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हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के पहले सुपरस्टार थे कुंदनलाल सहगल

हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के पहले सुपरस्टार थे कुंदनलाल सहगल

बाबुल मोरा नैहर छूटो ही जाएः हिंदी फिल्म उद्योग के पहले सुपरस्टार अभिनेता और गायक कुंदनलाल सहगल का महज 43 साल की उम्र में 18 जनवरी 1947 को जालंधर में निधन हो गया। अपने दो दशक के सिने करियर में उन्होंने 36 फिल्मों में अभिनय किया जिसमें करीब 185 गीत

दुनिया का सबसे बड़ा सीरियल किलर, जिसे आज भी लोग डॉक्टर डेथ के नाम से पहचानते हैं

दुनिया का सबसे बड़ा सीरियल किलर, जिसे आज भी लोग डॉक्टर डेथ के नाम से पहचानते हैं

आज के इतिहास में आज हम बात कर रहे हैं एक ऐसा डॉक्टर जो अपने मरीजों में जिंदगी नहीं, मौत बांटने के लिए कुख्यात था। ऐसा दरिंदा जो मां की मौत के बाद अपने अस्पताल में आने वाली बुजुर्ग महिला मरीजों को बिना किसी वजह के मौत के घाट उतार

शास्त्रीय गायन में इस दिग्गज ने संगीत की पूरी धारा को किया था प्रभावित

शास्त्रीय गायन में इस दिग्गज ने संगीत की पूरी धारा को किया था प्रभावित

एक दैदीप्यमान स्वर : शास्त्रीय गायन में अनेकानेक दिग्गज हुए जिन्होंने न केवल संगीत की पूरी धारा को प्रभावित किया बल्कि किसी खास कालखंड का प्रतिनिधित्व किया। ऐसे ही दिव्य सांस्कृतिक विभूति के रूप में रेखांकित किये गए हिंदुस्तानी और कर्नाटक संगीत के माहिर गायक पंडित कुमार गंधर्व। निर्गुन गायन

इस भारतीय पीएम के कहने पर देशवासियों ने छोड़ दिया था सप्ताह में एक वक्त का भोजन

इस भारतीय पीएम के कहने पर देशवासियों ने छोड़ दिया था सप्ताह में एक वक्त का भोजन

जिनके कहने पर देश ने सप्ताह में एक वक्त का भोजन छोड़ दिया: 1965 की लड़ाई के दौरान भारत पर दबाव बनाने की मंशा से तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति लिंडन जानसन ने धमकी का दांव चला। उन्होंने भारतीय प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को कहा कि अगर पाकिस्तान के खिलाफ लड़ाई बंद

जानें एक ऐसे राजा के बारे में जिसने अंग्रेजों की नाक में दम करके रख दिया था, आजादी के संघर्ष में उनका अहम योगदान रहा

जानें एक ऐसे राजा के बारे में जिसने अंग्रेजों की नाक में दम करके रख दिया था, आजादी के संघर्ष में उनका अहम योगदान रहा

फांसी के समय भी देश के लिए लड़ने का आह्वानः आजादी का अमृत महोत्सव राष्ट्रीय स्वाधीनता के लिए बलिदान होने वाले रणबांकुरों को याद करने का भी मौका है। सच ये है कि ऐसे शहीदों को इतिहास ने उनकी गरिमा के अनुरूप याद नहीं किया। ऐसे ही एक मातृभूमि-भक्त थे

ऐसा वैज्ञानिक जिसने अपने समय में ऐसी भविष्यवाणियां कीं, जो सौ वर्षों बाद सही साबित हुई

ऐसा वैज्ञानिक जिसने अपने समय में ऐसी भविष्यवाणियां कीं, जो सौ वर्षों बाद सही साबित हुई

ऐसा वैज्ञानिक जिसने मानव इतिहास को बदल दियाः एक ही समय में भूत, भविष्य और वर्तमान को देखने वाला ऐसा वैज्ञानिक जिसने अपने समय में ऐसी हैरतअंगेज भविष्यवाणियां कीं, जो सौ वर्षों बाद सही साबित हुई। इस वैज्ञानिक ने खुद कई ऐसी खोजें कीं जो मानव के बौद्धिक समृद्धि की

अयोध्या में चरम तनाव के वक्त कल्याण सिंह ने कहा था कि रामलला के लिए अगले कई जन्म जेल में रहने के लिए तैयार हूं

अयोध्या में चरम तनाव के वक्त कल्याण सिंह ने कहा था कि रामलला के लिए अगले कई जन्म जेल में रहने के लिए तैयार हूं

जब कल्याण ने कहा, रामलला के लिए अगले कई जन्म जेल में रहने को तैयार हूंः 6 दिसंबर 1992 को ढलती हुई सर्द शाम तक अयोध्या में विवादित ढांचे का आखिरी हिस्सा भी ध्वस्त हो जाने की प्रामाणिक खबरें लखनऊ और दिल्ली तक पहुंच चुकी थीं। तनाव चरम पर था।

