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छत्तीसगढ़ के ताप विद्युत संयंत्रों को जारी रहेगी कोयले की सुचारू आपूर्ति- सीएम भूपेश बघेल

एनटीपीसी की लारा यूनिट 12 अक्टूबर से शुरू होने की संभावना है। इस यूनिट के शुरू होने पर एक्सचेंज से विद्युत क्रय की स्थिति लगभग नहीं रहेगी। एनटीपीसी सीपत संयंत्र 21 अक्टूबर तक शुरू होने की संभावना है।

By इंडिया वॉइस 
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रायपुर, 11 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ के ताप विद्युत संयंत्रों के लिए SECL की ओर से प्रतिदिन 29 हजार 500 मेट्रिक टन कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। SECL के सीएमडी ने इसके लिए सहमति दी है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोमवार को अपने निवास कार्यालय में प्रदेश के ताप विद्युत संयंत्रों में कोयले की आपूर्ति और उपलब्धता की स्थिति की समीक्षा की। इस दौरान सीएम ने एसईसीएल के सीएमडी से कहा कि छत्तीसगढ़ की खदानों से कोयला निकालकर छत्तीसगढ़ सहित देश के बाकी राज्यों को कोयले की आपूर्ति की जाती है। जैसे की छत्तीसगढ़ से कोयले का उत्पादन किया जा रहा है, इसलिए एसईसीएल की ओर से प्राथमिकता के आधार पर छत्तीसगढ़ के ताप विद्युत संयंत्रों को उनकी जरुरत के मुताबिक अच्छी गुणवत्ता के कोयले की सप्लाई की जानी चाहिए।

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समीक्षा बैठक में SECL के सीएमडी ने बताया कि छत्तीसगढ़ को प्रतिदिन प्रदेश के ताप विद्युत संयंत्रों की जरुरत के हिसाब से 29 हजार 500 मेट्रिक टन कोयले की सप्लाई की जाएगी। साथ ही अच्छी गुणवत्ता का कोयले की भी आपूर्ति की जाएगी। उन्होंने बताया कि बारिश के कारण कोयले की गुणवत्ता प्रभावित होती है। वर्तमान में एसईसीएल की ओर से छत्तीसगढ़ को 23 हजार 290 मेट्रिक टन कोयले की आपूर्ति की जा रही है। एसईसीएल के सीएमडी ने छत्तीसगढ़ के लिए इस मात्रा को बढ़ाकर 29 हजार 500 मेट्रिक टन करने की सहमति दी।

वहीं मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बैठक में के दौरान कहा कि रेलवे की ओर से छत्तीसगढ़ को कोयले और चावल के लिए जरुरत के मुताबिक पर्याप्त संख्या में रेलवे रेक उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाना चाहिए। जिस पर दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के जीएम ने इसके लिए सहमति दी। बैठक में छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत कम्पनियों के अध्यक्ष और विशेष सचिव ऊर्जा अंकित आनंद ने जानकारी दी कि वर्तमान में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ताप विद्युत संयंत्र कोरबा ईस्ट में 3.8 दिवस का कोयला उपलब्ध है। इसी तरह हसदेव ताप विद्युत संयंत्र में कोरबा वेस्ट में 3.2 दिवस का कोयला और मड़वा ताप विद्युत संयंत्र में 7 दिनों की आवश्यकता का कोयला उपलब्ध है। केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण मानक के मुताबिक 5 दिनों की आवश्यकता से कम कोयले की उपलब्धता को क्रिटिकल स्थिति माना जाता है। अब कोयले की आपूर्ति बढ़ने से छत्तीसगढ़ के ताप विद्युत संयंत्रों को पर्याप्त मात्रा में कोयले की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।

बतादें कि मौजूदा वक्त में छत्तीसगढ़ की बिजली की औसत डिमांड 3803 मेगावाट है। जिसके विरूद्ध बिजली की उपलब्धता 3810 मेगावाट है। प्रदेश में पीक समय में विद्युत की औसत डिमांड 4123 मेगावाट है, जिसके विरूद्ध बिजली कम्पनी की ओर से 4123 मेगावाट बिजली की औसत उपलब्धता बनाई रखी जा रही है। पीक समय में आवश्यकतानुसार 200 से 400 मेगावाट विद्युत क्रय लगातार किया जा रहा है। उन्होंने ये भी बताया कि वर्तमान में NTPC की लारा (400 मेगावाट) और सीपत यूनिट (104 मेगावाट), एनएसपीएल संयंत्र (25 मेगावाट) वार्षिक रखरखाव के कारण बंद है। इस वजह से कुल 529 मेगावाट बिजली कम हासिल हो रही है। एनटीपीसी की लारा यूनिट 12 अक्टूबर से शुरू होने की संभावना है। इस यूनिट के शुरू होने पर एक्सचेंज से विद्युत क्रय की स्थिति लगभग नहीं रहेगी। एनटीपीसी सीपत संयंत्र 21 अक्टूबर तक शुरू होने की संभावना है।

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