पश्चिम बंगाल में आज दूसरे चरण के तहत 142 विधानसभा सीटों पर मतदान शुरू हो गया है। राज्य की राजनीति में यह चरण बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इन सीटों का परिणाम सत्ता की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाता रहा है। सुबह से ही कई जिलों में मतदाताओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं, जो लोकतंत्र के इस महापर्व में बढ़-चढ़कर भागीदारी का संकेत दे रही हैं।
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अगर ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य पर नजर डालें, तो इन 142 सीटों पर लंबे समय तक वामपंथी दलों, खासकर Communist Party of India (Marxist) (CPM) का दबदबा रहा है। 1977 से लेकर 2011 तक पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चा का शासन रहा, और इन सीटों में से अधिकांश पर उनका मजबूत कब्जा था। ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में उनकी पकड़ खास तौर पर मजबूत मानी जाती थी।
हालांकि, 2011 में राजनीतिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव आया, जब Mamata Banerjee के नेतृत्व में All India Trinamool Congress (TMC) ने सत्ता में प्रवेश किया। इसके बाद से इन सीटों पर तृणमूल कांग्रेस का वर्चस्व लगातार बढ़ता गया। 2016 और 2021 के चुनावों में भी TMC ने इन क्षेत्रों में अच्छा प्रदर्शन करते हुए अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी।
दूसरी ओर, Bharatiya Janata Party (BJP) ने 2019 के लोकसभा चुनावों के बाद राज्य में अपनी स्थिति को तेजी से मजबूत किया। 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने इन 142 सीटों में से कई पर कड़ी टक्कर दी और कुछ इलाकों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। खासकर उत्तर और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में भाजपा का वोट शेयर उल्लेखनीय रूप से बढ़ा।
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इस बार का चुनाव मुकाबला त्रिकोणीय होता दिख रहा है, जहां TMC, BJP और वाम-कांग्रेस गठबंधन आमने-सामने हैं। TMC जहां अपने विकास कार्यों और कल्याणकारी योजनाओं के आधार पर वोट मांग रही है, वहीं BJP कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार के मुद्दों को लेकर आक्रामक है। दूसरी तरफ वाम-कांग्रेस गठबंधन अपने पारंपरिक वोट बैंक को वापस पाने की कोशिश में जुटा है।
मतदान के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। कई संवेदनशील बूथों पर केंद्रीय बलों की तैनाती की गई है ताकि निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित किया जा सके। चुनाव आयोग भी पूरी प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन 142 सीटों का परिणाम न सिर्फ सरकार के गठन को प्रभावित करेगा, बल्कि राज्य की भविष्य की राजनीति की दिशा भी तय करेगा। खास तौर पर यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या TMC अपना वर्चस्व बरकरार रख पाती है, या BJP और वाम गठबंधन मिलकर समीकरण बदलने में सफल होते हैं।
कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल का यह दूसरा चरण लोकतांत्रिक ऊर्जा और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है, जहां जनता का फैसला ही अंतिम होगा।
सपन दास
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