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Uttarakhand : देवस्थानम बोर्ड को लेकर राज्य सरकार की मुश्किलें बढ़ीं, पुरोहित तेज करेंगे अपना आंदोलन

उन्होंने साफ़ किया है कि उनका आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है. साथ ही उनका अब यह कहना है कि जब तक उनकी मांग नहीं मान ली जाती तब तक यह आंदोलन खत्म होगा भी नहीं।

By इंडिया वॉइस 
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उत्तराखंड, 09 नवंबर – देवभूमि उत्तराखंड में ‘देवस्थानम बोर्ड’ को लेकर ‘तीर्थ पुरोहितों’ की नाराजगी फिलहाल तो खत्म होती नज़र नहीं आ रही है. उन्होंने साफ़ किया है कि उनका आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है. साथ ही उनका अब यह कहना है कि जब तक उनकी मांग नहीं मान ली जाती तब तक यह आंदोलन खत्म होगा भी नहीं।

आपक बता दें कि उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में अब मात्र कुछ ही हफ्तों का समय बाकी है और ‘देवस्थानम बोर्ड’ का मुद्दा विकराल होता जा रहा है। एक तरफ उत्तराखंड की धामी सरकार इस बोर्ड को भंग करने की मांग पर एक उच्च स्तरीय कमेटी बना चुकी है और वादा भी कर चुकी है कि 30 नवंबर तक किसी भी हालात में इस मामले का हल निकाल लिया जाएगा। लेकिन वहीं इस मामले में ‘चार धाम पुरोहितों’ ने यह तय कर लिया है कि वो बोर्ड को भंग करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे।

‘पुरोहित’ क्यों नहीं कर रहे सरकार पर भरोसा

आपको बता दें कि ‘चार धाम’ समेत राज्य के प्रमुख करीब ’51 मंदिरों’ के प्रशासन के लिए बनाए गए ‘देवस्थानम बोर्ड’ को लेकर लंबे समय से पुरो​हित व पंडा समुदाय विरोध दर्ज करवा रहे हैं। उनका कहना है कि यह बोर्ड एक्ट परंपराओं के खिलाफ है। लंबे समय से चल रहे गतिरोध के कारण अब पुरोहित समुदाय सरकार के आश्वासन को मानने के मूड में भी नहीं है और यह माना जा रहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव के लिए सरकार इस मुद्दे को जितना हो सके, टालना चाह रही है. यही कारण है कि ‘देवभूमि के पुरोहित’ अपना आंदोलन जारी रखने का ऐलान कर रहे हैं।

उत्तराखंड में क्यों बन रहा है बड़ा मुद्दा

आपको बता दें कि प्रदेश के कुल 9 विधानसभा सीटों पर पुरोहित समुदाय का अच्छा खासा प्रभाव है. जिसमें बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, देवप्रयाग, श्रीनगर समेत गढ़वाल अंचल मुख्य रूप से शामिल है. यही कारण है कि प्रदेश की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी की सरकार ‘पुरोहितों’ की नाराज़गी मोल लेकर आगामी 2022 विधानसभा चुनाव के मैदान में उतरने का जोखिम उठाना नहीं चाहेगी। यही एक बड़ा कारण है जिसके लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत कई नेता पुरोहितों को मनाने में जुटे हुए हैं. आपको बता दें कि ‘प्रदेश में भाजपा के नेताओं से लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तक पुरोहित समाज से मुलाकात कर चुके हैं।

 

पुरोहितों का आरोप ‘राज्य सरकार कर रही है जानबूझकर देरी

इस मामले में ‘चार धाम’ के ‘पुरोहितों’ ने आरोप लगाया है कि लंबे समय से मांग और विरोध चलने के बावजूद राज्य सरकार जानबूझकर इस मामले में देर करने की तरकीबें अपना रही है। आपको बता दें कि इस मामले में चार धाम पंचायत के ‘बृजेश साई’ ने ईटी से बातचीत में कहा कि ‘हम उन जगहों पर भी अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे, जहां पर ‘चार धाम’ यात्रा संपन्न होने के बाद शीतकाल के दौरान पूजा प्रार्थना की जाएगी। उन्होंने कहा कि ‘हम जल्द ही चार धाम महापंचायत की बैठक बुलाकर इस मामले में आगे की रणनीति भी तय करेंगे’। सिर्फ इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि हमारी यह भी योजना है कि गांवों तक आंदोलन को पहुंचाया जाए।

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