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दुनिया के पांच बड़े आतंकी हमले, जिन्होंने कर दिया था इंसानियत को शर्मसार

आइये आपको बताते हैं मानवता पर कट्टरता के सबसे बड़े हमलों की पांच बड़ी घटनाएं, जिनसे पूरी इंसानियत को शर्मनाक होना पड़ा।

By इंडिया वॉइस 
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नई दिल्ली : आतंकवादी हमलों ने हर बार इंसानियत को शर्मसार किया है। ये हमले यह बताते हैं कि समाज जितना प्रगतिशील हुआ है इंसानों की कुछ कट्टर और हैवान ज़मातें इंसानियत को उतना ही पीछे ले जाना चाहती हैं, दुनिया के तमाम ताकतवर मुल्क आज भी इस समस्या से निजात पाने के लिए परेशान हैं। आइये आपको बताते हैं मानवता पर कट्टरता के सबसे बड़े हमलों की पांच बड़ी कहानियां, जिनसे पूरी इंसानियत को शर्मसार होना पड़ा।

 

9/11 आतंकी हमला

19 अल कायदा आतंकियों के द्वारा 4 पैसेंजर एयरक्राफ्ट हाईजैक किये गए थे और जानबूझकर उनमें से दो विमानों को आतंकवादियों के द्वारा वर्ल्ड ट्रेड सेंटर, न्यूयॉर्क शहर के ट्विन टावर्स के साथ टकरा दिया गया, जिससे विमानों पर सवार सभी लोग और बिल्डिंग के अंदर काम करने वाले हजारों लोग मारे गए थे। जिन विमानों से हमला किया गया उनकी रफ्तार करीब 98 7.6 किमी/घंटा से ज्यादा थी। दोनों इमारतें दो घंटे के अंदर पूरी तरह से ढह गई , पास की इमारतें भी नष्ट हो गईं और अन्य आसपास की इमारतें क्षतिग्रस्त हुईं।

इसके बाद आतंकवादियों ने तीसरे विमान को वाशिंगटन डीसी के बाहर वर्जीनिया में पेंटागन से टकरा दिया। अब बचा था चौथा विमान,  वाशिंगटन डीसी की ओर टारगेट किए गए इस चौथे विमान के कुछ यात्रियों एवं उड़ान चालक ने किसी तरह से प्लेन पर फिर से अपना नियंत्रण बनाया  लेकिन उसके बाद यह प्लेन ग्रामीण पेंसिल्वेनिया में शैंक्सविले के पास एक खेत में क्रैश होकर गिरा। हालांकि किसी भी उड़ान से कोई भी व्यक्ति जीवित नहीं बच सका। दिल दहला देने वाले इस आतंकी हमले में करीब 2977 लोगों की जान चली गयी थी।

 

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रूस बेसलैन में स्कूल हमला

रूस के बेसलैन स्कूल में हुए हमले को स्कूली बच्चों को निशाना बनाए जाने वाले हमलों में सबसे बड़े और क्रूर हमले के तौर पर जाना जाता है। यह हमला चेचेन के आतंकियों के द्वारा अंजाम दिया था। इस हमले को आतंकियों द्वारा आतंकवादियों के द्वारा 3 दिनों तक स्कूल में बच्चों समेत 1100 को बंधक बनाए रखा, और कोई उपाय ना मिलने के बाद स्कूल में मिलिट्री ऑपरेशन को अंजाम दिया गया था, जिसमें आतंकियों समेत कुल 385 लोगों की मौत हो गई और 783 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे।

 

