India-European Union : भारत के नए पृथ्वी अवलोकन उपग्रह ईओएस-05 के प्रक्षेपण के साथ भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच अंतरिक्ष सहयोग को नई गति मिलने की संभावना है। ब्रसेल्स सिग्नल में प्रकाशित जेवियर विलामोर के एक लेख के अनुसार, यह साझेदारी दोनों पक्षों की तकनीकी क्षमता, आपदा प्रबंधन और रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूत कर सकती है।
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लेख में कहा गया है कि करीब 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित ईओएस-05 पृथ्वी के साथ समकालिक कक्षा में काम करेगा। इससे एक बड़े भौगोलिक क्षेत्र पर लगातार निगरानी संभव होगी और चक्रवात, बाढ़, जंगल की आग, कृषि तथा तटीय गतिविधियों की अधिक बार और लंबे समय तक निगरानी की जा सकेगी। लेख के मुताबिक, भारत के लिए अपने उपग्रह, स्वदेशी लॉन्च सिस्टम और स्वयं अवलोकन तय करने की क्षमता का मतलब विदेशी सेवाओं पर कम निर्भरता है।
इसे भारत की तकनीकी संप्रभुता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया है। यूरोपीय संघ का अंतरिक्ष ढांचा भारत की तुलना में अधिक व्यापक और विविध है। यूरोप का कोपरनिकस कार्यक्रम सेंटिनल उपग्रहों के जरिए भूमि, महासागर और वायुमंडल की निगरानी करता है और रडार, ऑप्टिकल इमेजिंग, मौसम तथा वायुमंडलीय आंकड़ों को एकीकृत करता है, वहीं भारत अपनी महत्वपूर्ण अंतरिक्ष क्षमताओं को घरेलू स्तर पर विकसित करने की रणनीति पर आगे बढ़ रहा है।
लेख में कहा गया है कि भारत और यूरोप के मॉडल अलग होने के बावजूद प्रतिस्पर्धा और सहयोग दोनों के लिए जगह है। भारत लॉन्च व्हीकल, पृथ्वी अवलोकन, नेविगेशन, मानव अंतरिक्ष मिशन और भविष्य के अंतरिक्ष स्टेशन पर काम कर रहा है, जबकि यूरोप अपनी औद्योगिक स्वायत्तता और रणनीतिक परिसंपत्तियों को मजबूत बनाए रखना चाहता है। दोनों पक्षों के बीच सहयोग पहले से बढ़ रहा है।
दिसंबर 2024 में भारत ने पीएसएलवी-एक्सएल रॉकेट से यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) का प्रोबा-3 सौर मिशन लॉन्च किया था। इसके अलावा ईएसए और इसरो मानव व रोबोटिक अंतरिक्ष अन्वेषण, अंतरिक्ष यात्रियों के प्रशिक्षण, अंतरिक्ष संचालन और तकनीकी
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इंटरऑपरेबिलिटी जैसे क्षेत्रों में भी साथ काम कर रहे हैं। 10 सितंबर 2026 को पेरिस में हस्ताक्षरित पत्रों के आदान-प्रदान के जरिए भारत-ईयू अंतरिक्ष सहयोग समझौते को 8 जनवरी 2032 तक बढ़ा दिया गया। इसमें अंतरिक्ष मौसम और बाहरी अंतरिक्ष गतिविधियों की स्थिरता जैसे नए क्षेत्र भी शामिल किए गए हैं। लेख के अनुसार, 2018 से भारत के अंतरिक्ष विभाग और यूरोपीय आयोग के बीच कोपरनिकस तथा भारत के चुनिंदा नागरिक उपग्रहों के डेटा साझा करने का समझौता लागू है।
इसके तहत भारत को सेंटिनल उपग्रहों का डेटा मिलता है, जबकि यूरोप भारतीय नागरिक उपग्रहों के डेटा का उपयोग कर सकता है। हालांकि व्यावसायिक उच्च-रिजॉल्यूशन तस्वीरें इस व्यवस्था से बाहर हैं। लेख में कहा गया है कि इस साझेदारी का सबसे तत्काल लाभ आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में मिल सकता है। ईओएस-05 दक्षिण एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र की लगातार निगरानी करेगा, जबकि यूरोप रडार इमेजिंग, आपातकालीन मैपिंग, मल्टीस्पेक्ट्रल डेटा और विश्लेषण क्षमता से इसे पूरक बना सकता है।
इससे चक्रवात और बाढ़ जैसी आपदाओं के दौरान राहत और प्रतिक्रिया का समय कम हो सकता है। इसके अलावा, अंतरिक्ष निगरानी, संचार सुरक्षा और कक्षा में बढ़ते उपग्रहों के बीच टकराव से बचाव जैसे क्षेत्रों में भी भारत और यूरोपीय संघ सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं। (आईएएनएस)
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