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लखीमपुर हिंसा- मृत किसानों को यूपी की सरकार से ज्यादा मुआवजा दे रही पंजाब और छत्तीसगढ़ की सरकार

लखीमपुर हिंसा में सभी पार्टियां अपने अपने उल्लू सीधे करने पहुंच गई है। पंजाब और छत्तीसगढ़ के सीएम खुद के राज्य के किसानों से ज्यादा यूपी के किसानों के हितैशी बनकर सामने आ रहे हैं।

By इंडिया वॉइस 
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लखीमपुर में भड़की हिंसा को सभी पार्टियां भुनाने में जुट गई हैं। देश के बड़े नेता इन दिनों अपने राज्यों से ज्यादा यूपी के किसानों की चिंता में करते नजर आ रहें हैं। इसका जीता जागता उदाहरण ये हैं कि जहां यूपी की सरकार मृत किसानों के परिजनों को 45 लाख रुपये और किसी एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी देने का वायदा किया है, तो वहीं पंजाब के सीएम चरणजीत सिंह चन्नी व छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बेघल ने 50-50 लाख की राशि मुआवजे के रूप में देने की बात कही है।

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लखीमपुर हिंसा में आठ लोगों के मरने की पुष्टि हुई, जबकि कई लोगों घायल हुए हैं। इस हिंसा पर यूपी की प्रदेश सरकार ने सभी मृत किसानों के परिजनों को 45-45 लाख रुपये बतौर मुआवजे के रुप में देने की बात कही है। इसके अलावा मृतकों के परिवार में से किसी एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी भी दी जाएगी। इसके साथ ही घायलों को 10-10लाख रुपये दिये जाएंगे। कुछ किसानों के परिजनों को मुआवजे की रकम दी भी जा चुकी है। प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि बहराइच के किसानों के चेक दिये जा चुके हैं। जबकि अन्य की राशि भी जल्द दे दी जाएगी।

आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने लखीमपुर हिंसा में मृत किसानों के परिजनों को 50-50 लाख रूपये देने की बात कही है। जबकि उनके राज्य के कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने फरवरी माह विधानसभा में बताया था कि उनके राज्य में पिछले 10 माह में करीब 141 किसानों ने आत्महत्या की है। इस विषय पर छत्तीसगढ़ के विपक्षी दलों ने उनकी सरकार का घेराव भी किया था। जबकि सीएम बेघल अपने राज्य के किसानों से ज्यादा यूपी के किसानों के सहानुभूति दिखाते नजर आ रहे हैं।

हिंसा में घायल लोगों के नाम

गुरविन्दर सिंह – आयु 18

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दलजीत सिंह – आयु 35

नक्षत्र सिंह – आयु 55

लवप्रीत सिंह – आयु 20

रमन कश्यप – आयु 35

हरिओम मिश्रा (कार ड्राइवर)

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श्याम सुंदर निषाद (मंडल मंत्री सिंगाही) – आयु 32

शुभम मिश्रा (बूथ अध्यक्ष लखीमपुर) – आयु 26

कौन हैं रमन कश्यप

रमन कश्यप 35 वर्षीय साधना न्यूज चैनल में बतौर तहसील रिपोर्टर के पद पर कार्यरत थे। हिंसा के समय वह किसानों का प्रदर्शन कवर कर रहें थे। लेकिन जब गाड़ी ने किसानों को रौंदने लगी तो वह भी उसकी चपेट में आ गए। हादसे के बाद उनके पिता रामदुलारे ने उनके शव की पहचान की।