आजाद भारत में जब चुनाव हुआ तो किसने संभाली थी इसकी पूरी जिम्मेदारी

आजाद भारत में जब चुनाव हुआ तो किसने संभाली थी इसकी पूरी जिम्मेदारी

भारतीय लोकतंत्र का अहम चेहराः भारतीय सिविल सेवा के अधिकारी सुकुमार सेन की बदौलत भारतीय नागरिक पहली बार मताधिकार का इस्तेमाल कर पाए। 2 जनवरी 1899 को बंगाल में पैदा हुए सुकुमार सेन भारत के पहले चुनाव आयुक्त थे, जिन्होंने 25 अक्टूबर 1951 से फरवरी 1952 तक पहला आम चुनाव

फिल्मी दुनिया में किस संगीतकार को कहा जाता है शहंशाह-ए-तरन्नुम, पद्मश्री से हैं सम्मानित

फिल्मी दुनिया में किस संगीतकार को कहा जाता है शहंशाह-ए-तरन्नुम, पद्मश्री से हैं सम्मानित

…ये दुनिया, ये महफिल मेरे काम की नहीं : हिंदी सिनेमा के श्रेष्ठ गायकों में शुमार और अपने चाहने वालों के बीच शहंशाह-ए-तरन्नुम का मान पाने वाले मोहम्मद रफी का जन्म 24 दिसंबर 1924 को अमृतसर के करीब कोटला सुल्तान सिंह में हुआ था। कशिश भरी आवाज के साथ सादगी भरा

खौफनाक अग्निकांड : महज 7 मिनट चली गई थी 442 लोगों की जान

खौफनाक अग्निकांड : महज 7 मिनट चली गई थी 442 लोगों की जान

रुह कंपा देने वाले वे 7 मिनटः 23 दिसम्बर 1995 को हरियाणा के डबवाली (1995 Dabwali fire accident) के एक स्कूल में हुए अग्निकांड ने पूरे देश को सन्न कर दिया था। इस भयावह घटना को कभी भूला नहीं जा सकता, हालांकि कोई इसे याद नहीं करना चाहता। इस खौफनाक

India Voice

दो बोगियों की रेलगाड़ी से शुरू हुआ था भारतीय रेल का सफर

भारत की पहली मालगाड़ी देखने उमड़ पड़ी थी भीड़ः 16 अप्रैल 1853 में मुंबई से ठाणे के बीच चली रेल, भारत की पहली यात्री गाड़ी थी लेकिन इससे करीब दो साल पहले 22 दिसंबर 1851 को भारतीय रेल का सफर, एक मालगाड़ी से शुरू हो चुका था। दो बोगियों वाली

जानें कब मतदाता की उम्र 21 से घटाकर हुई थी 18?

जानें कब मतदाता की उम्र 21 से घटाकर हुई थी 18?

मतदान की आयु घटकर 18 सालः भारतीय मतदान प्रक्रिया में सुधारवादी कदम के लिहाज से 21 दिसम्बर महत्वपूर्ण तिथि है। साल 1988 में आज के दिन ही संसद ने 62वें संविधान संशोधन के जरिये मतदान की उम्र 21 वर्ष से घटाकर 18 साल करने संबंधी विधेयक को मंजूरी दी। जनता

जानें किन शूरवीरों ने भारतीय स्वतंत्रता के लिए लूटा था ब्रिटिश सरकार का खाजना? पढ़ें आगे

जानें किन शूरवीरों ने भारतीय स्वतंत्रता के लिए लूटा था ब्रिटिश सरकार का खाजना? पढ़ें आगे

यह तिथि भी पवित्र हो गईः इतिहास में ऐसा कुछ खास होता है, जिसके कारण किसी दिन अथवा तारीख को भी विशेष तौर पर याद किया जाता है। ऐसी ही तिथि 19 दिसंबर,1927 की है। उस दिन भारत मां के तीन लाडले फांसी पर चढ़ा दिए गए। विदेशी सरकार ने

इतिहास के पन्नों में 18 दिसंबर : खेतों में उगी थी हथियारों की फसल

इतिहास के पन्नों में 18 दिसंबर : खेतों में उगी थी हथियारों की फसल

खेतों में उगी थी हथियारों की फसलः पश्चिम बंगाल के पुरुलिया से जन्मी एक पहेली आजतक अनसुलझी है, जिसे पुरुलिया आर्म्स ड्रॉप केस के नाम से जाना जाता है। घटना के समय इसे लेकर विवादों का तूफान उठ खड़ा हुआ था। सरकार भी घटना से सकते में थी। इस सनसनीखेज

फांसी के दिन भी इस महान स्वतंत्रता सेनानी ने किया था व्यायाम

फांसी के दिन भी इस महान स्वतंत्रता सेनानी ने किया था व्यायाम

जिस दिन फांसी, उस सुबह भी व्यायामः महान युवा क्रांतिकारी राजेंद्र नाथ लाहिड़ी को काकोरी कांड में संलिप्तता का दोषी करार देते हुए ब्रिटिश हुकूमत ने निर्धारित तारीख से भी दो दिन पहले 17 दिसम्बर 1927 को गोंडा के जिला कारागार में फांसी दे दी। बंगाल (अब बांग्लादेश) के पबना