श्रीनगर की जामिया मस्जिद ने दिया एकता का संदेश, पहलगाम हमले के पीड़ितों को श्रद्धांजलि
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हाल ही में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को गहरे शोक में डाल दिया है। इस हमले में निर्दोष पर्यटक और स्थानीय नागरिक मारे गए, जिसके बाद श्रीनगर की ऐतिहासिक जामिया मस्जिद में एक अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिला। मस्जिद में मौजूद हजारों लोगों ने हमले के पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए एक मिनट का मौन रखा।
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इस मौन के जरिए न केवल मृतकों के प्रति सम्मान व्यक्त किया गया, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता और शांति का भी संदेश दिया गया। मौलवियों ने अपने संबोधन में कहा कि “हमें एक-दूसरे के दुख को समझते हुए, शांति और भाईचारे की राह पर चलना होगा। आतंकवाद के खिलाफ हमारी सबसे बड़ी ताकत हमारी एकता है।”
मस्जिद से उठा शांति का संदेश
जामिया मस्जिद केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि कश्मीर की सामाजिक चेतना का प्रतीक रही है। इस बार मस्जिद से उठी आवाज स्पष्ट थी- “आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता”। मौलवियों ने युवाओं से अपील की कि वे हिंसा के रास्ते से दूर रहें और समाज के विकास में योगदान दें।
उन्होंने यह भी कहा कि कश्मीर हमेशा से शांति, सूफीवाद और सहिष्णुता की धरती रही है और इस धरोहर को बचाए रखने के लिए हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
घाटी में शोक और आक्रोश का माहौल
पहलगाम हमले के बाद से कश्मीर घाटी में शोक और गुस्से का माहौल है। आम नागरिकों ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए सरकार से मांग की है कि आतंकियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। कई सामाजिक संगठनों ने भी पीड़ित परिवारों के लिए सहायता अभियान चलाने का ऐलान किया है।
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इस हमले के बाद घाटी में सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। स्थानीय प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ाने और गश्त तेज करने के निर्देश दिए हैं।
राजनीतिक और धार्मिक नेताओं की प्रतिक्रिया
जहां केंद्र और राज्य सरकार ने इस हमले को “कायराना हरकत” करार दिया, वहीं कश्मीर के कई धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने भी आतंकवाद के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई है। जामिया मस्जिद से आए इस एकजुटता के संदेश ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कश्मीर के लोग आतंकवाद के खिलाफ खड़े हैं और शांति चाहते हैं।
धार्मिक नेताओं ने विशेष रूप से यह संदेश दिया कि कश्मीर की युवा पीढ़ी को हिंसा से दूर रहना चाहिए और शिक्षा व रोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहिए।