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उत्तराखंड: गड़तांग गली में पहुंचने लगे पर्यटक, भाजपा नेता ने की मार्ग में रेलिंग लगाने की मांग !

भाजपा नेता लोकेंद्र ने बताया कि गड़तांग गली मार्ग बहुत खतरनाक है और इस रास्ते में कोई सार्वजनिक यातायात भी नहीं है।

By इंडिया वॉइस 
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उत्तरकाशी, 07 नवम्बर। समुद्रतल से 3200 मीटर की ऊंचाई गड़तांग गली वर्ल्ड हेरिटेज में शुमार है। भाजपा नेता लोकेंद्र सिंह बिष्ट ने जिला प्रशासन से गड़तांग गली के रास्ते में रेलिंग लगाने और जन सुविधाओं की मांग की है। भाजपा नेता लोकेंद्र ने बताया कि गड़तांग गली मार्ग बहुत खतरनाक है और इस रास्ते में कोई सार्वजनिक यातायात भी नहीं है। उन्होंने जिलाधिकारी उत्तरकाशी को पत्र लिखकर इस रास्ते पर रेलिंग लगाने और जन सुविधाओं की मांग जिला प्रशासन और सरकार से की है।

बिष्ट ने कहा कि मुख्यमंत्री रहते त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इसके पुनर्निर्माण का बीड़ा उठाया था। आज गड़तांग गली बनकर तैयार हो चुकी है। उन्होंने बताया कि गड़तांग गली का सफर बहुत ही रोमांचित, साहसिक, नैसर्गिक सौंदर्य से पूर्ण, देवदार के जंगलों से गुजरते हुए जब 300 साल पुराने गढ़तांग गली को देखने आजकल देशी-विदेशी पर्यटक पहुंचने लगे हैं।

प्रशासनिक आधार पर यह क्षेत्र गंगोत्री राष्ट्रीय पार्क के अंतर्गत आता है। गंगोत्री राष्ट्रीय पार्क की देखरेख में ही इस गड़तांग गली का पुनर्निर्माण हुआ और पार्क प्रशासन ही इसकी देखरेख करता है।

तीन सौ साल पहले बनाया गया था यह मार्ग

उत्तरकाशी जिले के भैरव घाटी यानी लंका पुल से 2 किलोमीटर पैदल चलने पर कठोर चट्टानों को काटकर इसके साथ लोहे- लकड़ी के प्रयोग से आज से 300 साल पहले आवागमन, व्यापार व सीमा की सुरक्षा चौकियों तक पहुंचने के लिए इस खतरनाक ट्रैक का प्रयोग किया जाता था। इसलिए इसका नाम गड़तांग गली है।

तिब्बत से आवागमन और व्यापार के लिए होता था इस्तेमाल

आज से करीब 300 साल पहले ये पैदल मार्ग ही तिब्बत तक जाने आने और व्यापार के लिए प्रयोग होता था, लेकिन समय के साथ-साथ सड़कों के निर्माण और आवागमन के दूसरे सुगम रास्तों के निर्माण के बाद गड़तांग गली वीरान हो गई। मार्ग के प्रयोग में न आने और मार्ग की नियमित देखभाल न होने से ये क्षतिग्रस्त हो गई थी, लेकिन आज के युग की ये एक ऐतिहासिक और रोमांचित करने वाली धरोहर है।

ऊंचे विशाल पत्थर को काटकर बना है यह पुल

गड़तांग गली को देखकर कल्पना करना भी दुष्कर हो जाता है कि किस तरह से इस कई सौ मीटर ऊंचे विशाल पत्थर जो कि वर्टिकल है यानी हैंगिंग कठोर पहाड़ को काट कर लकड़ी के पुल को इन कठोर चट्टानों पर लोहे के गार्डर, रॉड लगाकर देवदार के स्लीपर, तख़्तों को बिछाकर 130 मीटर लंबे ट्रैक को बनाया गया था। जबकि गहरी घाटी में जाट गंगा के बहाव को देखकर आज भी डर से रूह कांप जाती है। ये गड़तांग गली अकल्पनीय, अविश्वसनीय है और आश्चर्यजनक है।

उल्लेखनीय है कि उत्तरकाशी जिले की नेलांग घाटी में स्थित गड़तांग गली देशी-विदेशी पर्यटकों के दीदार के लिए तैयार हो चुकी है, लेकिन गड़तांग गली तक पहुंचने का 2 किलोमीटर पैदल रास्ता भी खतरनाक है। यह खड़ी चढ़ाई और बहुत ढलानदार है। इससे फिसलने पर 1000 मीटर गहरी खाई में गिर सकते हैं और बचने की कोई उम्मीद नही।

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