Jharkhand में कई सरकारी कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिला। कोषागार गड़बड़ी या प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल उठ रहे हैं।
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Ranchi: झारखंड में सरकारी कर्मचारियों का वेतन समय पर न मिलने का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में है। अप्रैल महीने के अंत तक भी कई विभागों के कर्मचारियों को उनका वेतन नहीं मिल पाया है, जिससे कर्मचारियों में नाराज़गी और असंतोष बढ़ता जा रहा है। इस पूरे मामले में कोषागार (Treasury) प्रणाली में गड़बड़ी और संभावित वित्तीय अनियमितताओं की आशंका जताई जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, राज्य के कई जिलों में कोषागार से भुगतान की प्रक्रिया बाधित हुई है। वित्त विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नई डिजिटल भुगतान प्रणाली में तकनीकी खामियों के कारण वेतन वितरण में देरी हुई है। हालांकि, कर्मचारियों के संगठनों का आरोप है कि यह केवल तकनीकी समस्या नहीं बल्कि वित्तीय कुप्रबंधन और गड़बड़ी का परिणाम है।
कर्मचारी संघों ने दावा किया है कि कोषागार में फंड की उपलब्धता के बावजूद भुगतान नहीं किया जा रहा है। उनका आरोप है कि बजट आवंटन और व्यय के बीच तालमेल की कमी है, जिससे इस प्रकार की स्थिति उत्पन्न हुई है। कुछ संगठनों ने तो इस मामले में “घोटाले” की भी आशंका जताई है और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
इस बीच, कई कर्मचारियों ने अपनी दैनिक जरूरतों को पूरा करने में हो रही कठिनाइयों को लेकर चिंता व्यक्त की है। खासकर निम्न और मध्यम वर्ग के कर्मचारियों पर इसका सीधा असर पड़ा है, जिनकी मासिक आय ही उनके जीवनयापन का मुख्य आधार होती है।
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विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उनका कहना है कि राज्य सरकार वित्तीय प्रबंधन में पूरी तरह विफल रही है। वहीं, सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया है कि जल्द ही सभी लंबित वेतन का भुगतान कर दिया जाएगा और यदि कहीं कोई अनियमितता पाई जाती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस संकट को कितनी जल्दी सुलझा पाती है और क्या वाकई इसमें किसी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी शामिल है या यह केवल तकनीकी खामी का परिणाम है। कर्मचारियों की निगाहें अब सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।
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