गुरविंदर 

लखीमपुर खीरी हिंसा में बहराइच जनपद के मोहनिया गांव निवासी गुरविंदर (20 साल) की भी मृत्यु हो गई थी। गुरविंदर के पिता सुखविंदर बताते हैं कि 16 साल की उम्र में ही शांति की तलाश में गुरविंदर अपने घर से दूर खेत में कुटिया बनाकर रहने लगे थे। तीन भाई बहनों में गुरविंदर सबसे छोटे थे। उनका पुश्तैनी घर बंटवारे में पाकिस्तान के लाहौर में चल गया था. इसके बाद उनका परिवार पंजाब के मुक्तरस जनपद में रहना लगा। सबसे पहले गुरविंदर के ताऊ सुखदेव सिंह 2015 में मोहनिया आए। इसके बाद गुरविंदर के पिता ने भी यही अपना घर बना लिया।

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गुरविंदर के साथ किसान आंदोलन में शामिल होने वाले साहब सिंह ने बताया कि किसानों के खिलाफ टेनी के बयान पर हर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने गए थे। लेकिन पीछे से आई मंत्रियों की गाड़ियों के आते ही प्रशासन किनारे हो गया और गाड़ियां लोगों को कुचलते हुए आगे निकल गई।

लखीमपुर में जान गंवाने वाले लवप्रीत चौकरा फार्म इलाके के रहने वाले थे। हिंसा के बाद लवप्रीत को अस्पताल ले जाने वाले सिमरनजीत सिंह ने बताया की घटनास्थल में घायल होने के बाद लवप्रीत बोल रहे थे कि मेरी दो बहनें हैं, हम बहुत गरीब है मेरी जान बचा लो। लेकिन अस्पताल से कुछ किलोमीटर की दूरी पर ही उन्होंने दम तोड़ दिया।

दलजीत सिंह

लखीमपुर हिंसा में मृत किसान दलजीत सिंह नानपारा कोतवाली के बंजारन टांडा के रहने वाले थे। दलजीत सिंह का एक 15 वर्षीय बेटा राजदीप सिंह व बेटी परनीत कौर हैं। दलजीत के बेटे ने बताया कि वह अपने पिता के साथ किसान आंदोलन में गए थे, वहां पर पीछे से आईं कार ने उनके पिता सहित कई लोगों को रौंद दिया।

हरिओम (आशीष मिश्रा का ड्राइवर)

लखीमपुर हिंसा में आरोपी आशीष मिश्रा की गाड़ी चलाने वाले ड्राइवर मृतक हरिओम अपने परिवार में कमाई करने वाले एक ही शख्स थे। उनका परिवार हिंसास्थल से करीब 100 किलोमीटर दूर फरधान के परसेहरा बुजुर्ग नामक गांव में रहता है। हरिओम के परिवार में पांच भाई बहन थे, उनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, साथ ही उनके पिता का स्वास्थ्य भी कई वर्षों से खराब है। इसके अलावा उन्होंने अपनी बहन की शादी के लिए कर्जा भी ले रखा था। कुल मिलाकर कमाई की पूरी जिम्मेदारी हरिओम के कंधों पर ही थी।

श्याम सुंदर निषाद (मंडल मंत्री सिंगाही)

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श्याम सुंदर निषाद सिंगाही थाने के सिंगहा कला गांव के रहने वाले थे। उनके भाई संजय निषाद ने बताया कि सुंदर के परिवार में उनकी पत्नी और दो बेटियां हैं। वह दंगल में प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को लेने के लिए निकले थे। लेकिन रास्ते में ही उनके साथ ये हादसा हो गया।

शुभम मिश्रा (बूथ अध्यक्ष लखीमपुर)

लखीमपुर हिंसा के दौरान शुभम मिश्रा थार जीप के पीछे बैठे थे। हिंसा के दौरान लोगों ने उनको पीट पीटकर इतना मारा की उनकी मृत्यु हो गई। उनके घर में माता-पिता, पत्नी और एक बेटी है। शुभम के परिवार के लोगों ने बताया कि घटना के दिन शुभम दंगल देखने जाना नहीं चाहते थे, लेकिन उनके दोस्त के कहने पर वह चले गए। शाम को एक सूचना मिली की हिंसा में शुभग भी घायल हो गए हैं। जिसके बाद वह वापस नहीं आए।

 

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