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सरदार पटेल के आग्रह पर पंजाब के पहले मुख्यमंत्री बनने वाले डॉ. गोपीचंद भार्गव का आज ही के दिन हुआ था जन्म

सरदार पटेल के आग्रह पर पंजाब के पहले मुख्यमंत्री बनने वाले डॉ. गोपीचंद भार्गव का आज ही के दिन हुआ था जन्म

सरदार पटेल के आग्रह पर जो मुख्यमंत्री बने: गांधी स्मारक निधि के प्रथम अध्यक्ष रहे स्वतंत्रता सेनानी डॉ. गोपीचंद भार्गव ने लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल के अनुरोध पर संयुक्त पंजाब के प्रथम मुख्यमंत्री का पद स्वीकार किया। 8 मार्च 1889 में हिसार जिले में पैदा हुए गांधीवादी नेता डॉ.

Valentine’s Day के अलावा भी क्यों जानना चाहिए 14 फ़रवरी के बारे में, जानिये कई वजहें

Valentine’s Day के अलावा भी क्यों जानना चाहिए 14 फ़रवरी के बारे में, जानिये कई वजहें

गांधीवादी मालवीय जी ने क्रांतिकारियों को असाधारण बताया: पिछले कुछ समय से 14 फरवरी वैलेंटाइंस डे के रूप में मनाया जाता है। इसके विपरीत बहुत कम लोग जानते हैं कि यह दिन हमारे देश की आजादी के लिए मातृभूमि के चरणों में बलिदान होने वालों का भी है। ऐसे क्रांतिकारी,

आज ही के दिन हुआ था आज़ादी के क्रांतिकारी और 80 किताबों के लेखक मन्मथनाथ गुप्त का जन्म

आज ही के दिन हुआ था आज़ादी के क्रांतिकारी और 80 किताबों के लेखक मन्मथनाथ गुप्त का जन्म

आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष में क्रांतिकारी मन्मथनाथ गुप्त को याद करने का विशेष महत्व है। माना कि 07 फरवरी,1908 को उनका जन्मदिन होने के कारण इस सम्बंध में यह तिथि विशेष है किंतु स्वयं मन्मथनाथ गुप्त का जीवन हर भारतवासी के लिए प्रेरक हो सकता है। स्वतंत्रता संघर्ष के

आज ही के दिन दुर्घटनाग्रस्त हुआ था अंतरिक्ष से धरती पर आ रहा कल्पना चावला का स्पेस शिप

आज ही के दिन दुर्घटनाग्रस्त हुआ था अंतरिक्ष से धरती पर आ रहा कल्पना चावला का स्पेस शिप

पलभर में खत्म हो गया था सपनों का सफर : ‘मैं अंतरिक्ष के लिए ही बनी हूं। हर पल अंतरिक्ष के लिए ही बिताया है, इसी के लिए मरूंगी।’- भारतीय मूल की पहली अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला ने अपने कहे के मुताबिक अंतरिक्ष की उड़ान में अपना जीवन होम कर

औरंगजेब की नींद उड़ा देने वाले संभाजी का आज ही के दिन हुआ था राज्याभिषेक

औरंगजेब की नींद उड़ा देने वाले संभाजी का आज ही के दिन हुआ था राज्याभिषेक

छत्रपति शिवाजी की अमर कहानियों के बीच उनके पुत्र और रायगढ़ के शासक संभाजी की वीरता भुला दी जाती है। आज 16 जनवरी को याद करना प्रासंगिक होगा कि आज ही के दिन संभाजी महाराज का राज्याभिषेक हुआ था। सूबे के प्रति समर्पण ऐसी कि औरंगजेब ने रायगढ़ पर कब्जे

क्या आपको मालूम है आज के दिन क्यों मनाया जाता है सेना दिवस?

क्या आपको मालूम है आज के दिन क्यों मनाया जाता है सेना दिवस?

साहस व शौर्य के पुण्य स्मरण का दिनः देश 15 जनवरी को हर वर्ष सेना दिवस मनाता है, जो थल सेना के अदम्य साहस का स्मरण का दिन है। इस दिन दिल्ली के सेना मुख्यालय के साथ-साथ देश के हर हिस्से में सैन्य संस्थानों में कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता

कभी लाईब्रेरियन तो कभी कार्टूनिस्ट से फिल्म दुनिया तक का सफर तय किया इस महान फिल्मकार ने

कभी लाईब्रेरियन तो कभी कार्टूनिस्ट से फिल्म दुनिया तक का सफर तय किया इस महान फिल्मकार ने

कैमरे में मध्यमवर्ग का चेहरा गढ़ने वाला फिल्मकारः उनकी फिल्मों की कहानियां आम जिंदगी के इतने करीब थी कि उसके फिल्मी होने को लेकर शक पैदा होने लगे। नायक का चेहरा-मोहरा और ढंग-ढर्रे ऐसा कि उस दौर का हर मामूली नौजवान उससे जुड़ा हुआ महसूस करता था। बासु चटर्जी की

“कुछ सुखों की इच्छा ही मेरे दुखों का कारण है” जानें उस लेखक के बारे में जिसे पूरी दुनिया में मिली अभूतपूर्व शौहरत

“कुछ सुखों की इच्छा ही मेरे दुखों का कारण है” जानें उस लेखक के बारे में जिसे पूरी दुनिया में मिली अभूतपूर्व शौहरत

