो रोक हट गई है। औद्योगिक प्रदूषण से बचने के लिए थर्मल प्लांट बंद हैं। तब चीफ जस्टिस ने पूछा कि क्या स्कूल खुल गए हैं। तब मेहता ने कहा कि अभी उन्हें बंद रखा गया है। मेहता ने कहा था अवैध निर्माण, वाहनों पर जुर्माना लगाया गया है। मौसम विभाग की रिपोर्ट है कि 26 नवंबर तक हवा और बेहतर होगी। हम 3 दिन बाद फिर समीक्षा करेंगे। तब कोर्ट ने कहा कि वैज्ञानिक तैयारी होनी चाहिए। हवा का बहाव नियंत्रित नहीं कर सकते। पर अगले 7 दिन हवा कैसी बहेगी, उसके आधार पर आप कदम उठा सकते हैं। चीफ जस्टिस ने कहा कि हवा का बहाव कम होने का अनुमान मिलते ही प्रदूषण नियंत्रण प्लान तुरंत लागू हो जाना चाहिए। स्थिति बिगड़ने की प्रतीक्षा न हो।

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा था हम मामला बंद नहीं करेंगे। विस्तृत आदेश देंगे। आप एक्यूआई 290 बता रहे। हमें पता चला है कि यह अभी 381 है। हवा का बहाव 3 किमी प्रति घंटा है। निर्माण कार्य रुकने से मज़दूर प्रभावित हैं। लेबर वेलफेयर फंड में कितने करोड़ रुपये हैं। उनसे लोगों को 4-5 दिन पैसे मिलने चाहिए।

चीफ जस्टिस ने पूछा कि क्या पंजाब, हरियाणा, यूपी में कोई अध्ययन हुआ है कि कितनी पराली खेतों से हटाई गई। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा था अगर गोवर्धन मॉडल अपनाकर फसल अवशेष उन राज्यों में भेजा जाए जहां पशुओं के लिए चारे की कमी है तो पराली का हल निकल सकता है।

 

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