26/11 मुंबई हमला

दरअसल 26 नवम्बर 2008 को आतंकवादियों नें मुंबई में देश को दहला देने वाले एक आतंकवादी हमले को अंजाम दिया था यह एक ऐसा दिन था, जब पूरा देश आतंकी हमले से सहम गया था, चारो तरफ दहशत और मौत दिखाई दे रही थी, यह मंजर इतना भयावाह था, जिसे कोई भी भारतीय नहीं भूल सकता यह आतंकवादी हमला लगातार तीन दिन तक चलता रहा, जिसमें 166 लोग मारे गये थे और 600 से अधिक घायल हुए थे, आतंकवादी समुन्द्र के रास्ते से मुंबई में दाखिल हुए, अचानक रात के लगभग साढ़े नौ बजे मुंबई के छत्रपति शिवाजी टर्मिनल पर गोलीबारी की ख़बर मिली। मुंबई के इस ऐतिहासिक रेलवे स्टेशन के मेन हॉल में दो आतंकवादी अजमल कसाब और स्‍माइल खान नें अंधाधुंध फ़ायरिंग शुरू कर दी।

यहाँ CCTV कैमरे में इन दोनों की इमेज कैद हुई, दोनों के हाथ में एके 47 थीं और पंद्रह मिनट में उन आतंकवादियों को करीब 52 लोगों को मौत के घाट उतार दिया और 109 को ज़ख़्मी कर दिया इसी तर्ज पर मुंबई में तीन दिन तक हमले चलते रहे और अंततः 29 नवंबर की सुबह तक नौ हमलावरों का NSG के जवानों के द्वारा सफाया हो चुका था और अजमल क़साब के तौर पर एक हमलावर पुलिस की गिरफ्त में था। बाद में उसे फांसी दे दी गयी।

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पाकिस्तान के पेशावर में स्कूल पर हमला

पाकिस्तान के पेशावर शहर में एक सैनिक स्कूल में तालिबान के हमले में 132 बच्चों समेत 140 से ज़्यादा लोग मारे गए थे। तालिबानी आतंकवादियों ने स्कूल की चारदीवारी से अंदर घुसकर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाई थीं। अपनी जान बचाने में कामयाब छात्रों ने इस दर्दनाक हमले का मंजर बयां करते हुए कहा था कि आतंकवादी एक कक्षा से दूसरी कक्षा में जाकर बच्चों को गोलियां मारते रहे। बच्चों को निशाना बनाने की इस घटना की दुनियाभर में निंदा हुई थी। बाद में पेशावर में हुए इस हमले की जिम्‍मेदारी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के प्रवक्ता मोहम्मद खुर्रासानी ने ली थी।

मोहम्मद ने बयान ज़ारी कर के कहा था कि सभी आतंकी आत्मघाती हमलावर हथियारों से लैस थे और उन्हें स्कूल पर हमले का आदेश दिया गया था। तहरीक-ए-तालिबान प्रवक्ता मोहम्मद खोरासनी ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया था कि उन्हें (आतंकियों) को गोलीबारी और आत्मघाती धमाके करने के लिए भेजा गया। इसके अलावा लड़ाकों को आदेश दिया था कि बड़े बच्चों को मार डालें, लेकिन छोटे बच्चों को न मारा जाए। खोरसानी के मुताबिक, “सेना द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन के खिलाफ यह हमला किया गया था।

 

फ़्रांस में आतंकी हमला

2015 में फ़्रांस की राजधानी को भी एक बार इस बड़ी समस्या से जूझना पड़ा था फ्रांस की राजधानी पेरिस में 14 नवंबर 2015 को नेशनल स्टेडियम के बाहर एक रेस्टोरेंट और कॉन्सर्ट हॉल में हुए आतंकी हमले में गोलीबारी और धमाकों से करीब 120 से ज्यादा लोग मारे गए थे। बैटाक्लां म्यूजिक हॉल में रॉक कॉन्सर्ट हो रहा था आतंकियों ने उन लोगों को ही अपना निशाना बनाया हथियारों से लैस आतंकियों ने 100 से ज्यादा लोगों को मौत के घाट उतार दिया। यह धमाका उस वक्त हुआ जब फ्रांस और जर्मनी के बीच नेशनल स्टेडियम में फुटबॉल मैच चल रहा था। इस हमलें में फ्रांस के सुरक्षाबलों ने जवाबी कारवाई में 8 आतंकियों को मार गिराया था। बाद में आतंकी संगठन आईएस ने इस हमले की जिम्मेदारी ली थी।

 

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