इच्छा आधा जीवन और उदासीनता आधी मौतः वह लेखक जो अपनी सूक्तियों के लिए दुनिया भर में जाना गया। हम बात कर रहे हैं खलील जिब्रान की जिनकी सूक्तियां पूरी दुनिया में विचारों के रूप में सुगंध बिखेर रही है- उत्कंठा ज्ञान की शुरुआत है। लेबनानी-अमेरिकी कवि, लेखक और आर्टिस्ट

अयोध्या में चरम तनाव के वक्त कल्याण सिंह ने कहा था कि रामलला के लिए अगले कई जन्म जेल में रहने के लिए तैयार हूं

अयोध्या में चरम तनाव के वक्त कल्याण सिंह ने कहा था कि रामलला के लिए अगले कई जन्म जेल में रहने के लिए तैयार हूं

जब कल्याण ने कहा, रामलला के लिए अगले कई जन्म जेल में रहने को तैयार हूंः 6 दिसंबर 1992 को ढलती हुई सर्द शाम तक अयोध्या में विवादित ढांचे का आखिरी हिस्सा भी ध्वस्त हो जाने की प्रामाणिक खबरें लखनऊ और दिल्ली तक पहुंच चुकी थीं। तनाव चरम पर था।

सेवानिवृत्त होने के बाद न्यूटन ने खोजा था गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत

सेवानिवृत्त होने के बाद न्यूटन ने खोजा था गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत

गुरुत्वाकर्षण और पेड़ से सेव गिरने की घटनाः गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत और गति के नियम प्रतिपादित करने वाले इंग्लैंड के महान भौतिकी विज्ञानी, गणितज्ञ और दार्शनिक सर आइजक न्यूटन का जन्म 4 जनवरी 1643 में हुआ था। गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत को प्रतिपादित करने के संदर्भ में न्यूटन के सामने पेड़

सावित्रीबाई फुले, जिन्होंने लोगों के पत्थर और गन्दगी का जवाब शिक्षा के सन्देश से दिया

सावित्रीबाई फुले, जिन्होंने लोगों के पत्थर और गन्दगी का जवाब शिक्षा के सन्देश से दिया

स्त्री अधिकारों और शिक्षा को लेकर नई सामाजिक चेतना जगाने वाली भारत की प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई ज्योतिराव फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र के सतारा जिला स्थित नायगांव में हुआ था। महज नौ वर्ष की आयु में ज्योतिराव गोविंदराव फुले से उनका विवाह हो गया। इसके बाद

आखिर कब से 1 जनवरी को मनाया जाता है नया साल, पढ़ें आगे

आखिर कब से 1 जनवरी को मनाया जाता है नया साल, पढ़ें आगे

सिर्फ 440 साल पुरानी है यह परिपाटी: अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से जब हम आज नया वर्ष शुरू कर रहे हैं, यह जानना रोचक है कि भारतवर्ष के विभिन्न हिस्सों में वर्ष- गणना इसके मुकाबले अति प्राचीन और वैज्ञानिक है। हिन्दू पंचाग के अनुसार चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को साल

हिंदी जगत के महान कवि और ग़ज़लकार दुष्यंत कुमार ने दुनिया को आज कहा था अलविदा

हिंदी जगत के महान कवि और ग़ज़लकार दुष्यंत कुमार ने दुनिया को आज कहा था अलविदा

मैं सजदे में नहीं था आपको धोखा हुआ होगाः जिनकी शायरी आज भी नारे की तरह इस्तेमाल होती है। जिनके शेर इंक़लाब का सबब बने। जिनके लेखन ने बेलगाम सत्ता के ख़िलाफ़ प्रतिरोध को स्वर दिया। हम बात कर रहे हैं हिंदी के उस महान शायर दुष्यंत कुमार की, जिन्हें

इस लेखक को मराठी के राजनीतिक उपन्यास का जनक कहा जाता है, पढ़ें इनके बारे में

इस लेखक को मराठी के राजनीतिक उपन्यास का जनक कहा जाता है, पढ़ें इनके बारे में

गजानन त्र्यंबक माडखोलकरः पत्रकारिता हो अथवा साहित्यिक रचना-संसार, यह नाम मराठी जगत में बहुश्रुत और बहुचर्चित है। फिर देश के स्वाधीनता आंदोलन और संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन में उनकी प्रमुख भागीदारी इतिहास-विज्ञ है। तत्कालीन बंबई (अब मुंबई) में 28 दिसंबर, 1900 को पैदा हुए गजानन त्र्यंबक माडखोलकर को इस अर्थ में

जानें क्या था मिर्ज़ा ग़ालिब का असल नाम

जानें क्या था मिर्ज़ा ग़ालिब का असल नाम

कहते हैं कि ग़ालिब का है अंदाज़-ए-बयां औरः उर्दू और फारसी के सर्वकालिक मक़बूल शायर मिर्ज़ा ग़ालिब का जन्म 27 दिसंबर 1796 को आगरा में हुआ। उनका असल नाम मिर्ज़ा असदुल्लाह बेग ख़ान था, जिन्हें फ़ारसी शायरी की लयबद्धता और उसकी गति को हिंदुस्तानी जबान में लोगों तक पहुंचाने का