1. हिन्दी समाचार
  2. देश
  3. Swarnim Vijay Parv: रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा- पाकिस्तान के आतंकवाद को जड़ से खत्म करेगा भारत

Swarnim Vijay Parv: रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा- पाकिस्तान के आतंकवाद को जड़ से खत्म करेगा भारत

रक्षामंत्री सिंह ने कहा कि ये युद्ध हमें यह भी बताता है कि मजहब के आधार पर हुआ भारत का विभाजन एक ऐतिहासिक गलती थी। पाकिस्तान का जन्म एक मजहब के नाम पर हुआ, लेकिन वो एक नहीं रह सका।

By इंडिया वॉइस 
Updated Date

नई दिल्ली, 12 दिसंबर। पाकिस्तान के साथ 1971 के युद्ध में जीत का जश्न मनाने के लिए रविवार को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने इंडिया गेट पर ‘स्वर्णिम विजय पर्व’ का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि ये पर्व भारतीय सेनाओं की उस शानदार विजय के उपलक्ष्य में है, जिसने दक्षिण एशिया के इतिहास और भूगोल दोनों को बदल कर रख दिया था। भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान के मंसूबों को नाकाम किया, लेकिन अब वो आतंकवाद को बढ़ावा देकर भारत को तोड़ना चाहता है। इसलिए उनके आतंकवाद को जड़ से खत्म करने की दिशा में भारत काम कर रहा है।

पढ़ें :- UP Elections 2022 : मोदी-योगी के दामन पर कोई भी मां का लाल अंगुली नहीं उठा सकता- राजनाथ सिंह

राजनाथ सिंह का पाकिस्तान पर हमला

राजनाथ सिंह ने कहा कि हम सभी इंडिया गेट पर ‘स्वर्णिम विजय वर्ष’ के तहत आयोजित ‘विजय पर्व’ मनाने के लिए इकट्ठा हुए हैं। पाकिस्तान में भारत विरोध की भावना कितनी बलवती है, इसका अंदाजा इसी बात से लगता है कि भारत पर जिन आक्रांताओं गोरी, गजनवी, अब्दाली ने हमले किए, उनके नाम पर वो अपनी मिसाइलों के नाम रखते हैं। जबकि भारत की मिसाइलों के नाम होते हैं आकाश, पृथ्वी, अग्नि। अब तो हमारी एक मिसाइल का नाम संत भी रखा गया है। जिसका शनिवार को ही सफल परीक्षण हुआ है। पाकिस्तान से पूछना चाहिए कि इन आक्रांताओं ने तो आज के पाकिस्तानी भूभाग पर भी हमला किया था।

मजहब के आधार पर हुआ भारत का विभाजन ऐतिहासिक गलती थी

रक्षामंत्री सिंह ने कहा कि ये युद्ध हमें यह भी बताता है कि मजहब के आधार पर हुआ भारत का विभाजन एक ऐतिहासिक गलती थी। पाकिस्तान का जन्म एक मजहब के नाम पर हुआ, लेकिन वो एक नहीं रह सका।

उन्होंने कहा कि 1971 की हार के बाद से पाकिस्तान भारत में लगातार एक छद्म युद्ध लड़ रहा है। 20वीं शताब्दी में हुए दो विश्वयुद्ध कई साल चले। दोनों विश्वयुद्ध के बाद अगर 20वीं शताब्दी के सबसे निर्णायक युद्धों की गिनती की जाएगी तो 1971 का युद्ध दुनिया के सबसे निर्णायक युद्धों में गिना जाएगा। ये विजय पर्व किसी खास ऑपरेशन का ही नहीं, बल्कि रानी लक्ष्मीबाई से लेकर मेजर सोमनाथ शर्मा, वीर अब्दुल हमीद, कैप्टन विक्रम बत्रा और आज हमारी सेनाओं के सभी अंगों का महोत्सव है। हम प्रत्यक्ष युद्ध में जीत चुके हैं, परोक्ष युद्ध में भी जीत हमारी ही होगी।

Swarnim Vijay Parv

‘स्वर्णिम विजय पर्व’ पर युद्ध प्रदर्शनी का उद्घाटन

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने ‘स्वर्णिम विजय पर्व’ के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते कहा कि मुझे आशा ही नहीं बल्कि पूरा विश्वास है कि आम जन इस पहल के जरिए से अपने आप को 1971 के युद्ध की उपलब्धियों और उसकी प्रेरणाओं से खुद को जोड़ सकेंगे और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को नए तरीके से आत्मसात कर सकेंगे। राजनाथ सिंह ने 1971 के युद्ध के दौरान पूर्वी और पश्चिमी मोर्चे पर प्रमुख अभियानों को दर्शाने वाली एक भव्य युद्ध प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इस मौके पर देश की आम जनता को शामिल करने, उन्हें 1971 के युद्ध के बारे में जानकारी देने, हमारी सेनाओं की अब तक की प्रगति के बारे में अवगत करने के लिए विशाल प्रदर्शनी लगाई गई है। प्रदर्शनी में 1971 में इस्तेमाल किए गए प्रमुख हथियारों और उपकरणों को प्रदर्शित किया गया।

तीनों सेनाओं के बीच तालमेल-एकीकरण को बढ़ावा

राजनाथ सिंह ने कहा कि हमारे सशस्त्र बल को किसी भी परिस्थिति के लिए तैयार रखना हमारा उद्देश्य है। इस दिशा में हम बड़ी तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं। ‘विजय पर्व’ जैसे उत्सव हमें इसी राह पर और तेजी से आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। आज बदलते समय में हमारी तीनों सेनाओं के बीच तालमेल और एकीकरण को बढ़ावा देने की बात की जा रही है। 1971 का युद्ध इसका एक शानदार उदाहरण है। इस युद्ध ने हमें एक साथ मिलकर योजना बनाने, प्रशिक्षित करने और लड़ने का महत्व समझाया। हमारे बंगाली बहनों और भाइयों पर होने वाला अन्याय और अत्याचार किसी न किसी रूप में संपूर्ण मानवता के लिए खतरा था। ऐसे में पूर्वी पाकिस्तान की जनता को उस अन्याय और शोषण से मुक्ति दिलाना हमारा राजधर्म भी था, राष्ट्रधर्म भी था और सैन्यधर्म भी था।

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत ने बांग्लादेश में लोकतंत्र की स्थापना में अपना योगदान दिया था। पिछले 50 साल में बांग्लादेश विकास की राह पर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, जो बाकी दुनिया के लिए एक प्रेरणा का विषय है। उन्होंने भारतीय सेना के हर उस सैनिक के शौर्य, पराक्रम और बलिदान को नमन किया, जिनकी वजह से 1971 के युद्ध में भारत ने विजय हासिल की। ये देश उन सभी वीरों के त्याग और बलिदान का सदैव ऋणी रहेगा।

पढ़ें :- Uttarakhand Assembly Election 2022 : आगामी विधान सभा चुनाव को देखते हुए भाजपा शीर्ष नेताओं ने झोंकी ताकत

और पढ़ें:

Jaipur Congress Rally: मैं हिंदू हूं, लेकिन हिंदुत्ववादी नहीं- राहुल गांधी

इन टॉपिक्स पर और पढ़ें:
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook, YouTube और Twitter पर फॉलो करे...