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केंद्रीय कैबिनेट का फैसला: स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 और अमृत मिशन 2.0 को मंजूरी

SBM-U 2.0 के लिए पहले मिशन से ढाई गुना अधिक 1,41,600 करोड़ रुपये का वित्तीय खर्च किया जाएगा। एसबीएम-यू 2.0 के लक्ष्यों में 1 लाख से कम जनसंख्या वाले सभी शहरों में मल-गाद प्रबंधन सहित खुले में शौच से मुक्ति शामिल है।

By इंडिया वॉइस 
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नई दिल्ली, 13 अक्टूबर। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार को स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 और अमृत-2.0 मिशन को साल 2025-26 तक जारी रखने की मंजूरी दी है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार को उक्त आशयों के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। जो हाल ही में प्रधानमंत्री ने एक कार्यक्रम में दोनों मिशन की शुरुआत की थी।

सरकारी जानकारी के मुताबिक केंद्रीय मंत्रिमंडल ने निरंतर अच्छे परिणाम देने वाले स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) (एसबीएम यू) को 2025-26 तक जारी रखने को मंजूरी दी है। एसबीएम-यू 2.0 के लिए पहले मिशन से ढाई गुना अधिक 1,41,600 करोड़ रुपये का वित्तीय खर्च किया जाएगा। एसबीएम-यू 2.0 के लक्ष्यों में 1 लाख से कम जनसंख्या वाले सभी शहरों में मल गाद प्रबंधन सहित खुले में शौच से मुक्ति शामिल है। सीवर और सेप्टिक टैंकों में खतरनाक पदार्थों के प्रवाह पर रोक लगाई जाएगी। जल स्त्रोतों में अशोधित अपशिष्ट जल को प्रवाहित करने की मनाही होगी। सभी शहरों को कम से कम 3-स्टार गारबेज मुक्त प्रमाणन हासिल करना होगा।

दूसरे फैसले में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नवीकरण और शहरी परिवर्तन के लिए अटल मिशन – ‘अमृत 2.0’ को 2025-26 तक के लिए मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य शहरी परिवारों को विश्वसनीय और सस्ती जलापूर्ति और स्वच्छता सेवाएं प्रदान करना है। अमृत 2.0 के लिए कुल सांकेतिक खर्च 2,77,000 करोड़ रुपये है। अमृत 2.0 का लक्ष्य सभी 4,378 सांविधिक कस्बों में घरेलू नल कनेक्शन प्रदान करके पानी की आपूर्ति का सार्वभौमिक कवरेज हासिल करना है। 500 अमृत शहरों में घरेलू सीवर या सेप्टेज प्रबंधन का 100 प्रतिशत कवरेज लक्षित किया गया है। मिशन का लक्ष्य 2.68 करोड़ नल कनेक्शन और 2.64 करोड़ सीवर/सेप्टेज कनेक्शन प्रदान करना है ताकि अपेक्षित परिणाम मिले।

एक और फैसले में मंत्रिमंडल ने सैनिक स्कूल सोसाइटी के साथ सरकारी और निजी क्षेत्र के 100 विद्यालयों की सम्बद्धता को अनुमोदन प्रदान किया है। अकादमिक वर्ष 2022-23 से क्लास-VI में 5 हजार छात्रों को प्रवेश देने के लिए नए विद्यालय बनाए जायेंगे।

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