नई दिल्ली: देश की राजनीति में ऐसा उलटफेर कम ही देखने को मिलता है, जब एक साथ किसी पार्टी के बड़े चेहरे और उसके सांसद दूसरी पार्टी का दामन थाम लें। लेकिन इस बार जो हुआ, उसने पूरे सियासी गलियारे को हिला दिया है।
पढ़ें :- समर वेडिंग ट्रेंड: बॉलीवुड स्टाइल का जलवा
Raghav Chadha ने अचानक आम आदमी पार्टी (AAP) को अलविदा कहकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया और उनके साथ अकेले नहीं, बल्कि पूरे 7 राज्यसभा सांसद भी शामिल हो गए।
एक झटके में AAP को बड़ा नुकसान
राघव चड्ढा के साथ जिन नेताओं ने पार्टी छोड़ी, उनमें
- Raghav Chadha
- Swati Maliwal
- Harbhajan Singh
- Sandeep Pathak
- Ashok Mittal
- Rajinder Gupta
- Vikram Sahney
जैसे नाम शामिल हैं।
यानी, AAP के 10 में से 7 राज्यसभा सांसद एक साथ बाहर यह अपने आप में एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
पढ़ें :- ईद 2026 पर Salman Khan की धमाकेदार वापसी!
क्या बोले राघव चड्ढा?
BJP जॉइन करते हुए चड्ढा ने सीधा हमला बोलते हुए कहा:
“मैं सही आदमी हूँ, लेकिन गलत पार्टी में था”
उन्होंने आरोप लगाया कि AAP अब अपने मूल सिद्धांतों और ईमानदार राजनीति से भटक चुकी है।
AAP का पलटवार: ‘धोखा’ और ‘साजिश’ के आरोप
इस बड़े घटनाक्रम के बाद AAP ने इसे “धोखा” या “ऑपरेशन लोटस” बताते हुए BJP पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह पूरा घटनाक्रम एक सियासी साजिश के तहत हुआ है, ताकि पार्टी को कमजोर किया जा सके।
यह भी पढ़ें: ईद 2026 पर Salman Khan की धमाकेदार वापसी!
अंदरूनी कलह या बाहरी दबाव?
सूत्रों की मानें तो:
पढ़ें :- भीषण गर्मी से बचाव: डॉक्टरों की जरूरी सलाह
- चड्ढा और पार्टी नेतृत्व के बीच काफी समय से तनाव चल रहा था
- उन्हें हाल ही में राज्यसभा में अहम पद से हटाया गया था
- इसी के बाद यह “राजनीतिक विस्फोट” हुआ
संवैधानिक चाल: कैसे बची सांसदों की सदस्यता?
इस पूरे खेल का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि दो-तिहाई सांसदों के एक साथ पार्टी बदलने पर उनकी सदस्यता नहीं जाती यानी, यह सिर्फ भावनात्मक नहीं बल्कि एक सटीक रणनीतिक कदम भी माना जा रहा है।
क्या होंगे इसके राजनीतिक मायने?
- BJP को राज्यसभा में सीधा फायदा
- AAP की संसदीय ताकत को बड़ा झटका
आने वाले चुनावों में राजनीतिक समीकरण बदलने की संभावना
देश में मचा हंगामा लोगों की क्या राय?
सोशल मीडिया पर लोग दो हिस्सों में बंटे दिख रहे हैं:
- कुछ इसे “सही फैसला” बता रहे हैं
- तो कुछ इसे “राजनीतिक अवसरवाद” कह रहे हैं
सपन दास
देश और दुनिया की बाकी तमाम खबरों के लिए हमें फेसबुक, ट्वीटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फॉलो करें.